हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कई बड़े और रणनीतिक फैसले लिए गए हैं। बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की। इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने नई पहलों की घोषणा की है। यह बैठक वैश्विक समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
समुद्री सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का विस्तार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक में ‘इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’ (आईपीएमडीए) पहल के विस्तार की घोषणा की। रुबियो ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार का 60 प्रतिशत हिस्सा हिंद-प्रशांत क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा केवल क्वाड देशों के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के अनगिनत देशों के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, क्वाड देशों ने प्रशांत द्वीप समूह में बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक नई योजना शुरू की है।
फिजी में पहला संयुक्त पोर्ट प्रोजेक्ट
इस बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण फिजी को लेकर हुआ रणनीतिक फैसला रहा। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि क्वाड देश फिजी के पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे। यह इतिहास में पहली बार हो रहा है जब भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान किसी एकल बंदरगाह परियोजना पर एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस कदम को प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की दिशा में एक बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है।