Success Story: NEET के लिए सरकारी नौकरी छोड़ी, ताकि बचाई जा सके गांव वालों की जान, अब डॉक्टर बनेंगी स्मृतिलेखा – success story oF smritilekha who quit her govt job for neet exam to save villagers lives now set to become a doctor at age 23


Success Story of NEET UG Student: पक्का और नेक इरादा रखने वालों की हिम्मत कभी नहीं टूटती, वे अपनी मंजिल पा ही लेते हैं। पश्चिम बंगाल के छोटे से गांव की लड़की स्मृतिलेखा की इसकी जीती-जागती मिसाल है। जिन्होंने गांव वालों की समस्या को खत्म करना ही अपने जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बना लिया और उसे पाने के लिए सुरक्षित सरकारी नौकरी तक छोड़ दी। इस मौके पर माता-पिता भी साथ खड़े रहे और बेटी के फैसले का पूरा सपोर्ट किया।

Success Story of NEET UG Student
स्मृतिलेखा ने नीट यूजी 2026 में 720 में 603 नंबर हासिल किए हैं। (फोटो सोर्स- NBT स्पेशल परमिशन के साथ)
NEET Success Story: ‘मैं एक ऐसे गांव से हूं जहां कोई हॉस्पिटल नहीं है। अगर कोई बीमार पड़ जाए, तो उसे सबसे पास के हॉस्पिटल तक जाने के लिए 1-2 घंटे का सफर करना पड़ता है। कई बार इमरजेंसी के समय यह सफर भी पूरा नहीं कर पाते और बिना इलाज के दम तोड़ देते हैं।’ यह कहना है पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित पाउशी गांव की होनहार लड़की स्मृतिलेखा का। नीट में 720 में 603 नंबर लाने वाली स्मृतिलेखा की सक्सेस स्टोरी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे गांव की जीत है।

पहाड़ियों और प्राकृतिक खूबसूरती समेटे गांव की सबसे बड़ी परेशानी

पहाड़ियों और प्राकृतिक खूबसूरती समेटे गांव की सबसे बड़ी परेशानी

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित पाउशी गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शहरी भागदौड़ से दूर शांत गांव के लिए जाना जाता है। यहां का ‘मोन चशा’ इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट शहरी लोगों को ग्रामीण संस्कृति, बांस के बने कॉटेज और खेती का अनुभव लेने के लिए आकर्षति करता है। लेकिन अपने अंदर प्राकृतिक खूबसूरती समेटे इस गांव का एक दूसरा पहलू भी है।

स्मृतिलेखा का कहना है कि पाउशी गांव में कोई हॉस्पिटल नहीं है। अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे इलाज पाने के लिए एक-दो घंटे का सफर करना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज न मिलने की वजह से गांव वालों की मौत तक हो जाती है। गांव वालों की जान बचाना ही स्मृतिलेखा और उनके पिता के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य बन गया।

टीचर हैं माता-पिता, बेटी को डॉक्टर बनने का सपना

टीचर हैं माता-पिता, बेटी को डॉक्टर बनने का सपना

स्मृतिलेखा गांव के बेहद साधारण मिडिल-क्लास परिवार से आती हैं। मां रीता गिरी और पिता बिमल कुमार गिरी टीचर हैं। लेकिन उनके पिता का सपना है कि बेटी डॉक्टर बने और गांव के लिए कुछ करे। बेटी ने भी अपने पिता के सपने को अपना सपना बना लिया और डॉक्टर बनने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ने में भी देर नहीं लगाई।

स्मृतिलेखा ने नवभारतटाइम्स.कॉम से खास बातचीत में कहा, ‘मेरे पिता का सपना डॉक्टर बनने का था और वे चाहते थे कि मैं उनके इस सपने को पूरा करूं। शुरू में, मुझे NEET के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बस इतना पता था कि मुझे डॉक्टर बनना है।’

