राष्ट्रपति ट्रम्प के बेहद करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम 11 जुलाई को यूक्रेन दौरे से अमेरिका लौटे, ट्रम्प से फोन पर बात की और सोने चले गए। कुछ घंटे बाद तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। ग्राहम ईरान और रूस के धुर विरोधी माने जाते थे। भारत को भी निशाने पर रखा और
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ग्राहम की मौत पर एक तरफ ईरानी मीडिया जश्न मना रही है, दूसरी तरफ सवाल उठ रहे हैं कि कहीं जहर देकर तो नहीं मारा गया। मौत बीमारी से हुई या कोई बड़ी साजिश; इस कंट्रोवर्सी को डिकोड करेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: लिंडसे ग्राहम की मौत की वजह क्या है?
जवाबः 71 साल के लिंडसे ग्राहम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेहद करीबियों में से एक थे। साउथ कैरोलिना सीट से ऊपरी सदन ‘सीनेट’ के सदस्य भी थे। 10 जुलाई से वे यूक्रेन दौरे पर थे। 11 जुलाई को अमेरिका लौटे।
यूक्रेन जाने से पहले ग्राहम स्वस्थ दिख रहे थे, लेकिन 12 जुलाई की रात ही उनकी मौत हो गई। उनके ऑफिस ने बताया कि मौत बीमारी की वजह से हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक दिल की धमनी फटने से ग्राहम की मौत हो गई।
फिलहाल ग्राहम का डेथ सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ है, क्योंकि जहर से जुड़ी टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट नहीं आई है। इसके बाद ही तय होगा कि मौत सामान्य थी या किसी साजिश के तहत हुई।
ट्रम्प ने कहा कि मौत से कुछ घंटे पहले उनकी ग्राहम से बात हुई थी। ग्राहम की आवाज ठीक लग रही थी। हालांकि वह थोड़े थके हुए लग रहे थे।
ग्राहम की मौत को लेकर अमेरिकी अखबारों और न्यूज आउटलेट्स में खबरें चल रही हैं कि इसके पीछे कहीं न कहीं रूस का हाथ है।
अमेरिकी दक्षिणपंथी पत्रकार लौरा लूमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, ‘ईरान की IRGC ने उन्हें मारने की धमकी दी थी। खामेनेई के अंतिम संस्कार में धमकी भरे पोस्टर लहराए जा रहे थे। रूस भी ईरान को परमाणु हथियार देने की बात कर रहा था। अब यूक्रेन से लौटने के बाद ग्राहम की मौत होना महज एक संयोग नहीं।’

सवाल 2: ग्राहम की मौत में रूस का नाम क्यों आ रहा है?
जवाबः ग्राहम की छवि रूस और ईरान के कट्टर विरोधी नेता की थी। 11 जुलाई को 10वें यूक्रेन दौरे से लौटने के कुछ ही घंटों बाद उनकी मौत हो गई, जबकि जाते वक्त वे स्वास्थ्य थे।
रूसी सोशियोलॉजिस्ट इगोर ईदमन ने कहा है कि ग्राहम की मौत में रूसी खुफिया एजेंसियों का हाथ हो सकता है। उन्होंने 10 जुलाई को कीव में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि राष्ट्रपति ट्रम्प को रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए मना लिया है।

