TRAI का नया SMS नियम: अब फर्जी OTP और स्पैम मैसेज पर लगेगी लगाम, जानें क्या है ‘प्री-टैगिंग’ | TRAI New SMS Rules 2026: Understanding Variable Pre-tagging To Stop OTP Fraud And Spam Messages


TRAI का नया SMS नियम: अब फर्जी OTP और स्पैम मैसेज पर लगेगी लगाम, जानें क्या है ‘प्री-टैगिंग’

25 अगस्त 2026 से कमर्शियल एसएमएस (Commercial SMS) को लेकर TRAI का ‘वेरिएबल प्री-टैगिंग’ नियम पूरी तरह से सुर्खियों में आ गया है। टेलीकॉम ऑपरेटर्स अब अपने नेटवर्क पर मैसेज टेम्पलेट की स्क्रूटनी काफी सख्त कर रहे हैं। बैंकों, फिनटेक कंपनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और एग्रीगेटर्स को अब अपने हर डायनामिक फील्ड की जानकारी ‘डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी’ (DLT) प्लेटफॉर्म पर देनी होगी और उसे वैलिडेट कराना होगा। इस पूरी कवायद का मकसद फर्जी ओटीपी (OTP), फेक लोन मैसेज पर लगाम लगाना और यूजर्स को मैसेज भेजने वाले की सही पहचान बताना है।

प्री-टैगिंग व्यवस्था के तहत मैसेज भेजने वालों को रजिस्ट्रेशन के समय ही टेम्पलेट के बदलते हिस्सों (variables)—जैसे URL, ऐप लिंक, कॉलबैक नंबर और अमाउंट—को लेबल करना होगा। इसके बाद टेलीकॉम ऑपरेटर्स डिलीवरी से पहले इन वैरिएबल्स का मिलान अपनी ‘व्हाइटलिस्ट’ से करेंगे। यह कड़ा सुरक्षा घेरा ऐसे छिपे हुए लिंक्स या नंबरों को ब्लॉक कर देता है, जिनके जरिए अक्सर स्मीशिंग और अकाउंट टेकओवर जैसी धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाता है। TRAI के कंसल्टेशन टेक्स्ट में इन सख्त नियमों को शामिल किया गया है।

TRAI New SMS Rules 2026: Understanding Variable Pre-tagging to Stop OTP Fraud and Spam Messages

TRAI SMS प्री-टैगिंग: डेडलाइन, सख्ती और किसके लिए हैं ये नियम

ट्राई (TRAI) ने 18 नवंबर 2025 को अपने मुख्य निर्देश जारी किए थे। इसके तहत नए टेम्पलेट्स को 10 दिनों के भीतर इन नियमों के दायरे में लाना था, जबकि 30 दिनों के भीतर ‘वैरिएबल-टैग स्क्रबिंग’ और ‘व्हाइटलिस्ट चेकिंग’ की शुरुआत हो चुकी थी। वहीं, पुराने टेम्पलेट्स के लिए “लॉगर मोड” (logger mode) में 60 दिनों का माइग्रेशन समय दिया गया था। इसके बाद, अगर कोई भी मैसेज वैरिएबल-टैग जांच में खरा नहीं उतरता है, तो उसे सीधे रिजेक्ट कर दिया जाएगा और वह डिलीवर नहीं होगा। टेलीकॉम कंपनियों, एग्रीगेटर्स, बैंकों और फिनटेक संस्थानों को इन नियमों के मुताबिक खुद को ढालना होगा।

TRAI नियमों से OTP, बैंक और फिनटेक कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?

बैंकों और फिनटेक कंपनियों के ट्रांजैक्शनल अलर्ट पहले की तरह मिलते रहेंगे, लेकिन अब मैसेज के बदलते हिस्सों में टैग लगे होंगे—जैसे OTP, अकाउंट, अमाउंट या डेट। इन फील्ड्स में सिर्फ तय टैग के मुताबिक ही डेटा भरा जा सकेगा, साथ ही इसमें दिए गए URL या नंबर का पहले से व्हाइटलिस्ट होना जरूरी है। कई DLT पोर्टल्स ने जनवरी 2026 से ही नए टेम्पलेट्स के लिए टैगिंग अनिवार्य कर दी थी। ऐसे में, जो कंपनियां पीछे रह गई हैं, कड़ाई बढ़ने पर उनके मैसेज की डिलीवरी अचानक रुक सकती है।

यूजर्स तुरंत करें ये काम: 1909 पर DND एक्टिवेट करें, स्पैम रिपोर्ट करें और फर्जी हेडर पहचानें

अपनी ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ (DND) प्रेफरेंस सेट या अपडेट करने के लिए 1909 पर SMS भेजें। अगर कोई स्पैम मैसेज आए, तो 7 दिनों के भीतर 1909 पर, अपने ऑपरेटर के ऐप से या फिर TRAI के DND ऐप/पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जाने-पहचाने दिखने वाले संदेशों में भी बिना जांच वाले लिंक्स पर क्लिक न करें। मैसेज भेजने वाले का हेडर ध्यान से जांचें; आधिकारिक पोर्टल्स पर फर्जी हेडर्स पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, अपना OTP हमेशा गोपनीय रखें।

नेटवर्क पर स्क्रबिंग प्रक्रिया एक समान होने से आने वाले समय में OTP और बैंकिंग अलर्ट ज्यादा सुचारू रूप से मिलेंगे। हालांकि, टेम्पलेट ठीक करने के दौरान कुछ कंपनियों के मैसेज डिलीवर होने में अस्थाई रूप से गिरावट आ सकती है। अगले कुछ हफ्तों में टेलीकॉम ऑपरेटरों और कंपनियों की तरफ से जारी होने वाले अपडेट्स पर नजर रखें। अगर कोई जरूरी SMS न मिले, तो ऐप के जरिए वेरिफिकेशन का इस्तेमाल करें या वेरिफाइड हेल्पलाइन पर कॉल करें। फर्जी मैसेजेस की शिकायत करते रहें; आपकी लगातार शिकायतों से टेलीकॉम कंपनियों को स्पैम पर तेजी से नकेल कसने में मदद मिलेगी।



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