Rbi गवर्नर को भरोसा:’अर्थव्यवस्था मजबूत, चुनौतियों को अवसर में बदलेंगे’, जानिए प्लास्टिक नोटों पर क्या योजना? – Rbi Policy Post-meet: Governor Sanjay Malhotra Asserts ‘strong’ Economy; Rbi Eyes Higher Capital Inflows Despi


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को भले ही स्थिर रखा हो, लेकिन वैश्विक चुनौतियों और बढ़ती महंगाई के बीच देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ा और आश्वस्त करने वाला संदेश दिया है। शुक्रवार को मुंबई में मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया कि भारत की आर्थिक स्थिति बेहद ‘मजबूत’ है और केंद्रीय बैंक मौजूदा चुनौतियों को भविष्य के लिए खुद को और मजबूत करने के अवसर में बदलने को लेकर आश्वस्त है।

आइए जानते हैं गवर्नर की इस अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रमुख बातें और भविष्य के लिए आरबीआई का आउटलुक:


  • ब्याज दरें स्थिर, लेकिन महंगाई पर पैनी नजर

आरबीआई ने ब्याज दरों में यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) के लिए अपने महंगाई दर के अनुमान में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद यह आंकड़ा 5.1 प्रतिशत हो गया है। इसके बावजूद, गवर्नर मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि आरबीआई का चार प्रतिशत महंगाई का लक्ष्य अभी भी बरकरार है और इसे टाला नहीं गया है। उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया कि आरबीआई केवल तभी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा जब महंगाई लगातार बनी रहेगी और व्यापक रूप ले लेगी।


  • विदेशी पूंजी प्रवाह और ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट’ पर उम्मीद

अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए आरबीआई और सरकार द्वारा उठाए गए नए नीतिगत कदमों से देश में अधिक विदेशी पूंजी प्रवाह की उम्मीद है। गवर्नर ने कहा कि इन उपायों के माध्यम से पूंजी प्रवाह के लिए कोई विशेष लक्ष्य तय नहीं किया गया है, लेकिन इसका उद्देश्य पूंजी निवेश को बढ़ाना है। वहीं, आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने बताया कि हाल की पहलों के दम पर इस साल ‘भुगतान संतुलन’ के काफी स्वस्थ रहने की उम्मीद है। गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि पूंजी की निकासी को रोकने के लिए फिलहाल किसी भी उपाय पर विचार नहीं किया जा रहा है।


  • अल नीनो और मानसून का डर बनी सबसे बड़ी चिंता

आरबीआई के सामने इस समय कुछ प्रमुख चुनौतियां भी हैं। गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, वर्तमान में आरबीआई की सबसे बड़ी चिंता ‘सप्लाई शॉक्स’ (आपूर्ति में बाधाओं) की लंबी अवधि और कीमतों पर इसका सीधा प्रभाव है। इसके अलावा, संभावित रूप से कमजोर मानसून और अल नीनो की स्थिति के कारण महंगाई पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को लेकर भी केंद्रीय बैंक सतर्क है। 


  • क्या भारत में आएंगे पॉलीमर (प्लास्टिक) करेंसी नोट?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक दिलचस्प जानकारी यह भी सामने आई कि देश में पॉलीमर (प्लास्टिक) करेंसी नोट पेश करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, गवर्नर ने साफ किया कि यह प्रस्ताव अभी अपने शुरुआती चरण में है और इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। 



आरबीआई गवर्नर का बयान बताता है कि कि केंद्रीय बैंक महंगाई और कमजोर मानसून जैसे बाहरी झटकों को लेकर सतर्क है, लेकिन अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने और मजबूत भुगतान संतुलन की उम्मीद यह दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अपनी विकास यात्रा जारी रखने के लिए तैयार है।


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