Us-iran Negotiations:ईरान परमाणु समझौते पर बड़ा फैसला लेने की तैयारी में ट्रंप, व्हाइट हाउस में हुई अहम बैठक – Trump Prepares To Make Major Decision On Iran Nuclear Deal Key Meeting Held At White House


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और युद्धविराम समझौते को लेकर बड़ा संकेत दिया है। ट्रंप ने कहा कि वह व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपने वरिष्ठ सलाहकारों के साथ बैठक कर रहे हैं, जहां ईरान के साथ आगे बढ़ने वाले समझौते पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए 60 दिनों तक युद्धविराम बढ़ाने की चर्चा चल रही है। इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर टिकी हुई है।

आखिर ट्रंप किस समझौते पर अंतिम फैसला लेने वाले हैं?

राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह ईरान के साथ संभावित समझौते पर “फाइनल डिटरमिनेशन” करने जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी सहमति बनी है, जिसके तहत मौजूदा युद्धविराम को 60 दिनों तक आगे बढ़ाया जा सकता है। इस दौरान दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई बातचीत होगी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस बातचीत का मुख्य मुद्दा ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार और परमाणु गतिविधियां होंगी।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा कि ईरान में मौजूद अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को अमेरिका, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और खुद ईरान के सहयोग से बाहर निकालेगा और नष्ट करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास इस समय 60 प्रतिशत तक समृद्ध 440.9 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्तर हथियार बनाने लायक 90 प्रतिशत शुद्धता से बहुत ज्यादा दूर नहीं है। यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार चिंता जता रहे हैं।

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बातचीत में अभी कौन-कौन से मुद्दों पर विवाद बाकी है?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वार्ता में अभी कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बननी बाकी है। उन्होंने बताया कि बातचीत में भाषा से जुड़े कुछ बिंदुओं के अलावा अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार और यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर चर्चा जारी है। वेंस ने कहा कि अमेरिका ऐसी स्थिति में पहुंच चुका है, जहां वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लंबे समय के लिए पीछे धकेल सकता है। उनके मुताबिक यह अमेरिका और उसके लोगों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी कदम है।

60 दिन का युद्धविराम क्यों माना जा रहा है अहम?

जानकारी के अनुसार, पिछले तीन महीनों से जारी तनाव और संघर्ष के बीच यह युद्धविराम काफी नाजुक माना जा रहा है। अमेरिका चाहता है कि बातचीत के दौरान हालात और खराब न हों। इसी वजह से युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अगर इस दौरान बातचीत सफल रहती है तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बड़ा समझौता संभव हो सकता है। हालांकि अभी दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस फैसले को लेकर क्यों बढ़ी हलचल?

ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका और पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है। अब ट्रंप प्रशासन की यह नई पहल पूरी दुनिया के लिए अहम मानी जा रही है। अगर यह समझौता सफल होता है तो पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है। वहीं समझौता विफल होने की स्थिति में क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा।


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