Ranchi Protest,Opinion: देश के युवाओं का आक्रोश सिर्फ बेरोजगारी के कारण नहीं, विश्वास का भी है बड़ा संकट – students protest in india not only for jobs and fair exams – India News


प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए छात्र अकेला संघर्ष नहीं करता। परिवार तक आर्थिक कठिनाइयों का सामना इस उम्मीद में करता है कि एक दिन सरकारी नौकरी उनका जीवन बदल देगी। प्रयागराज, पटना, रांची, कोटा और दिल्ली जैसे शहरों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पांच-सात वर्षो तक तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा पर सवाल उठे तो वर्षों की मेहनत और समय दांव पर लग जाता है।

Jharkhand students protest
झारखंड में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है(फोटोANI)
लेखक: विवेक सिंह

झारखंड के रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में युवा छात्र-छात्राएं धरने पर बैठे हैं। उनके हाथों में तख्तियां हैं, आंखों में परीक्षा की वर्षों से जारी तैयारी का बोझ और मन में एक ही प्रश्न-क्या ईमानदारी से की गई मेहनत का परिणाम निष्पक्ष रूप से कभी मिल सकेगा? वैसे यह सवाल पूरे भारत का है, जहां युवाओं की एक बड़ी आबादी हर सुबह किसी न किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बिस्तर से उठती है। कोई गांव के एक छोटे- से कमरे में पढ़ाई कर रहा है, कोई शहर के महंगे कोचिंग संस्थान में, तो कोई नौकरी करते हुए रातों में किताबें खोल रहा है। इनकी मंजिलें भले अलग अलग हों, लेकिन भरोसा एक ही है-अगर मेहनत ईमानदार होगी, तो व्यवस्था भी निष्पक्ष होगी।

केवल बेरोजगारी वजह नहीं

देश में युवाओं का आक्रोश सिर्फ बेरोजगारी का नहीं, विश्वास के संकट का भी परिणाम है। परीक्षा में देरी, पेपर लीक, विवादित प्रश्न पत्र-परिणाम और परीक्षाएं रद्द होने से सिस्टम पर एक पूरी पीढ़ी का भरोसा टूटता है। देश में उच्च शिक्षा और डिग्रीधारियों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन गुणवत्तापूर्ण रोजगार उसी अनुपात में नहीं बढ़े। सीमित पदों के लिए लाखों युवा दावेदार होते हैं। झारखंड, बिहार समेत कई राज्यों में सरकारी नौकरी आर्थिक स्थिरता, सामाजिक सम्मान और सुरक्षित भविष्य की प्रतीक है। गांवों और कस्बों में सरकारी नौकरी को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना जाता, इसे माता-पिता के दशकों के संघर्ष के सम्मान, छोटे भाई-बहनों की शिक्षा के लिए बेहतर अवसर और परिवार के बढ़े हुए आत्मविश्वास से भी जोड़कर देखा जाता है।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए छात्र अकेला संघर्ष नहीं करता। परिवार तक आर्थिक कठिनाइयों का सामना इस उम्मीद में करता है कि एक दिन सरकारी नौकरी उनका जीवन बदल देगी। प्रयागराज, पटना, रांची, कोटा और दिल्ली जैसे शहरों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पांच-सात वर्षो तक तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा पर सवाल उठे तो वर्षों की मेहनत और समय दांव पर लग जाता है।

असंतोष की शुरुआत

1990 के दशक के आर्थिक उदारीकरण के बाद विश्वविद्यालयों और व्यावसायिक संस्थानों की संख्या बढ़ी। लेकिन इसी गति से गुणवत्तापूर्ण और स्थायी रोजगार नहीं बढ़ पाए। निजी क्षेत्र के अवसर अपेक्षाकृत बड़े शहरों तक सीमित रहे, जबकि छोटे शहरों और ग्रामीण भारत के लिए सरकारी नौकरी सबसे भरोसेमंद विकल्प बन गई। इसी दौरान कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक, OMR से छेड़छाड़, नकल आदि में संगठित गिरोहों की भूमिका सामने आई। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक सहित कई राज्यों में केस दर्ज हुए। यह किसी एक सरकार की नहीं, पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार की राष्ट्रीय चुनौती है जिसे जीतने के लिए कठोर कार्रवाई के साथ चयन प्रक्रिया को पारदर्शी सुरक्षित, जवाबदेह बनाना होगा।

