Su-57 Fighter Jet: रूस न सिर्फ एंटी-ड्रोन ऑपरेशन के लिए Su-57 का इस्तेमाल कर रहा है बल्कि उन्हें फ्रंट लाइन से 3,000 किलोमीटर से ज्यादा दूर तैनात भी कर रहा है। इससे पता चलता है कि मॉस्को अपने सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट को ज्यादा जोखिम वाले लड़ाई के मैदान में भेजने से हिचकिचा रहा है।
हाइलाइट्स
- यूक्रेन के हमलावर ड्रोन को रोकना दिख रहा Su-57
- यूक्रेन ने रूस के 3000 किलोमीटर अंदर किया था हमला
- रूस के रिफाइनरी में यूक्रेन के ड्रोन हमले से लगी आग

‘कीव पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक 6 जुलाई को ओम्स्क ऑयल रिफाइनरी पर हुए हमले के दौरान यूक्रेनी ड्रोन्स को रोकने के लिए रूस ने अपने Su-57 स्टील्थ फाइटर्स तैनात किए थे लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद रिफाइनरी पर हमला हो ही गया। यूक्रेन ने रूस के अंदर अभी तक का सबसे गहरा हमला किया था। ये हमला यूक्रेन ने रूस के अंदर 3000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर ड्रोन से किया था। वीडियो फुटेज में वहां पर Su-57 को तेजी से गुजरते देखा गया है और ऐसा लग रहा है कि वो ड्रोन को मारने की कोशिश कर रहा है लेकिन नाकाम साबित हो रहा है।
ड्रोन हमलों को रोकने में नाकाम रहा रूसी स्टील्थ Su-57
रूस न सिर्फ एंटी-ड्रोन ऑपरेशन के लिए Su-57 का इस्तेमाल कर रहा है बल्कि उन्हें फ्रंट लाइन से 3,000 किलोमीटर से ज्यादा दूर तैनात भी कर रहा है। इससे पता चलता है कि मॉस्को अपने सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट को ज्यादा जोखिम वाले लड़ाई के मैदान में भेजने से हिचकिचा रहा है। यूक्रेन के मॉनिटरिंग चैनल Exilenova+ ने एक फुटेज शेयर किया जिसमें Omsk ऑयल रिफाइनरी के पास एक Su-57 फाइटर जेट ड्रोन का शिकार करता हुआ दिखाई दे रहा है।
Exilenova+ ने कहा है कि रूसी जेट सिर्फ एक ड्रोन को ही मार गिरा पाया जबकि बाकी ड्रोन अपने टारगेट तक पहुंच गए। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ड्रोन हमले के बाद प्लांट में कामकाज रोक दिया गया है। खास बात यह है कि रूस के अपने खास Su-57 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल एंटी-ड्रोन ऑपरेशन के लिए करने की खबरें ऐसे समय में आई हैं जब एक हफ्ते पहले ही ऐसी तस्वीरें सामने आई थीं जिनमें Su-57 के विंग पाइलन्स पर R-73 एयर-टू-एयर मिसाइलें लगी हुई थीं न कि उसके अंदरूनी वेपन बे में।
हालांकि मिसाइलों को विंग पाइलॉन के नीचे ले जाने से Su-57 की स्टील्थ क्षमता खतरे में पड़ जाएगी हालांकि, अगर जेट को मुख्य रूप से ड्रोन-रोधी अभियानों के लिए तैनात किया जाता है तो स्टील्थ क्षमता बनाए रखने का कोई फायदा नहीं है।
ड्रोन युद्ध के लिए Su-57 को तैयार कर रहा रूस
Su-57 रूस का एकमात्र ऐसा ऑपरेशनल कॉम्बैट जेट है जिसमें एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार लगा है। इसका मतलब है कि AESA रडार ड्रोन और क्रूज मिसाइल के खतरों को ट्रैक करने में कहीं ज्यादा बेहतर हैं। इसके अलावा Su-57 में पैसिव 101KS इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सुइट भी लगा है। इसमें कॉकपिट के आगे एक इन्फ्रारेड सर्च-एंड-ट्रैक (IRST) सेंसर और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने के लिए एक इमेजिंग इन्फ्रारेड सेंसर शामिल है। IRST खास तौर पर धीमी गति से कम ऊंचाई पर उड़ने वाले और छोटे रडार सिग्नेचर वाले ड्रोन के खिलाफ असरदार होते हैं।
Su-57 की इन खूबियों का मतलब है कि इस जेट का इस्तेमाल ड्रोन के खतरों से निपटने के लिए असरदार तरीके से किया जा सकता है और रूस ने ऐसा करना शुरू भी किया है। लेकिन ये कितना कामयाब हो पाया है ये सवाल है क्योंकि यूक्रेन रूसी रिफाइनरी पर ड्रोन हमला करने में सफल रहा है। एक दिक्कत और ये है कि रूस के पास सीमित संख्या में ही Su-57 उपलब्ध हैं। रूस के पास अभी लगभग 30 ऑपरेशनल Su-57 फाइटर जेट्स का बेड़ा है जो 2027 तक 76 और एयरफ्रेम की डिलीवरी के मॉस्को के प्लान से काफी कम है। इसीलिए फिलहाल इस जेट की क्षमता पर नजर बनी रहेगी कि ड्रोन युद्ध में ये कितना असरदार साबित होता है।
