Scrutiny of players’ documents begins; players who obtain government jobs through fraud will be tightened.


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पटना32 मिनट पहले

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राज्य में मेडल लाओ, नौकरी पाओ योजना में फर्जीवाड़े के मामले मिलने के बाद अब हर सर्टिफिकेट के क्रॉस वेरिफिकेशन की तैयारी है। इस योजना से नौकरी पाने वाले अधिकांश खिलाड़ियों के कागजात की स्क्रूटिनी शुरू हो गई है। पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। इधर एक महीने में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं। खिलाड़ियों ने बिना खेले ही फर्जी कागजात व मेडल जीतने की जानकारी देकर नौकरी ले ली। तीनों पर विभागीय कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज कराने के लिए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण अनुशंसा कर चुका है।

ताजा मामला वंदना कुमारी का है। वंदना ने बिना मैदान पर उतरे ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक विजेता बनकर नकद पुरस्कार पा लिया। सरकारी नौकरी भी ले ली। फर्जीवाड़े का पता चलते ही प्राधिकरण के महानिदेशक रवींद्रण शंकरण ने पटना एसएसपी को पत्र लिखकर वंदना कुमारी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की प्राथमिकी दर्ज करने को कहा है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।

एक महीने में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं, दो खिलाड़ी हो सकते हैं बर्खास्त

इससे पहले नौकरी पाने वाले रग्बी खिलाड़ी सुधांशु रंजन और ड्रैगन बोट के खिलाड़ी प्रकाश कुमार सिंह के खिलाफ फर्जीवाड़े की जांच चल रही है। दोनों फिलहाल सस्पेंड हैं। सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दोनों खिलाड़ियों के कागजात व आरोपों की जांच के साथ बर्खास्तगी की प्रक्रिया चल रही है। इस मुद्दे पर विभाग में दो बैठक हो चुकी है। इनके अलावा छह से अधिक अन्य खिलाड़ी और संबंधित खेल संघ भी संदेह के दायरे में हैं। खेल प्राधिकरण के सूत्रों ने बताया कि 15 अगस्त के बाद इस तरह के मामलों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खेल

जुलाई 2019 में पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में सीनियर वीमेंस नेशनल रग्बी 7एस चैंपियनशिप में बिहार की महिला टीम ने गोल्ड मेडल जीता था। सरकारी रिकॉर्ड में वंदना कुमारी का नाम 12वीं खिलाड़ी के रूप में दर्ज था। लेकिन, इंडियन रग्बी फुटबॉल यूनियन के रिकॉर्ड और सोशल मीडिया पर मौजूद मैच फुटेज की जांच में पाया गया कि पूरे टूर्नामेंट में जर्सी नंबर 12 पहनकर कोई दूसरी ही खिलाड़ी खेल रही थी। वंदना किसी भी मैच या टीम असेंबली में कहीं नजर नहीं आईं।

बाद में मेडल सेरेमनी के वीडियो में वंदना कुमारी मंच पर ट्रॉफी पकड़े तो दिखीं, लेकिन पूरी टीम में वही एकमात्र ऐसी सदस्य थी, जो बिहार टीम की आधिकारिक जर्सी में नहीं थीं। उसने मंच पर पीछे के रास्ते अलग से प्रवेश किया था। इस आधार पर उसने खेल सम्मान योजना के तहत 33,333 की नकद राशि हासिल कर ली। वंदना कुमारी वर्तमान में भवन निर्माण विभाग में कार्यरत हैं। रवींद्रण शंकरण ने भवन निर्माण विभाग के सचिव को पत्र लिखकर सिफारिश की है कि वंदना कुमारी द्वारा गलत तरीके से हासिल किए गए वित्तीय लाभ को रद्द कर उसकी वसूली की जाए। साथ ही विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए।

सोशल मीडिया के एक वीडियो से खुला राज

सोशल मीडिया पर ड्रैगन बोट खेल में विवाद और सुधांशु रोशन नामक व्यक्ति से जुड़े एक अन्य मामले के वीडियो वायरल हुए। इसके बाद खेल प्राधिकरण ने रग्बी व अन्य खेलों के पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए, तो वंदना कुमारी का फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। खेल विभाग अब ऐसे अन्य संदिग्ध मामलों की भी स्क्रूटिनी कर रहा है ताकि फर्जी खेल प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी लाभ और नौकरी हड़पने वाले गिरोह या खिलाड़ियों पर शिकंजा कसा जा सके। मेडल लाओ, नौकरी पाओ… योजना से पिछले दो साल में बिहार के 180 खिलाड़ियों को सीधी नौकरी मिली है।



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