अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक फिर बढ़ गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के होर्मुज स्ट्रेट में जहाज पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर हमले किए हैं।
हाइलाइट्स
- होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हो रहे हमलों से सऊदी नाखुश
- ईरान के जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य: सऊदी
- तनाव पर सऊदी-पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने की बात

सऊदी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ईरान की ओर से अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के चार्टर और पड़ोसी संबंधों के नियमों का उल्लंघन हो रहा है। इसका सबूत कमर्शियल जहाजों पर ईरान के बार-बार होने वाले हमले हैं, जिनसे नेविगेशन की सुरक्षा और आजादी को खतरा पैदा होता है।
पाकिस्तान-सऊदी के विदेश मंत्रियों की बातचीत
अमेरिका और ईरान की हालिया झड़पों से पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई है। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने अमेरिका के ईरान पर हमलों और ईरान के खाड़ी में जवाबी हमलों को लेकर चिंता जाहिर की गई।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के अनुसार, दोनों विदेश मंत्रियों ने क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम पर विचारों का आदान-प्रदान किया और जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बावजूद तनाव बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की। सऊदी विदेश मंत्री ने चल रही राजनयिक कोशिशों पर सऊदी अरब का नजरिया साझा किया और तनाव कम करने तथा बातचीत जारी रखने के महत्व पर जोर दिया।
अमेरिका-ईरान में तनाव
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी ईरान और कतर के नेताओं के साथ अलग-अलग बातचीत की है। पाकिस्तान की ओर रुकी हुई अमेरिका-ईरान बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिश हो रही है। अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कराने में पाकिस्तान और कतर मुख्य मध्यस्थ हैं। ऐसे में पाकिस्तान समझौते के टूटने को लेकर चिंतित है।
अमेरिका ने हालिया दिनों से ईरान को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया के कई देशों पर हमले किए हैं। इस तनाव की शुरुआत मंगलवार से हुई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर हमले हुए। इन हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान पर स्ट्राइक की और फिर ईरान ने इसका जवाब दिया। इससे दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है और समझौता टूटने का खतरा है।