लिंडसे ग्राहम ने कीव में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। रूस के साथ जंग शुरू होने के बाद से यह ग्राहम की 10वीं यूक्रेन यात्रा है।
ग्राहम अमेरिका से प्लेन से पोलैंड पहुंचे। फिर 10-12 घंटे ट्रेन का सफर करके यूक्रेन की राजधानी कीव गए। इसी रास्ते से लौटे भी। ईदमन के मुताबिक, इसी दौरान किसी खुफिया रूसी एजेंट को जहर देने का मौका मिल गया होगा।
पूर्व CIA अधिकारी माइकल सेलर्स के मुताबिक, ‘ग्राहम की हत्या के अभी कोई सबूत नहीं हैं। लेकिन जिन हालातों में उनकी मौत हुई है, उस हिसाब से रूस के एंगल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जांच करनी चाहिए।’ अब जानिए 3 बड़े मौके जब लिंडसे ग्राहम ने रूस का विरोध किया-
- रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने पर, 2022: ग्राहम ने लाइव टीवी पर कहा कि जंग रोकने का एक ही तरीका है- रूस में कोई पुतिन को रास्ते से हटा दे। वो पुतिन को मॉडर्न हिटलर भी कहते थे।
- यूक्रेन यात्रा के दौरान, 2023: रूस ने ग्राहम का एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें वे कह रहे थे, ‘रूसी लोग मर रहे हैं। यह हमारे द्वारा सबसे सही जगह खर्च किया पैसा है।’ ग्राहम यूक्रेन को दिए जा रही मदद के बारे में बता रहे थे। इसके बाद रूस ने ग्राहम को वॉन्टेड लिस्ट में डाल दिया था।
- रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून पेश, 2025: ग्राहम ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने वाला कानून अमेरिकी सीनेट में पेश किया। उन्होंने कहा कि रूस तेल की कमाई यूक्रेन जंग में खर्च कर रहा है। यह ‘ब्लड मनी’ है।
सवाल-3: ग्राहम भारत को लेकर क्या सोचते थे?
जवाबः ग्राहम भारत विरोधी माने जाते थे। उन्होंने कई मौकों पर भारत को निशाने पर लिया…
- 2009 में ग्राहम ने अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स में आर्टिकल लिखा कि भारत और चीन जैसे देशों पर बॉर्डर टैक्स लगना चाहिए, क्योंकि उनकी फैक्ट्रियां ज्यादा प्रदूषण फैलाती हैं। इस टैक्स की कमाई अमेरिका के घरेलू व्यापारियों के काम आएगी।
- 2019 में जब भारत ने अनुच्छेद-370 हटाया था, तब ग्राहम ने कुछ सांसदों के साथ राष्ट्रपति ट्रम्प को एक चिट्ठी लिखी थी और भारत के अंदरूनी मामले में दखल देने की मांग की थी।
- जुलाई 2025 में ग्राहम ने चेतावनी दी थी, ‘मैं चीन, भारत और ब्राजील से कहूंगा कि अगर आपने रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा, तो हम आपको तबाह कर देंगे। आपकी अर्थव्यवस्था को कुचल देंगे। आप जो कर रहे हैं वो खून का पैसा है।’
ग्राहम ने कहा था कि भारत को रूस या अमेरिका में से किसी एक को चुनना होगा। मुझे विश्वास है कि वो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चुनेंगे।
इसके बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूसी तेल खरीदने के चलते भारत पर 25% पेनल्टी टैरिफ लगाया था। इससे भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया था।
अगस्त 2025 में ग्राहम ने फिर दावा किया कि भारत ने टैरिफ के दबाव के चलते रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। भारत पर दबाव होने से पुतिन जंग में समझौते के लिए तैयार हो गए हैं।
सवाल-4: आखिर ग्राहम की मौत पर ईरान में जश्न क्यों मनाया जा रहा?
जवाबः लिंडसे ग्राहम की मौत को ईरानी मीडिया ने सबसे बड़े दुश्मन की मौत बताया। मेहर न्यूज एजेंसी ने लिखा- ‘ग्राहम ईरान को तबाह करने का अपना सपना कब्र तक ले गए।’ सरकारी न्यूज चैनल IRINN ने तो ग्राहम की मौत पर ईरानी जनता को बधाई तक दे दी।
अमेरिकी लेखक रब्बी शमूएल ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘5 दिन पहले ईरान ने ग्राहम को मारने की धमकी दी थी। अब उनकी मृत्यु हो गई, वो भी यूक्रेन से लौटने के अगले ही दिन।’
दरअसल, ग्राहम का रूख हमेशा ईरान विरोधी और इजराइल समर्थक रहा। 2015 में उन्होंने राष्ट्रपति बराक ओबामा को सलाह दी कि ईरान पर मिलिट्री एक्शन लें।
14 फरवरी को उन्होंने एक रैली में ईरान का पुराना झंडा लहराते हुए कहा था, ‘अब अयातुल्लाह के जाने का समय आ गया है।’ ट्रम्प को ईरानी सत्ता उखाड़ने की सलाह तक दी।

जर्मनी में 62वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान ईरान में मानवाधिकारों के लिए प्रदर्शन हुआ। इस दौरान ग्राहम ने लोगों का संबोधित करते हुए ईरान का पुराना झंडा लहराया, जिसमें बीच में एक शेर बना होता था।
सवाल-5: तो क्या ग्राहम की मौत ट्रम्प के लिए बड़ा झटका है?
जवाबः ग्राहम ट्रम्प के बेहद करीबी सलाहकारों में से एक थे, खासकर विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर। उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘वो हमेशा काम करते रहते थे। वो सच्चे अमेरिकी राष्ट्रभक्त थे। उन्हें बहुत याद किया जाएगा। उनकी अचानक मौत मौजूदा हालातों में कई चुनौतियां पैदा करती है।’
ग्राहम का अचानक निधन ट्रम्प के लिए 3 वजहों से बड़ा झटका है…
- नवंबर 2026 में अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन होने हैं। इसमें ग्राहमी 5वीं बार साउथ कैरोलिना सीट से चुनाव लड़ने वाले थे। अब ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को 11 अगस्त से पहले नया उम्मीदवार चुनना होगा।
- ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में बताया कि ग्राहम कोई भी चीज अप्रूव करवा सकते थे। वे डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों से बात करके भी ममला सुलझा लेते थे। यानी ट्रम्प ने उनके लिए लामबंदी करने वाला एक नेता खो दिया।
- 100 सीटों वाली अमेरिकी सीनेट में अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 और डेमोक्रेटिक के पास 47 सीटें थीं। ग्राहम की मौत से एक सीट कम हो गई। वहीं एक अन्य सीनेटर मिच मैककोनेल अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में अहम कानूनों के पास होनें में दिक्कत हो सकती है।

ग्राहमी ट्रम्प के इनर सर्कल का हिस्सा थे। दोनों अक्सर साथ में गोल्फ खेला करते थे।
इसके अलावा ग्राहम के निधन से यूक्रेन-इजराइल पर भी असर पड़ेगा। यूक्रेन के थिंकटैंक यूक्रेनी प्रिज्म में राजनीतिक विश्लेषक ओलेक्सांद्र क्रायेव के मुताबिक, ग्राहम की मौत से यूक्रेन ने ट्रम्प तक पहुंच रखने वाला एक जरूरी समर्थक खोया है।
वहीं इजराइल के पीएम नेतन्याहू ने उन्हें अपना महान दोस्त बताया है। ग्राहम इजराइल और खाड़ी देशों में दोस्ती बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।
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