<p>रामभद्राचार्य के सत्संग के आखिरी दिन उन्हें CM योगी आदित्यनाथ से भी रामकथा सुनने को मिली। योगी महंत हैं, और पॉलिटीशियन भी हैं। इसलिये महर्षि वाल्मीकि की रामायण से थोड़ा हटकर उनकी कथा में पॉलिटिकल कॉन्टेन्ट प्रचुर मात्रा में था। योगी राम-रावण..धर्म-अधर्म पर बोले। लेकिन उनकी कथा में सबसे ज़्यादा प्रसंग आया मारीच और सुबाहू की जोड़ी का..और खर-दूषण की जोड़ी का। योगी ने किसी का नाम नहीं लिया। लेकिन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अंतर्यामी निकलीं। बोलीं- हम समझते नहीं क्या कि ये हमें ही बोल रहे हैं। रामभद्राचार्य के सत्संग के आखिरी दिन उन्हें CM योगी आदित्यनाथ से भी रामकथा सुनने को मिली। योगी महंत हैं, और पॉलिटीशियन भी हैं। इसलिये महर्षि वाल्मीकि की रामायण से थोड़ा हटकर उनकी कथा में पॉलिटिकल कॉन्टेन्ट प्रचुर मात्रा में था। योगी राम-रावण..धर्म-अधर्म पर बोले। लेकिन उनकी कथा में सबसे ज़्यादा प्रसंग आया मारीच और सुबाहू की जोड़ी का..और खर-दूषण की जोड़ी का। योगी ने किसी का नाम नहीं लिया। लेकिन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अंतर्यामी निकलीं। बोलीं- हम समझते नहीं क्या कि ये हमें ही बोल रहे हैं। </p>