नीट के लिए छोड़ दी सरकारी नौकरी

नीट के लिए छोड़ दी सरकारी नौकरी

अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए NEET UG देश के सबसे कठिन एग्जाम्स में से एक माना जाता है। स्मृतिलेखा शुरू से पढ़ाई में काफी होशियार रही हैं। उन्होंने 94.4% नंबर के साथ 10वीं बोर्ड परीक्षा और 92% नंबरों के साथ 12वीं बोर्ड परीक्षा पास की की। 12वीं क्लास में उनके पास फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और बायोलॉजी (PCMB) विषय थे।

पढ़ाई में अच्छी होने की वजह से उन्हें 12वीं के बाद सरकारी नौकरी पाने में कोई ज्यादा परेशानी नहीं हुई। उन्हें पोस्ट ऑफिस की सरकारी नौकरी मिल गई। लेकिन डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने पोस्ट ऑफिस की एक सुरक्षित सेंट्रल गवर्नमेंट की नौकरी छोड़ दी।

जब सभी खिलाफ थे, तब पेरेंट्स ने किया सपोर्ट

जब सभी खिलाफ थे, तब पेरेंट्स ने किया सपोर्ट

स्मृतिलेखा कहती हैं- 12वीं के बाद, मैंने केंद्र सरकार के तहत पोस्टल डिपार्टमेंट में नौकरी के लिए फॉर्म भरा। नौकरी कन्फर्म होने के इंतजार के दौरान, मैं NEET एग्जाम की तैयारी भी करती रही।

नौकरी कन्फर्म होने पर, सबने कहा कि यह नौकरी सबसे अच्छी है और इससे मैं अपने परिवार की मदद भी कर पाऊंगी। बाकी लोग मेरे NEET क्लियर करने पर शक करते थे। किसी को भरोसा नहीं था कि आगे कुछ कर पाऊंगी। लेकिन मेरे लिए तैयारी और नौकरी दोनों को एक साथ संभालना मुश्किल हो रहा था, इसलिए मैंने नीट की तैयारी पूरी तरह छोड़ दी।

नौकरी के दो साल बाद भी मैं संतुष्ट नहीं थी, इसलिए मैंने नौकरी छोड़ने के बारे में अपने माता-पिता से बात की। मेरे आस-पास के सभी लोगों ने मुझे समझाने की कोशिश की कि नौकरी छोड़ना समझदारी भरा फैसला नहीं है, लेकिन मेरे माता-पिता ने मेरे फैसले का समर्थन किया और मैंने नौकरी छोड़ दी।

लोगों के तानों से बचने के लिए घर भी छोड़ा

लोगों के तानों से बचने के लिए घर भी छोड़ा

जब मैंने दो साल के गैप के बाद NEET की तैयारी फिर से शुरू की, तो मेरे लिए पढ़ाई के माहौल में वापस आना बहुत मुश्किल था। जो कॉन्सेप्ट पहले आसान लगते थे, वे तब बिल्कुल नए और अनजान लग रहे थे। एक तरफ तैयारी फिर से शुरू करना मुश्किल था, और दूसरी तरफ लोग लगातार कह रहे थे कि मैंने गलत फैसला किया है। इसलिए मैंने अपना घर छोड़ने और सिलीगुड़ी जाने का फैसला किया, जहां मैंने PW विद्यापीठ में एडमिशन लिया।

वे कहती हैं, ‘शुरू में मैं रेगुलर नहीं थी, लेकिन मैंने टीचरों की बात माननी शुरू की और धीरे-धीरे मेरी लय बन गई। 2025 में, मैंने NEET में 470 स्कोर किया। इस साल मैंने 603 (AIR 9065) स्कोर किया।’ स्मृति ने NEET रैंक को 91,941 (2025) से बेहतर करके 9,065 (2026) किया और टॉप 10,000 में जगह बनाई है।

