SEBI के नए बायबैक नियम लागू: अब ओपन-मार्केट में निवेश से पहले जान लें ये 5 बड़े बदलाव
आज यानी 1 अगस्त, 2026 से शेयर बाजार में बायबैक के नए नियम लागू हो गए हैं। SEBI ने ओपन-मार्केट रूट को अब और भी सख्त सुरक्षा मानकों (गाइडलाइन्स) के साथ पेश किया है। नए बदलावों के तहत अब कंपनियों के पास 66 वर्किंग डेज की विंडो होगी, फंड का इस्तेमाल पहले करना होगा और प्रमोटर्स की होल्डिंग ISIN लेवल पर फ्रीज रहेगी। खास बात यह है कि कुछ तय जिम्मेदारियों के तहत अब कंपनियों के लिए मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति करना अनिवार्य नहीं होगा। निवेशकों के लिए अब सिर्फ बायबैक का साइज ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी घोषणाएं और टाइमलाइन भी उतनी ही अहम होंगी।
ओपन-मार्केट से होने वाली खरीदारी अब सामान्य ट्रेडिंग की तरह ही मानी जाएगी, इसके लिए कोई अलग विंडो या पहचान नहीं दिखाई जाएगी। पब्लिक अनाउंसमेंट के 4 वर्किंग डेज के भीतर ऑफर शुरू करना होगा और इसे 66 वर्किंग डेज में पूरा करना होगा। आज से लागू नियमों के मुताबिक, ओपन-मार्केट बायबैक की सीमा पेड-अप कैपिटल और फ्री रिजर्व के 15% से कम रखी गई है, साथ ही इसमें मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।

ओपन-मार्केट बनाम टेंडर रूट—SEBI के बायबैक नियम
| पैरामीटर | ओपन-मार्केट | टेंडर रूट |
|---|---|---|
| कौन हिस्सा ले सकता है | सभी शेयरधारक; प्रमोटर हिस्सा नहीं ले सकते | सभी शेयरधारक; प्रमोटर हिस्सा ले सकते हैं |
| कीमत का निर्धारण | विंडो के दौरान मार्केट ट्रेड के आधार पर | लेटर ऑफ ऑफर; आनुपातिक स्वीकृति (Proportionate acceptance) |
| समय सीमा | 66 वर्किंग डेज तक | तय टेंडरिंग विंडो |
| निश्चितता | स्वीकृति की कोई गारंटी नहीं | एक्सेप्टेंस रेशियो की घोषणा की जाती है |
SEBI बायबैक नियम: प्रमोटर होल्डिंग फ्रीज, डिस्क्लोजर और टाइमलाइन
बायबैक ऑफर के दौरान प्रमोटर्स और उनके सहयोगी शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं कर पाएंगे; उनकी होल्डिंग ISIN लेवल पर फ्रीज रहेगी। अब सिर्फ अखबारों में विज्ञापन देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि स्टॉक एक्सचेंज और कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक अलर्ट भी भेजने होंगे। कंपनी को बायबैक के लिए रखे गए कुल फंड का कम से कम 40% हिस्सा पहले हाफ (प्रथम छमाही) में ही इस्तेमाल करना होगा। मर्चेंट बैंकर की सेवाएं लेना अब वैकल्पिक है और उनकी जिम्मेदारियां अब कंपनी के तय अधिकारियों को सौंपी जा सकती हैं।
रिटेल निवेशकों के लिए जरूरी बातें: ट्रैकिंग, रिस्क और टैक्स के नियम
निवेशकों को बोर्ड की मंजूरी, पब्लिक अनाउंसमेंट और एक्सचेंज के खुलासों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। इसके साथ ही रोजाना होने वाले बायबैक वॉल्यूम और फंड के इस्तेमाल को भी ट्रैक करें। ध्यान रहे कि टेंडर ऑफर के उलट, ओपन-मार्केट बायबैक में प्रमोटर्स हिस्सा नहीं ले सकते। इसमें न तो प्राइस सपोर्ट का भरोसा है और न ही शेयर स्वीकार किए जाने की कोई निश्चितता। टैक्स की बात करें तो 1 अप्रैल, 2026 से बायबैक से होने वाली कमाई पर कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा, इसलिए अपने होल्डिंग पीरियड के हिसाब से टैक्स की दरों की जांच जरूर कर लें।