नई दिल्ली: यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में भारत का दबदबा और मजबूत हो गया है. साल 2028-29 की सदस्यता के लिए भारत ने जैसे ही मिशन शुरू किया, दुनिया भर के दिग्गज समर्थन में खड़े होने लगे हैं. हाल ही में यूरोपीय देश पोलैंड ने नई दिल्ली में भारत की दावेदारी का खुलकर समर्थन कर दिया है. पोलैंड के विदेश राज्य मंत्री व्लादिस्लाव थियोफिल बार्टोशेव्स्की ने भारत की कूटनीतिक ताकत का लोहा मानते हुए इसे ग्लोबल साउथ की सबसे मजबूत आवाज बताया है. पोलैंड का ये साथ भारत के लिए खास है क्योंकि चुनाव जीतने के लिए भारत को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो-तिहाई यानी कम से कम 129 देशों के वोटों की जरूरत है.
‘हम UNSC में भारत की दावेदारी का समर्थन करते हैं’: पोलैंड
पोलैंड के विदेश राज्य मंत्री व्लादिस्लाव थियोफिल बार्टोशेव्स्की ने भारत की कूटनीतिक कोशिशों और यूएन में सुधार की मांग पर एक बहुत बड़ा बयान दिया है. उन्होंने एएनआई को दिए इंटरव्यू में सुरक्षा परिषद के पुराने ढांचे पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में कुछ देशों की वीटो पावर के चलते ये संस्था पूरी तरह लाचार हो जाती है. बार्टोशेव्स्की के मुताबिक, इसी वीटो की वजह से दुनिया के बड़े और जरूरी फैसलों को रोक दिया जाता है, इसलिए अब इस सिस्टम में तुरंत सुधार होना बेहद जरूरी है.
बार्टोशेव्स्की ने सुरक्षा परिषद के सुधारों पर जोर देते हुए साफ कहा ‘हां, हम साल 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का पूरी तरह समर्थन करते हैं. हम सुरक्षा परिषद में सुधारों के पक्षधर हैं और मानते हैं कि समय के साथ इसमें बदलाव होना बेहद जरूरी है’.
पोलैंड का ये समर्थन इसलिए भी बहुत मायने रखता है क्योंकि वह यूरोपीय संघ (EU) का एक बेहद सक्रिय और रसूखदार सदस्य है. पोलैंड का भारत के साथ खुलकर खड़े होना साफ दिखाता है कि यूरोप के बड़े और ताकतवर देशों के बीच अब भारत की कूटनीतिक पैठ कितनी गहरी हो चुकी है.
भारत का ‘शांति’ (SHANTI) विजन और कड़ा मुकाबला
भारत ने हाल ही में साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की इस अस्थायी सीट का दावा ठोकते हुए अपनी वैश्विक मुहिम शुरू की है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस अभियान का नेतृत्व करते हुए भारत का SHANTI विजन दुनिया के सामने पेश किया है.
इस विजन का पूरा नाम Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity है. हालांकि, भारत के लिए ये मुकाबला इतना आसान नहीं होने वाला है, क्योंकि एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की इस एक सीट के लिए भारत की सीधी टक्कर ताजिकिस्तान से है.
ताजिकिस्तान को 57 मुस्लिम देशों के संगठन ‘ओआईसी’ (OIC) का समर्थन हासिल है. ऐसे में भारत को चुनाव जीतने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के दो-तिहाई देशों (193 में से कम से कम 129 देशों) के वोटों की जरूरत होगी. इसी सिलसिले में पोलैंड, ऑस्ट्रिया, अमेरिका और फिजी जैसे देशों का खुला समर्थन भारत के पलड़े को बेहद भारी बना रहा है.
भारत के लिए इस समर्थन के क्या मायने हैं?
पोलैंड का ये खुला समर्थन भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है. इसे केवल एक वोट के तौर पर देखना गलत होगा, बल्कि इसके पीछे छिपे कूटनीतिक मायने बेहद गहरे हैं.
- ग्लोबल साउथ की बुलंद आवाज बनना : भारत लगातार विकासशील और गरीब देशों (ग्लोबल साउथ) की समस्याओं को वैश्विक मंचों पर उठाता रहा है. सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य बनने से भारत को इन देशों की आवाज को सीधे सबसे शक्तिशाली टेबल पर रखने का मौका मिलेगा. पोलैंड का समर्थन यह साबित करता है कि विकसित पश्चिमी देश भी भारत को इस भूमिका के लिए सबसे सही उम्मीदवार मानते हैं.
- स्थायी सदस्यता के दावे को मिलेगी ताकत : भारत का अंतिम लक्ष्य सुरक्षा परिषद में वीटो पावर के साथ स्थायी सीट हासिल करना है. इसके लिए भारत ‘जी-4’ यानी जापान, जर्मनी और ब्राजील के साथ मिलकर लगातार प्रयास कर रहा है. जब भारत 2028-29 में अस्थायी सदस्य के रूप में अपनी कूटनीतिक सूझबूझ और शांति प्रयासों का लोहा मनवाएगा तो इससे सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए उसका दावा और ज्यादा मजबूत हो जाएगा.
- आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा पर कड़ा रुख : भारत हमेशा से संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच पर आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर बेहद सख्त रहा है. अब सुरक्षा परिषद की इस सीट पर बैठकर भारत के पास टेररिज्म के खिलाफ बड़ी कूटनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक करने का मौका होगा. इस ताकतवर मंच के जरिए भारत पाकिस्तान जैसे देशों को बेनकाब करते हुए आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों पर कड़ा शिकंजा कस सकेगा. इसके अलावा, टेरर फंडिंग को पूरी तरह ठप करने और समुद्री लुटेरों व घुसपैठियों पर लगाम लगाने के लिए भारत सीधे UNSC में बड़े और कड़े प्रस्ताव पास करवा सकता है.
इतिहास में भारत का दमदार ट्रैक रिकॉर्ड
ये पहली बार नहीं है जब भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस खास मेज पर बैठने की तैयारी कर रहा है. भारत का संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों और सुरक्षा परिषद में एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक रिकॉर्ड रहा है.
- आठ बार की सदस्यता: भारत इससे पहले आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है और हर बार भारत ने वैश्विक शांति में बड़ी भूमिका निभाई है.
- पीसकीपिंग में सबसे आगे: संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में भारत ने अब तक 50 से अधिक शांति मिशनों में लगभग 3,00,000 सैनिकों को भेजा है, जो दुनिया के किसी भी देश की तुलना में सबसे बेहतरीन रिकॉर्ड्स में से एक है.
पोलैंड जैसे देशों का समर्थन ये साफ करता है कि दुनिया अब भारत को केवल एक बड़ी आबादी वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक समस्याओं को सुलझाने वाले एक बेहद जिम्मेदार और ताकतवर वैश्विक लीडर के रूप में देख रही है.