PoK में बगावत, बलूचिस्तान में लाशें, भारत ने भेजी परमाणु पनडुब्बियां, अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तानी सेना को ललकारा – mqm leader altaf hussain slams shehbaz asim munir on pok protest balochistan india nuclear submarine
Pok Protest: अल्ताफ हुसैन ने एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डाला है जिसमें उन्होंने कहा ‘बलूचिस्तान में आज भी माएं अपने बच्चों के शवों के साथ बैठी हैं। उनका अंतिम संस्कार नहीं किया गया है।
अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तानी हुकूमत पर साधा निशाना
लंदन/इस्लामाबाद: पाकिस्तान के निर्वासित नेता अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सरकार और आर्मी चीफ असीम मुनीर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है ‘कश्मीर में लोग विरोध में सड़कों पर उतरे हुए हैं बलूचिस्तान में लोग शवों के साथ धरना दे रहे हैं खैबर पख्तूनख्वा के हालात सबके सामने हैं भारत ने परमाणु पनडुब्बियां तैनात कर दी हैं पाकिस्तान गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है लेकिन शासक विदेशी मामलों में उलझे हुए हैं। क्या शासकों का यह रवैया सही है?
अल्ताफ हुसैन का ये बयान उस वक्त आया है जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भयानक प्रदर्शन हो रहे हैं। पीओके के रावलाकोट में चल रहे प्रदर्शन में कल एक लाख से ज्यादा लोग पहुंचे थे। पीओके के नेताओं ने पाकिस्तान के कब्जे के खिलाफ हल्ला बोल दिया है। उन्होंने ऐलान कर दिया है कि ‘पीओके पाकिस्तान का गुलाम नहीं रहेगा।’
पाकिस्तानी सरकार पर निशाना साधने वाले अल्ताफ हुसैन कौन हैं?
अल्ताफ हुसैन पाकिस्तान की राजनीति के एक बेहद चर्चित, प्रभावशाली और विवादास्पद नेता हैं। वह मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक हैं जो मुख्य रूप से कराची और सिंध में रहने वाले ‘मुहाजिरों’ यानि जो विभाजन के बाद भारत से पाकिस्तान गये थे और जो ऊर्दू भाषी मुस्लिम हैं उनके हितों की बात करती है। वह पिछले कई दशकों से लंदन में निर्वासित जिंदगी जी रहे हैं और वहीं से अपनी राजनीति चलाते हैं। एक वक्त उनका पाकिस्तान की राजनीति में काफी प्रभाव था लेकिन बाद में उन्हें गद्दार करार दे दिया गया।
अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तानी सेना की तीखी शब्दों में की आलोचना
उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोग अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं। अल्ताफ हुसैन ने एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डाला है जिसमें उन्होंने कहा ‘बलूचिस्तान में आज भी माएं अपने बच्चों के शवों के साथ बैठी हैं। उनका अंतिम संस्कार नहीं किया गया है। खैबर पख्तूनख्वा का हाल आप देख ही रहे हैं। और भारत ने अपने परमाणु हथियार लगाकर पनडुब्बियों को पाकिस्तान की तरफ भेज दिया है। महंगाई का हाल सबसे सामने है, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और फील्ड मार्शल असीम मुनीर ईरान-अमेरिका, अमेरिका-ईरान, सऊदी अरब-ईरान कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि इन लोगों को पाकिस्तान की कोई फिक्र नहीं है। पाकिस्तान जिन हालातों से जूझ रहा है इससे कोई वास्ता उन्हें नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ‘कश्मीरियों के साथ जो किया जा रहा है क्या वो सही किया जा रहा है?’
घरेलू मद्दों से कैसे भाग रहे पाकिस्तान के हुक्मरान?
अल्ताफ हुसैन ने सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान सरकार और सेना देश के भीतर सुलग रहे गंभीर मुद्दों जैसे कि गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoJK) में बुनियादी अधिकारों के लिए हो रहे बड़े प्रदर्शन, बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन और शवों के साथ धरने और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) में सुरक्षा व्यवस्था की बदहाली को सुलझाने में पूरी तरह नाकाम रही है।
लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।
अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।
विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।
पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।
पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए ‘बेस्ट राइटर’ अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।
अभिजात के खास इंटरव्यू:
अभिजात शेखर आजाद का ‘बॉर्डर-डिफेंस’ नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।… और पढ़ें