Us:’भारत एक बेहतरीन साझेदार’, मार्को रुबियो बोले- ईरान वार्ता में अच्छे संकेत लेकिन दूसरे विकल्प भी तैयार – Marco Rubio Says Iran Talks Show Positive Signs But Other Options Are Also Ready India Is An Excellent Partner


अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में कुछ अच्छे संकेत जरूर दिख रहे हैं, लेकिन अगर बात नहीं बनी तो अमेरिका के पास ‘दूसरे विकल्प’ (सैन्य कार्रवाई) भी पूरी तरह से खुले हैं। इसके साथ ही, भारत के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर निकलने से ठीक पहले रुबियो ने भारत को एक ‘महान साझेदार’ बताया और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सहयोग की बात कही। 

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल लगाने की योजना पर अमेरिका ने क्या चेतावनी दी है?

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल (टैक्स) लगाने की योजना बनाई है, जिस पर अमेरिका ने कड़ी आपत्ति जताई है। रुबियो ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान की यह टोल योजना किसी भी शांति समझौते को ‘असंभव’ बना देगी। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई भी देश इस तरह के टोल सिस्टम के पक्ष में नहीं है और यह बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता है। अगर ईरान इस अहम जलमार्ग पर अपनी पकड़ का फायदा उठाकर पैसा कमाने की कोशिश करता है, तो कूटनीतिक समझौते की उम्मीदें टूट जाएंगी।

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क्यूबा के साथ अमेरिका के मौजूदा संबंध और सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं पर रुबियो ने क्या कहा?

ईरान के अलावा, क्यूबा के मुद्दे पर भी अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है। रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन क्यूबा सरकार के साथ अपने मतभेदों को कूटनीतिक तरीके से सुलझाना चाहता है, लेकिन वे इसे लेकर ज्यादा आशान्वित नहीं हैं। उन्होंने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर आतंकवाद के आरोपों के बाद सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि यद्यपि अमेरिका की प्राथमिकता हमेशा एक शांतिपूर्ण समझौता होती है, लेकिन क्यूबा के मौजूदा नेतृत्व को देखते हुए इसकी संभावना बहुत कम नजर आती है।

भारत दौरे को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री ने क्या बड़ी घोषणा की है?

अपने भारत दौरे (23-26 मई) के बारे में बात करते हुए रुबियो ने भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने भारत को एक ‘महान सहयोगी और बेहतरीन साझेदार’ बताया। ऊर्जा के मुद्दे पर उन्होंने एक बड़ी बात कही कि भारत जितना भी तेल और ऊर्जा खरीदना चाहेगा, अमेरिका उसे उतनी मात्रा में बेचने के लिए तैयार है। अमेरिका इस समय ऐतिहासिक स्तर पर ऊर्जा का उत्पादन और निर्यात कर रहा है। रुबियो ने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत में तेल की कीमतें बढ़ी हैं, ऐसे में अमेरिका भारत के ऊर्जा पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा बनना चाहता है। वेनेजुएला के तेल के जरिए भी दोनों देशों के बीच व्यापार के बड़े मौके हैं।

भारत दौरे पर ‘क्वाड’ बैठक का क्या महत्व है और किन शहरों का दौरा करेंगे रुबियो?

मार्को रुबियो की यह यात्रा इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि वे नई दिल्ली में 26 मई को ‘क्वाड’ (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में हिस्सा लेंगे। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु भी शामिल होंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान रुबियो कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली जाएंगे। खास बात यह है कि करीब 14 साल बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री कोलकाता का दौरा कर रहा है; इससे पहले 2012 में हिलेरी क्लिंटन वहां गई थीं। कोलकाता में अमेरिका का दुनिया का दूसरा सबसे पुराना वाणिज्य दूतावास स्थित है।


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