UPI Charges: क्या बैंक ट्रांसफर पर पैसे कट रहे हैं? जानें फ्री और पेड ट्रांजैक्शन का पूरा सच
आज, 10 अगस्त 2026 को यूपीआई (UPI) चार्ज को लेकर एक बार फिर भ्रम की स्थिति बन गई, लेकिन एक बात बिल्कुल साफ है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। आम लोगों के लिए एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में यूपीआई ट्रांसफर अभी भी पूरी तरह फ्री है। एनपीसीआई (NPCI) के चीफ दिलीप असबे ने पहले ही साफ किया था, “बैंक खातों से किए जाने वाले यूपीआई पेमेंट्स पर चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ग्राहकों और व्यापारियों (मर्चेंट्स) दोनों के लिए बैंक अकाउंट से पेमेंट करना पूरी तरह फ्री रहेगा।”
तो फिर चार्ज कहां लग सकता है? दरअसल, अगर आप प्रीपेड वॉलेट के जरिए किसी मर्चेंट को ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट करते हैं, तो मर्चेंट पर 1.1% का इंटरचेंज चार्ज लगता है। ध्यान रहे, यह चार्ज मर्चेंट को देना होता है, ग्राहक को नहीं। वहीं, यूपीआई पर रुपे (RuPay) क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर एक्वायरिंग बैंक की पॉलिसी के मुताबिक एमडीआर (MDR) लगता है। कुछ मर्चेंट इस पर एक्स्ट्रा चार्ज जोड़ देते हैं या फिर इस पेमेंट ऑप्शन को बंद ही कर देते हैं। इसके अलावा, यूपीआई पर क्रेडिट लाइन (Credit line on UPI) के लिए 16 अक्टूबर 2024 से करीब 1.2% का मर्चेंट इंटरचेंज चार्ज लागू किया गया है।

UPI Charges: जानें आज भी क्या-क्या है बिल्कुल फ्री
रोजमर्रा के छोटे-मोटे खर्चों के लिए बैंक अकाउंट से किया जाने वाला यूपीआई पेमेंट मर्चेंट्स के लिए पूरी तरह जीरो-एमडीआर (Zero-MDR) बना हुआ है। सरकार की इंसेंटिव स्कीम के तहत छोटे व्यापारियों के लिए ₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर कोई एमडीआर नहीं लगता। इसका भुगतान सरकार एक्वायरिंग बैंकों और अन्य इकोसिस्टम पार्टनर्स को करती है। इसलिए, बैंक अकाउंट से छोटे पेमेंट करने वाले ग्राहकों को किसी भी तरह के एक्स्ट्रा चार्ज का सामना नहीं करना पड़ेगा।
UPI Charges: पेमेंट करने से पहले ऐप में जरूर चेक करें ये बातें
पेमेंट को ऑथराइज करने से पहले यह जरूर चेक कर लें कि पेमेंट सोर्स में आपका बैंक अकाउंट ही सिलेक्टेड हो, न कि कोई वॉलेट या क्रेडिट कार्ड। पेमेंट रिव्यू स्क्रीन पर ध्यान से देखें कि कहीं कोई ‘कन्वीनियंस फीस’ (convenience fee), ‘प्लेटफॉर्म फीस’ (platform fee) या ‘प्रोसेसिंग फीस’ (processing fee) तो नहीं जोड़ी गई है। ₹1,000 से कम के खर्चों के लिए आप यूपीआई लाइट (UPI Lite) का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी प्रति ट्रांजैक्शन लिमिट ₹1,000 है और वॉलेट में अधिकतम ₹5,000 तक रखे जा सकते हैं। अलग-अलग कैटेगरी की लिमिट का भी ध्यान रखें; सामान्य तौर पर रोजाना की स्टैंडर्ड लिमिट ₹1 लाख ही है।
UPI Charges: एक्स्ट्रा चार्ज से बचना क्यों जरूरी है? समझें FD रिटर्न के गणित से
महज एक फीसदी का एक्स्ट्रा चार्ज न देकर आप अपने बचे हुए पैसों पर मिलने वाले कंपाउंडिंग (ब्याज पर ब्याज) के फायदे को सुरक्षित रखते हैं। मान लीजिए कि आप भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6.00% से 6.75% के टर्म-डिपॉजिट दायरे के बीच, औसतन 6.5% सालाना ब्याज दर पर किसी बैंक एफडी (FD) में ₹10,000 जमा करते हैं। नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि अलग-अलग समय सीमा (tenure) में आपका यह पैसा कितना बढ़ सकता है, जो आपको रोजमर्रा के खर्चों और बचत का सही फैसला लेने में मदद करेगा।
| अवधि (Tenure) | अनुमानित FD दर | ₹10,000 पर मिलने वाला कुल फंड |
|---|---|---|
| 5 साल | 6.5% सालाना | ₹13,701 |
| 10 साल | 6.5% सालाना | ₹18,771 |
| 15 साल | 6.5% सालाना | ₹25,718 |
UPI Charges: छोटे दुकानदारों के लिए बिना किसी खर्च के काम करने का आसान तरीका
रोजमर्रा के लेन-देन के लिए केवल वॉलेट वाले क्यूआर (QR) के बजाय बैंक अकाउंट से लिंक भीम यूपीआई (BHIM UPI) क्यूआर कोड ही दुकान पर लगाएं। पेमेंट सीधे अपने बैंक खाते में सेटल करें और क्यूआर कोड के पास साफ शब्दों में लिख दें – “बैंक यूपीआई पेमेंट पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं है।” सरकारी योजना के तहत ₹2,000 से कम के मर्चेंट एमडीआर (MDR) को जीरो रखा गया है और इसका खर्च सरकार खुद उठाती है, जिससे छोटे बिलों पर आपका मुनाफा सुरक्षित रहता है।
जब तक कोई आधिकारिक सर्कुलर जारी नहीं होता, तब तक भारत में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाला यूपीआई ट्रांसफर पूरी तरह फ्री रहेगा। आज के समय में सुरक्षित और फ्री पेमेंट के लिए, छोटी खरीदारी के वक्त हमेशा बैंक अकाउंट से लिंक यूपीआई ही चुनें, पेमेंट स्क्रीन पर चार्ज वाली लाइन को ध्यान से पढ़ें और फटाफट पेमेंट के लिए यूपीआई लाइट (UPI Lite) का इस्तेमाल करें। अगर स्क्रीन पर कोई चार्ज दिखाई दे, तो तुरंत ‘पे’ (Pay) बटन दबाने से पहले अपना पेमेंट सोर्स बदल लें।