Success Story of NEET UG Student: पक्का और नेक इरादा रखने वालों की हिम्मत कभी नहीं टूटती, वे अपनी मंजिल पा ही लेते हैं। पश्चिम बंगाल के छोटे से गांव की लड़की स्मृतिलेखा की इसकी जीती-जागती मिसाल है। जिन्होंने गांव वालों की समस्या को खत्म करना ही अपने जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बना लिया और उसे पाने के लिए सुरक्षित सरकारी नौकरी तक छोड़ दी। इस मौके पर माता-पिता भी साथ खड़े रहे और बेटी के फैसले का पूरा सपोर्ट किया।

पहाड़ियों और प्राकृतिक खूबसूरती समेटे गांव की सबसे बड़ी परेशानी
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित पाउशी गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शहरी भागदौड़ से दूर शांत गांव के लिए जाना जाता है। यहां का ‘मोन चशा’ इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट शहरी लोगों को ग्रामीण संस्कृति, बांस के बने कॉटेज और खेती का अनुभव लेने के लिए आकर्षति करता है। लेकिन अपने अंदर प्राकृतिक खूबसूरती समेटे इस गांव का एक दूसरा पहलू भी है।
स्मृतिलेखा का कहना है कि पाउशी गांव में कोई हॉस्पिटल नहीं है। अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे इलाज पाने के लिए एक-दो घंटे का सफर करना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज न मिलने की वजह से गांव वालों की मौत तक हो जाती है। गांव वालों की जान बचाना ही स्मृतिलेखा और उनके पिता के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य बन गया।
टीचर हैं माता-पिता, बेटी को डॉक्टर बनने का सपना
स्मृतिलेखा गांव के बेहद साधारण मिडिल-क्लास परिवार से आती हैं। मां रीता गिरी और पिता बिमल कुमार गिरी टीचर हैं। लेकिन उनके पिता का सपना है कि बेटी डॉक्टर बने और गांव के लिए कुछ करे। बेटी ने भी अपने पिता के सपने को अपना सपना बना लिया और डॉक्टर बनने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ने में भी देर नहीं लगाई।
स्मृतिलेखा ने नवभारतटाइम्स.कॉम से खास बातचीत में कहा, ‘मेरे पिता का सपना डॉक्टर बनने का था और वे चाहते थे कि मैं उनके इस सपने को पूरा करूं। शुरू में, मुझे NEET के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बस इतना पता था कि मुझे डॉक्टर बनना है।’
नीट के लिए छोड़ दी सरकारी नौकरी
अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए NEET UG देश के सबसे कठिन एग्जाम्स में से एक माना जाता है। स्मृतिलेखा शुरू से पढ़ाई में काफी होशियार रही हैं। उन्होंने 94.4% नंबर के साथ 10वीं बोर्ड परीक्षा और 92% नंबरों के साथ 12वीं बोर्ड परीक्षा पास की की। 12वीं क्लास में उनके पास फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और बायोलॉजी (PCMB) विषय थे।
पढ़ाई में अच्छी होने की वजह से उन्हें 12वीं के बाद सरकारी नौकरी पाने में कोई ज्यादा परेशानी नहीं हुई। उन्हें पोस्ट ऑफिस की सरकारी नौकरी मिल गई। लेकिन डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने पोस्ट ऑफिस की एक सुरक्षित सेंट्रल गवर्नमेंट की नौकरी छोड़ दी।
जब सभी खिलाफ थे, तब पेरेंट्स ने किया सपोर्ट
स्मृतिलेखा कहती हैं- 12वीं के बाद, मैंने केंद्र सरकार के तहत पोस्टल डिपार्टमेंट में नौकरी के लिए फॉर्म भरा। नौकरी कन्फर्म होने के इंतजार के दौरान, मैं NEET एग्जाम की तैयारी भी करती रही।
नौकरी कन्फर्म होने पर, सबने कहा कि यह नौकरी सबसे अच्छी है और इससे मैं अपने परिवार की मदद भी कर पाऊंगी। बाकी लोग मेरे NEET क्लियर करने पर शक करते थे। किसी को भरोसा नहीं था कि आगे कुछ कर पाऊंगी। लेकिन मेरे लिए तैयारी और नौकरी दोनों को एक साथ संभालना मुश्किल हो रहा था, इसलिए मैंने नीट की तैयारी पूरी तरह छोड़ दी।
नौकरी के दो साल बाद भी मैं संतुष्ट नहीं थी, इसलिए मैंने नौकरी छोड़ने के बारे में अपने माता-पिता से बात की। मेरे आस-पास के सभी लोगों ने मुझे समझाने की कोशिश की कि नौकरी छोड़ना समझदारी भरा फैसला नहीं है, लेकिन मेरे माता-पिता ने मेरे फैसले का समर्थन किया और मैंने नौकरी छोड़ दी।
लोगों के तानों से बचने के लिए घर भी छोड़ा
जब मैंने दो साल के गैप के बाद NEET की तैयारी फिर से शुरू की, तो मेरे लिए पढ़ाई के माहौल में वापस आना बहुत मुश्किल था। जो कॉन्सेप्ट पहले आसान लगते थे, वे तब बिल्कुल नए और अनजान लग रहे थे। एक तरफ तैयारी फिर से शुरू करना मुश्किल था, और दूसरी तरफ लोग लगातार कह रहे थे कि मैंने गलत फैसला किया है। इसलिए मैंने अपना घर छोड़ने और सिलीगुड़ी जाने का फैसला किया, जहां मैंने PW विद्यापीठ में एडमिशन लिया।
वे कहती हैं, ‘शुरू में मैं रेगुलर नहीं थी, लेकिन मैंने टीचरों की बात माननी शुरू की और धीरे-धीरे मेरी लय बन गई। 2025 में, मैंने NEET में 470 स्कोर किया। इस साल मैंने 603 (AIR 9065) स्कोर किया।’ स्मृति ने NEET रैंक को 91,941 (2025) से बेहतर करके 9,065 (2026) किया और टॉप 10,000 में जगह बनाई है।
NEET एस्पिरेंट्स के लिए जरूरी टिप्स
स्मृति ने कहा, ‘भविष्य में, मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं और अपने गांव में एक हॉस्पिटल खोलना चाहती हूं जहां हर कोई इलाज के लिए आ सके।’
वे बाकी नीट एस्पिरेंट्स से कहती हैं कि अपनी बात सुनना और यह जानना बहुत जरूरी है कि आप क्या बनना चाहते हैं? समाज तो कुछ न कुछ कहेगा ही, चाहे आप अच्छा करें या बुरा, लेकिन आपको अपने माता-पिता की बात सुननी चाहिए और खुद पर भरोसा रखना चाहिए। इस फैसले के लिए 100% कमिटेड रहें।
अपने टीचरों पर भरोसा करना और उनकी बात सुनना भी बहुत जरूरी है, चाहे आप कहीं से भी पढ़ाई कर रहे हों। एक जरूरी बात यह है कि तैयारी के दौरान NCERT को कभी भी नजरअंदाज न करें।
स्मृतिलेखा की कहानी सामाजिक बदलाव, निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद करने, परिवार के विश्वास और त्याग की है।