जंतर-मंतर के आंदोलन से अलग

झारखंड का छात्र आंदोलन इसलिए अलग दिखाई देता है, क्योंकि यह पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग करता है। प्रश्नपत्र सुरक्षित हों, मूल्यांकन निष्पक्ष, परिणाम विश्वसनीय और नियुक्तियां समय पर हों। किसी एक परीक्षा या भर्ती का विरोध वे नहीं करते। वे परीक्षा, भर्ती में राजनीतिक हस्तक्षेप से भी मुक्ति चाहते हैं। आंदोलन कर रहे युवा किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नाही, व्यवस्था के प्रति जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। भाषायी गरिमा और संयम भी इसमें दिखता है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन से यह स्पष्ट रूप से अलग है। राजनीतिक नारों से दूरी, तिरंगा यात्रा और शांतिपूर्ण धरना इसकी पहचान है। यह भावना लोकतांत्रिक समाज में नागरिक चेतना का परिपक्व रूप है।
आज आवश्यकता केवल पेपर लीक रोकने की नहीं है। भर्ती एजेंसियों को मजबूत कर डिजिटल सुरक्षा, सुरक्षित प्रश्न पत्र, साइबर सुरक्षा, समय पर मूल्यांकन और हर चरण की जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। समाज को सोचना होगा कि सरकारी नौकरी ही सफलता का एकमात्र रास्ता क्यों हो? साथ ही, निजी क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और उद्यमिता में रोजगार बढ़ाने होंगे। दरअसल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से उठती आवाज करोड़ों युवाओं की आकांक्षा है। वे बस अपनी मेहनत का निष्पक्ष परिणाम चाहते हैं। पारदर्शी व्यवस्था और युवाओं से संवाद ही उनका भरोसा कायम कर सकता है।

(लेखक IIM शिलांग के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य और ‘बेहतर झारखंड’ संस्था के संस्थापक हैं)

अक्षय श्रीवास्तव

लेखक के बारे मेंअक्षय श्रीवास्तवअक्षय श्रीवास्तव, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मार्च 2025 में उन्होंने टाइम्स समूह का डिजिटल विंग नवभारत टाइम्स (NBT Digital) ज्वाइन किया। यहां अक्षय न्यूज टीम का हिस्सा हैं और राष्ट्रीय खबरों के साथ-साथ दिल्ली और अपराध से जुड़े समाचारों का संपादन और क्यूरेशन करते हैं। समय-समय पर वह फील्ड रिपोर्टिंग में भी उतरते हैं। अक्षय ग्राउंड पर जाकर खबरों के पीछे छिपी कहानी को निकालने में रुचि रखते हैं। अपने 13 साल के पत्रकारिता के अनुभव में अक्षय ने रिपोर्टिंग के साथ-साथ डेस्क पर भी कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। अक्षय ने साल 2019 और 2024 की राजनीति के निर्णायक लोकसभा चुनाव भी कवर किए हैं।

करियर के दौरान अक्षय ने प्रिंट मीडिया में एक लंबी पारी खत्म कर साल 2018 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा। यहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता का शुरुआती काम सीखा। इसके बाद वह दैनिक भास्कर के डिजिटल सेक्शन में काम करने लगे। यहां उन्होंने जीके सेक्शन की जिम्मेदारी संभाली। आज तक में कार्य के दौरान अक्षय ने कनमैलियों पर एक एक्सक्लूसिव स्टोरी की, जो चर्चा का विषय रही। नवभारत टाइम्स में वह कफ सिरप पीकर अपने बच्चे गंवाने वाले परिवारों तक पहुंचे और उनका दर्द जाना।

पत्रकारिता का अनुभव
अक्षय का पत्रकारिता करियर हिंदी अखबार दैनिक नव भारत भोपाल के साथ साल 2013 में बतौर ट्रेनी शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश से प्रकाशित राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर में 2014 से 2016 तक उप-संपादक के रूप में कार्य किया। 2016 से 2018 तक अक्षय ने दैनिक हरिभूमि समाचार पत्र में बतौर उप-संपादक काम किया। साल 2018 में दैनिक भास्कर के साथ उन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद जनवरी 2022 में AajTak डिजिटल के साथ जुड़े और मार्च 2015 तक होम पेज पर अपनी सेवाएं दीं।

अक्षय ने एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से बीएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) और एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की पढ़ाई की है। विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान वह कई प्रतियोगताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं।… और पढ़ें