नई दिल्ली. देश की राजनीति में दो बातें बहुत साफ साफ दिख रही है. एक तरफ इंडी गठबंधन वाले लगातार पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हैं. लेकिन दूसरी तरफ आप देखिए कि मोदी के खिलाफ ये माहौल बन नहीं पा रहा है. और इसकी वजह भी साफ है… क्योंकि पीएम मोदी ऐसे-ऐसे काम कर रहे हैं जो पहले किसी ने नहीं किए हैं. इंडी गठबंधन के हमलों के बीच पीएम मोदी ने एक और बड़ा काम कर दिया है.
हरियाणा में पीएम मोदी ने देश की पहले हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई.
पीएम मोदी ने आज देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है. इसी के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में आ गया जहां हाइड्रोजन ट्रेन चलती है. यानी विपक्ष कितना ही माहौल बनाता रहे, पीएम मोदी भारत को बदलने वाले अपने मेगा प्लान पर लगे हैं. आप देखिए…
- हाइड्रोजन ट्रेन से लेकर बुलेट ट्रेन तक, इंडियन रेलवे पूरी तरह से बदल गई है.
- पीएम मोदी ने ऐसा प्लान बनाया है जिससे भारत के करीब 5.लाख करोड़ रुपये बचेंगे.
- तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर भारत अब दुनिया में बड़ा तेल एक्सपोर्टर बन जाएगा.
ये सब मुश्किल काम लग रहा है, लेकिन हाइड्रोजन ट्रेन और बुलेट ट्रेन का काम भी मुश्किल था. जो अब पूरा हो रहा है. कैसे हाइड्रोजन ट्रेन इंडियन रेलवे की तस्वीर बदल देगी और पीएम मोदी के मेगा प्लान से चीन क्यों परेशान हो गया है. ये सब आपको बताएंगे.
लेकिन पहले आप देखिए कि पीएम मोदी कैसे मिशन मोड में काम कर रहे हैं. पीएम मोदी ने एक ही दिन में तीन शहरों में कई प्रोजेक्ट और विकास परियोजनाओं की शुरुआत की. जींद में हाइड्रोजन ट्रेन, फिर चंडीगढ़, जहां 4 हजार 700 करोड़ के प्रोजेक्ट लॉन्च किए. उसके बाद पीएम मोदी जालंधर गए, जहां 5 हजार 470 करोड़ के रेलवे और रोड प्रोजेक्ट लॉन्च किए.
पीएम मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. हाइड्रोजन ट्रेन यानी वो ट्रेन जो डीजल या बिजली से नहीं चलती है. ये अपनी बिजली खुद बनाती है. इस ट्रेन से और कितने फायदे हैं वो आगे बताएंगे. लेकिन पहले सुनिए कैसे हाइड्रोजन ट्रेन के साथ जींद का नाम हमेशा के लिए जुड़ गया है.
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अपने आप में बहुत खास है. दुनिया के जिन देशों में हाइड्रोजन ट्रेन चल रही हैं. भारत की ट्रेन उन सबसे अलग और ज्यादा पावरफुल है. आप को इस हाइडोजन ट्रेन के बारे में बताते हैं:
- हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चलेगी.
- 90 किलोमीटर के रूट पर 10-12 स्टेशन होंगे.
- ट्रेन में 10 कोच हैं, 2600 यात्री बैठ सकते हैं.
- ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 75Km/प्रति घंटा है.
- ट्रेन में चेयर कार और खड़े होने के लिए हैंड ग्रिपर हैं.
- ट्रेन का किराया 5 रुपये से 25 रुपये के बीच है.
भारत की हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन भी है. बाकी देशों में जहां 3-4 कोच होते हैं. भारत की ट्रेन में 10 कोच हैं. और ये दुनिया की सबसे पावरफुल हाइड्रोजन ट्रेन भी है.हाइड्रोजन ट्रेन को चलने के लिए डीजल या फिर बाहरी बिजली की जरूरत नहीं होती है. और इस से प्रदूषण भी नहीं होता है. बल्कि हाइड्रोजन ट्रेन तो धुएं की जगह भाप छोड़ती है.
हाइड्रोजन ट्रेन कैसे काम करती है?
- हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है.
- इस में ट्रेन के अंदर हाइड्रोजन से भरे सिलेंडर रखे होते हैं.
- इसी के साथ ट्रेन में एक प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन यानी PEM होता है.
- ये PEM हाइड्रोजन गैस को तोड़कर बिजली बनाता है, जिस से ट्रेन चलती है.
- इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन गैस आस पास मौजूद ऑक्सीजन से रिएक्शन करती है.
- इस रिएक्शन के बाय प्रोडक्ट के रूप में ट्रेन से भाप बाहर आता है.
- जिस से प्रदूषण नहीं होता है पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है.
- एक्स्ट्रा बिजली को ट्रेन की लिथियम-आयन बैटरी में स्टोर किया जाता है.
यानी हाइड्रोजन ट्रेन अपने लिए खुद बिजली बनाती है. जो इंडियन रेलवे के लिए एक क्रांतिकारी स्टेप है. आज हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के दौरान पीएम मोदी ने रेलवे के इलेक्ट्रिफिकेशन का भी जिक्र करके पहले ही सरकारों पर निशाना साधा. हाइड्रोजन ट्रेन तो एक उदाहरण है कि मोदी सरकार कैसे रेलवे को बदल रही है. हाइड्रोजन ट्रेन से भारत इसके अलावा अगर पिछले 12 साल की बात करें तो अंतर साफ दिखाई देता है.
ब्रॉड गेज रेलवे Electrification : 2014 तक सिर्फ 20% था, जो 2026 में 99.6% हो चुका है.
Electrification की स्पीड : 2004 से 2014 तक 1.4 KM प्रति दिन, 2023-24 में लगभग 20 KM प्रति दिन
नवंबर 2025 तक, भारतीय रेलवे ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को 3.68 MW (2014) से बढ़ाकर 898 MW कर लिया है, जो बड़ा जंप है.
दुनिया में ब्रॉड गेज Electrification
भारत – 99%
चीन – 82%
स्पेन – 67%
जापान – 64%
फ्रांस – 60%
यूनाइटेड किंगडम – 39%
भारत दुनिया में ब्रॉड गेज रेलवे Electrification के मामले में सबसे आगे है.और इस से भारत को कितना फायदा हो रहा है, या डीजल की कितनी बचत हो रही है वो भी बताते हैं…
रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन से बचत
2014 में डीजल पर खर्च – करीब 18.5 हजार करोड़/सालाना
अब सालाना बचत- 6 हजार करोड़
डीजल का इस्तेमाल – 180 करोड़ लीटर/सालाना कम हुआ
पीएम मोदी की नीतियों का असर है कि ईरान युद्ध का भारत पर उतना असर नहीं पड़ा. भारत अपनी जरूरत का तेल लगातार मंगा रहा था. रूस से जमकर तेल खरीद रहा था. भारत की रिफाइनरियां भी फुल पोटेंशियल पर काम कर रही थी. अब तो स्थिति ये है कि भारत रीफाइंड फ्यूल का नया स्विंग सप्लायर बनता जा रहा है. यानी रीफाइंड फ्यूल दुनिया को बेचने में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है. आप देखिए
- भारत का रिफाइंड फ्यूल यानी डीजल, जेट फ्यूल और गैसोलीन का एक्सपोर्ट बढ़ा है.
- जुलाई में भारत 14 लाख बैरल रिफाइंड फ्यूल प्रतिदिन एक्सपोर्ट करने जा रहा है.
- भारत का ये एक्सपोर्ट मई के मुकाबले 50% ज्यादा है.
- भारत गजब की प्लानिंग के साथ रिफाइंड फ्यूल बेच रहा है.
- उन देशों पर फोकस कर रहा है जहां डिमांड सबसे ज्यादा है.
- यानी भारत सस्ता तेल खरीद के उसे रिफाइन करके एक्सपोर्ट कर रहा है.
- और जहां से सबसे ज्यादा मार्जिन मिल रहा है वहां बेच रहा है.
- जैसे भारत ने मई 2026 में अफ्रीका को 80% डीजल बेचा था.
- जबकि अप्रैल में अफ्रीका को सिर्फ 32% डीजल बेच रहा था.
- और अब रूस-यूक्रेन और मिडिल ईस्ट युद्ध की वजह से ग्लोबल रिफाइनरीज प्रभावित हुई हैं.
- वैश्विक स्तर पर डीजल, जेट फ्यूल और गैसोलीन की कमी हो रही है.
- रूस की कई तेल कंपनियों ने भारत की रिफाइनरीज से संपर्क किया है.
- इसका फायदा भारत की रिफाइनरीज को हो रहा है.
- इतना ही नहीं भारत लगातार अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी भी बढ़ा रहा है.
- पिछले 5 साल में भारत के रिफाइनिंग सेक्टर में निवेश 23% बढ़ा है.
- इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक भारत की रिफाइनिंग क्षमता 2030 तक 15% बढ़ सकती है.