NEET एस्पिरेंट्स के लिए जरूरी टिप्स

NEET एस्पिरेंट्स के लिए जरूरी टिप्स

स्मृति ने कहा, ‘भविष्य में, मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं और अपने गांव में एक हॉस्पिटल खोलना चाहती हूं जहां हर कोई इलाज के लिए आ सके।’

वे बाकी नीट एस्पिरेंट्स से कहती हैं कि अपनी बात सुनना और यह जानना बहुत जरूरी है कि आप क्या बनना चाहते हैं? समाज तो कुछ न कुछ कहेगा ही, चाहे आप अच्छा करें या बुरा, लेकिन आपको अपने माता-पिता की बात सुननी चाहिए और खुद पर भरोसा रखना चाहिए। इस फैसले के लिए 100% कमिटेड रहें।

अपने टीचरों पर भरोसा करना और उनकी बात सुनना भी बहुत जरूरी है, चाहे आप कहीं से भी पढ़ाई कर रहे हों। एक जरूरी बात यह है कि तैयारी के दौरान NCERT को कभी भी नजरअंदाज न करें।

स्मृतिलेखा की कहानी सामाजिक बदलाव, निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद करने, परिवार के विश्वास और त्याग की है।

अमन कुमार

लेखक के बारे मेंअमन कुमारअमन कुमार, डिजिटल में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रॉड्यूसर पद पर हैं। शिक्षा और रोजगार जगत की खबरों के अनुभवी लेखक अमन को न्यूज वर्ल्ड में करीब 10 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है। वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। साल 2015 में साधना न्यूज चैनल से अपने करियर की शुरुआत करते हुए टीवी चैनल आउटपुट डेस्क और ‘मानव को शांति कहां’ मासिक पत्रिका से लेखन शैली को समझा। इसके बाद लाइव न्यूज हिंदी (लाइव इंडिया), जनसत्ता.कॉम, आजतक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहकर ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे। कई साल के अनुभव से अमन पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं। अमन रिपोर्ट्स बेस्ड, सटीक और विश्वसनीय जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। उनकी प्राथमिकता यूजर्स तक सही जानकारी को सरल शब्दों में समझाना रही है।

अमन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों जैसे स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षा, प्रवेश परीक्षा, सरकारी नौकरी, सरकारी रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स एंड ऑप्शंस, करेंट अफेयर्स, जनरल नॉलेज, सक्सेस स्टोरीज समेत कई टॉपिक्स पर गहरी सोच और समझ के साथ व्यापक कवरेज करते हैं। टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स, करियर काउंसलर की सलाह और टिप्स के जरिए स्कूल की खबरों से लेकर IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT, CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। इसके अलावा एसससी, यूपीएससी, बैंक, पुलिस समेत भारत और राज्य स्तर की सरकारी नौकरियों के बारे में विस्तार और गहराई से लिखते हैं।

गवर्नमेंट जॉब, प्राइवेट जॉब, स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक की फील्ड में काम करते हुए अमन ने भारत के प्रमुख शिक्षा बोर्ड CBSE के एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज, दिल्ली यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एडमिशन्स प्रोफेसर हनीत गांधी और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का खास इंटरव्यू कर स्टूडेंट्स के लिए क्वालिटी कंटेंट वाले ऑथेंटिक आर्टिकल्स लिखे हैं। इसके अलावा ABVP और NSUI जैसे छात्र संगठनों के प्रवक्ताओं का इंटरव्यू लिया है। सीबीएसई, रीट, नीट, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले टॉपर्स से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार करते रहे हैं। ताकि उनके टिप्स और सलाह से बाकी युवाओं के करियर को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।

दिल्ली में जन्मे अमन कुमार की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में B.A. ऑनर्स की डिग्री हासिल की। फिर डीयू के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उसके बाद गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। ये डिग्रियां अमन को हिंदी पत्रकारिता की वो एक्सपर्टीज देती हैं जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल (5 Ws+1H) यानी क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के पैमानों के आधार पर न्यूज राइटिंग के लिए जरूरी हैं… और पढ़ें