Stray Dogs Rampage In Shivpuri, Attacking Over 50 People In An Hour, Scratching 2-year-old Vedika’s – Madhya Pradesh News


शिवपुरी शहर की गलियों में खौफ है। ये खौफ किसी अपराधी का नहीं, दबंग या रंगदार का नहीं बल्कि हिंसक हो चुके शहरी कुत्तों का है। एक ही आवारा कुत्ते ने महज एक घंटे के भीतर आठ इलाकों को दहशत में डाल दिया। करीब 50 से अधिक लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर काटा और घायल कर दिया। सबसे दर्दनाक मंजर नवाब साहब रोड पर दिखा, जहां घर के बाहर खेल रही दो साल की मासूम वेदिका कुशवाह पर कुत्ते ने हमला कर दिया।

आठ अलग-अलग इलाकों में आतंक मचाया

बच्ची के गाल, कान और होंठ बुरी तरह नोच डाले। लहूलुहान वेदिका को परिजन जिला अस्पताल लेकर भागे, जहां डॉक्टरों को उसके मासूम चेहरे पर 35 टांके लगाने पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शनिवार शाम 4:30 से 5:30 बजे के बीच कुत्ते ने शहर के आठ अलग-अलग इलाकों में आतंक मचाया। महल के पीछे स्थित कॉलोनी में भी 2 साल की एक बच्ची पर जानलेवा हमला हुआ।

एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की भीड़ देर रात तक लगी रही

बच्ची गंभीर रूप से घायल है और जिला चिकित्सालय में भर्ती है। इधर, सब्जी मंडी में सब्जी व्यापारी पर झपट्टा मारने की घटना सीसीटीवी में कैद हो गई। व्यापारी जान बचाकर भागा, लेकिन पैर में गहरे जख्म हो गए। स्थानीय लोगों का दावा है कि शनिवार को ही शहर में 50 से अधिक लोग आवारा कुत्तों का शिकार बने। स्कूल से लौटते बच्चे, बाजार में महिलाएं, बुजुर्ग राहगीर किसी को नहीं बख्शा। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की भीड़ देर रात तक लगी रही।

घर से निकलने में लगता है डर

शहरवासियों का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा वर्षों से कुत्तों की नसबंदी का कार्यक्रम बंद पड़ा है। नतीजा, गलियों में झुंड के झुंड आवारा व हिंसक कुत्ते घूम रहे हैं। यह आवारा कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं। ‘हर रोज आधा सैकड़ा लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। बच्चे घर से निकलने में डरते हैं’, लगातार हमलों और जनाक्रोश के बाद नगर पालिका की टीम हरकत में आई। शनिवार देर शाम से कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया गया। कई कुत्तों को पकड़कर शेल्टर भेजा गया, लेकिन सवाल अब भी वही है क्या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगी?

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डॉग बाइट के मामलों में 45% तक इजाफा हुआ

यह घटना ऐसे वक्त हुई है जब सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर सख्त रुख अपना चुका है। 20 मई को कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि जरूरत पड़ने पर रेबीजग्रस्त, असाध्य रूप से बीमार या बेहद खतरनाक आवारा कुत्तों को दया-मृत्यु दी जा सकती है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि डॉग बाइट के मामलों में 45% तक इजाफा हुआ है। समय पर टीका न लगे तो रेबीज जानलेवा हो सकता है। खासकर बच्चों में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।

 


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