US Bond Yield 19 साल के हाई पर! Indian Market, रुपये और FPI पर क्या होगा असर? | US Bond Yield Hits 19-Year High! What Will Be the Impact on Indian Market, Rupee & FPI?


US Bond Yield 19 साल के हाई पर! Indian Market, रुपये और FPI पर क्या होगा असर?

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी ने ग्लोबल निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5 फीसदी के ऊपर पहुंच गई है, जो लंबे समय के ऊंचे स्तरों में शामिल है। इसके पीछे मजबूत आर्थिक आंकड़े, महंगाई की चिंता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को अहम वजह माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी रहती है, तो इसका भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ेगा?

US Bond Yield

सबसे पहले समझते हैं कि बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब क्या है। जब बॉन्ड की कीमत गिरती है, तो उसकी यील्ड बढ़ती है। अमेरिकी ट्रेजरी को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षित निवेश विकल्पों में माना जाता है। ऐसे में जब वहां यील्ड बढ़ती है, तो दुनियाभर के निवेशकों के लिए डॉलर में निवेश का आकर्षण बढ़ सकता है। इसका असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी पड़ सकता है।

विदेशी निवेश US की ओर जा सकते हैं-

अमेरिकी यील्ड बढ़ने का सबसे सीधा असर विदेशी निवेश पर देखने को मिल सकता है। अगर अमेरिकी सरकारी बॉन्ड से अपेक्षाकृत ज्यादा रिटर्न मिलने लगे, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों में जोखिम लेने के बजाय अमेरिकी संपत्तियों की तरफ पैसा मोड़ सकते हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी एफपीआई की खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

रुपये पर दबाव बढ़ सकता है-

इसका दूसरा असर रुपये पर पड़ सकता है। अमेरिकी यील्ड बढ़ने और डॉलर मजबूत होने की स्थिति में रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। हाल में भी रुपये में कमजोरी देखने को मिली है और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें इस दबाव को और बढ़ा सकती हैं। महंगा डॉलर भारत के लिए कच्चे तेल जैसे आयातित सामान की लागत बढ़ा सकता है।

भारतीय बॉन्ड बाजार पर असर-

तीसरा असर भारतीय बॉन्ड बाजार पर पड़ सकता है। अमेरिकी और भारतीय बॉन्ड यील्ड के बीच अंतर निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होता है। अगर अमेरिकी यील्ड तेजी से बढ़ती है, तो भारतीय बॉन्ड में भी यील्ड पर ऊपर की तरफ दबाव आ सकता है। हालांकि, हाल के दिनों में भारतीय 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 7 फीसदी के आसपास बनी हुई है। 23 सितंबर को यह करीब 7.01 फीसदी पर थी।

कच्चा तेल भी भारतीय बाजार के लिए अहम-

चौथा असर शेयरों के वैल्यूएशन पर पड़ सकता है। ऊंची बॉन्ड यील्ड का मतलब बाजार में ब्याज दरों और पूंजी की लागत को लेकर ज्यादा दबाव होता है। इससे खासतौर पर ऐसे शेयर प्रभावित हो सकते हैं जिनकी वैल्यू भविष्य की कमाई की उम्मीदों पर ज्यादा निर्भर करती है। इसके अलावा कच्चा तेल भी भारतीय बाजार के लिए अहम कड़ी है। तेल की कीमतों में तेजी से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और महंगाई की चिंता बढ़ सकती है।

RBI पर भी नजर रहेगी-

अब नजर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर भी रहेगी। अमेरिकी यील्ड, रुपये और कच्चे तेल की चाल अगर लंबे समय तक दबाव में रहती है, तो भारत में ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें भी बदल सकती हैं। यानी भारतीय बाजार के लिए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अकेले कोई संकेतक नहीं है। इसके साथ डॉलर, कच्चा तेल, एफपीआई फ्लो, भारतीय बॉन्ड यील्ड और आरबीआई की नीति को भी देखना जरूरी होगा।

[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से ‘We’ कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]



Leave a Comment