भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच डिफेंस, एनर्जी और जरूरी मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग पर बातचीत हुई है। खासतौर से भारत के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए यूरेनियम सप्लाई एग्रीमेंट को आगे बढ़ाने पर भारत की नजर है।

ऑस्ट्रेलिया और भारत ने ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौते (2015) के तहत पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा उपायों के दायरे में समझौता किया है। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम के निर्यात को संभव बनाने के लिए जरूरी प्रशासनिक इंतजामों को अंतिम रूप दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत की सदस्यता के लिए अपना मजबूत समर्थन भी दोहराया है।
हमने 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य तय किया है। ऑस्ट्रेलिया के विशाल यूरेनियम भंडार भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा के लिए बेहद अहम हैं। भारत के पोर्ट, एयरपोर्ट, सड़कों, रेलवे और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलिया के निवेशकों के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी
ऑस्ट्रेलिया का यूरेनियम भंडार
भारत का ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम समझौता अहम है। भारत को बिजली उत्पादन, मेडिकल और दूसरे क्षेत्रों में शांतिपूर्ण कामों के लिए यूरेनियम की जरूरत है। इसके लिए अब उसे ऑस्ट्रेलिया से भरोसा मिला है, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम भंडार माना जाता है।
ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा और विशाल ज्ञात यूरेनियम भंडार साउथ ओलंपिक डैम खदान में स्थित है। ऑस्ट्रेलिया अपने यूरेनियम का सख्त अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समझौतों के तहत दूसरे देशों को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए निर्यात करता है। भारत के साथ हुए समझौते में भी शांतिपूर्ण उद्देश्यों की बात है।
ऑस्ट्रेलिया के लिए भी मौका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया के पास भारत के न्यूक्लियर एनर्जी बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए यूरेनियम सप्लाई करने का ऐतिहासिक मौका है। दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश (भारत) में बिजली की खत्म होने वाली मांग को देखते हुए मोदी सरकार ने न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन को काफी बढ़ाने की योजना बनाई है।
ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के यूरेनियम भंडार का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन कानूनी अड़चनों और राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण भारत को इसका एक्सपोर्ट करने में रुकावटें आई हैं। हालांकि पीएम मोदी के इस दौरे पर समझौता हो गया है। इसके बारे में पीएम मोदी ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया का विशाल यूरेनियम भंडार भारत की न्यूक्लियर यात्रा से सीधे जुड़ा हुआ है।
भारत की दूसरी यूरेनियम डील
ऑस्ट्रेलिया में समझौता इस साल भारत की दूसरी यूरेनियम डील है। इसी साल भारत और कनाडा ने यूरेनियम समझौते की घोषणा की थी। कनाडा की यूरेनियम उत्पादक कंपनी ‘कैमेको’अगले दशक में भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) को लगभग 22 मिलियन पाउंड U₃O₈ अयस्क की आपूर्ति करेगी।
