Up:हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी- यूपी पुलिस के लिए संविधान से बड़ी राजनीतिक आकाओं की खुशी, यहां नहीं कानून का राज – High Court’s Harsh Comment – For Up Police, The Happiness Of Political Masters Is Bigger Than The Constitution


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यूपी पुलिस के लिए संविधान नहीं, राजनीतिक आकाओं को खुशी बड़ी है। मलाईदार तैनाती के लिए उन्हें खुश करना ही उनका मकसद है। भले ही इसके लिए उन्हें किसी की अवैध गिरफ्तारी करनी पड़े या फर्जी मुठभेड़, वे करने से नहीं घबराते। उन्हें भरोसा है कि उन्हें उनके आका बचा लेंगे। यही कारण है कि यूपी में कानून का राज नहीं, बल्कि अफसरों की सनक और राजनीतिक आकाओं को खुश करने का खेल अपने चरम पर हैं।


इस तल्ख टिप्पणी संग न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने गाजियाबाद के नंदग्राम थाने में एक ही परिवार के पिता – पुत्र और बहू के ख़िलाफ़ गैंगस्टर अधिनियम के तहत लंबित अपराधिक कार्यवाही रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि याची राजेंद्र त्यागी, उनके बेटे दीपक त्यागी और बहू ललिता त्यागी के खिलाफ जिन दो एफआईआर को आधार बनाकर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया था, वे जमीन के लेन-देन और वित्तीय विवादों से संबंधित थीं। इसके आधार पर केवल धोखाधड़ी या जालसाजी का आरोप बन सकता था।

इनके आधार पर उन्हें संगठित गिरोह का सदस्य नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद पुलिस की इस कार्रवाई के कारण महिला को अवैध रूप से 80 दिन तक जेल में रहना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि 35 वर्षीय गृहिणी ललिता त्यागी को एफआईआर दर्ज होने के अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उनके खिलाफ गिरफ्तारी को उचित ठहराने वाला कोई ठोस आधार अभिलेखों पर मौजूद नहीं था। लिहाजा, कोर्ट ने इस गिरफ्तारी को प्रथम दृष्टया अवैध, मनमाना और कानून के विपरीत बताया।


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