RBI का बड़ा एक्शन: बाजार से ₹6 लाख करोड़ की नकदी गायब, क्या अब बदलेंगे ब्याज दरें?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार, 4 सितंबर को दो 3-दिवसीय VRRR (वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो) नीलामी के जरिए बाजार से ₹6.02 लाख करोड़ की नकदी वापस खींच ली है। RBI का यह कदम बैंकिंग सिस्टम में FCNR(B) इनफ्लो और स्वैप्स के कारण बढ़े रिकॉर्ड ₹10.3 ट्रिलियन के लिक्विडिटी सरप्लस को कम करने के लिए उठाया गया है। हाल ही में ओवरनाइट रेट्स स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) से नीचे चले गए थे, जिनमें अब सुधार होने की उम्मीद है। इससे लिक्विड और ओवरनाइट फंड्स में रिटर्न बेहतर हो सकता है।
VRRR दरअसल रिज़र्व बैंक की वह नीलामी प्रक्रिया है, जिसके ज़रिए वह बाज़ार से तय दरों पर अतिरिक्त नकदी (सरप्लस कैश) सोखता है। यह ओवरनाइट रेट्स को स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) और रेपो रेट के बीच बनाए रखने में मदद करता है। फिलहाल SDF दरें लगभग 5.00 फीसदी और रेपो रेट 5.25 फीसदी पर हैं। इस हफ्ते कॉल रेट्स SDF से भी नीचे गिर गए थे, जो बाजार में मौजूद भारी अतिरिक्त नकदी को दर्शाता है। अब RBI ने सोमवार को ₹7 ट्रिलियन की 30-दिवसीय VRRR नीलामी की योजना बनाई है।

शॉर्ट-टर्म ब्याज़ दरों पर VRRR का क्या पड़ेगा असर?
लिक्विडिटी में अस्थायी कमी आने से ओवरनाइट और कॉल रेट्स SDF के करीब मजबूत हो सकते हैं। रिटर्न की गणना (अक्रूअल) शुक्रवार की वैल्यू डेट से शुरू होगी; वहीं ऑटो-स्वीप FD बैंक के कट-ऑफ टाइम के हिसाब से काम करेंगे, जो अक्सर सोमवार होता है। एक्सचेंज पर इस कैटेगरी का रिडेम्पशन पैसा T+1 दिन में क्रेडिट होता है। अगर आप 7 दिनों के भीतर पैसा निकालते हैं, तो लिक्विड फंड्स पर एग्जिट लोड लगता है। हालांकि, ओवरनाइट फंड्स में आमतौर पर कोई एग्जिट लोड नहीं होता, जिससे वीकेंड पर पैसा लगाने के लिए ये बेहतर विकल्प बनते हैं।
FD, लिक्विड फंड और आपकी EMI पर क्या होगा असर?
बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरों में बदलाव बैंकों की फंडिंग जरूरतों पर निर्भर करता है, ना कि किसी एक दिन के लिक्विडिटी एक्शन पर। रेपो रेट 5.25 फीसदी पर होने और मार्केट में पर्याप्त सरप्लस के चलते बड़े बैंकों की FD दरें फिलहाल स्थिर रह सकती हैं। अभी टर्म डिपॉजिट की दरें मुख्य रूप से 6.00 से 6.75 फीसदी के बीच बनी हुई हैं। रही बात रेपो-लिंक्ड EMI की, तो VRRR से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा; EMI में बदलाव तभी होगा जब रिज़र्व बैंक रेपो रेट बदलेगा।
| 7% वार्षिक ब्याज दर पर FD (वार्षिक कंपाउंडिंग) | 5 वर्ष | 10 वर्ष | 15 वर्ष |
|---|---|---|---|
| ₹1,00,000 की राशि बढ़कर होगी | ₹1,40,255 | ₹1,96,715 | ₹2,75,903 |
सोमवार को किन बातों पर रहेगी नज़र: T-बिल यील्ड, CP/CD और RBI के अगले कदम
सोमवार को होने वाली 30-दिवसीय VRRR नीलामी के कट-ऑफ पर नजर बनाए रखें; इससे पता चलेगा कि RBI ओवरनाइट दरों में बढ़ोतरी को लेकर कितना सहज है। इसके अलावा 91-दिन, 182-दिन और 364-दिन वाले T-बिल यील्ड पर भी नजर रखें, जो फिलहाल 5.25–5.91 फीसदी के आसपास हैं। अगले हफ्ते बाजार में कमर्शियल पेपर (CP) और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) की सप्लाई बढ़ने से लिक्विड फंड्स का रिटर्न और बढ़ सकता है। हालांकि, आपकी मौजूदा रेपो-लिंक्ड होम या ऑटो लोन की EMI में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा।