Wayanad Landslide Tragedy Video Update; Tunnel Project


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वायनाड3 मिनट पहले

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वायनाड में हादसा सीसीटीवी में कैद हुआ, इसमें दिख रहा है कि 7 जुलाई को सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर तेज लहर टैंकर को अपने साथ ले गई। - Dainik Bhaskar

वायनाड में हादसा सीसीटीवी में कैद हुआ, इसमें दिख रहा है कि 7 जुलाई को सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर तेज लहर टैंकर को अपने साथ ले गई।

केरलम के वायनाड में मंगलवार को लैंडस्लाइड में 4 लोगों की मौत हो गई। 9 से ज्यादा लापता हैं। कल्लाडी स्थित मीनाक्षी ब्रिज के पास मलप्पुरम-वायनाड टनल के सामने यह घटना हुई। यहां कंस्ट्रक्शन चल रहा था और टनल के सामने सैकड़ों टन मिट्टी जमा थी।

इस हादसे का VIDEO सामने आया है। इसमें दिख रहा है कि तेज बारिश के चलते लैंड स्लाइड हुई और अचानक पूरा मलबा तेजी से बहने लगा। लोग मलबे से बचकर भागते दिखे। दर्जनों चपेट में आ गए। गाड़ियां बह गईं।

घटनास्थल पर एक टैंकर खड़ा था, जो मलबे के साथ तिनके की तरह करीब 200 फुट तक बहता हुआ आया। टैंकर वहां मौजूद महिला और पुरुष से चंद फीट दूर रुका। जिससे उनकी जान बच गई।

हादसे के बाद कई लोग मलबे में दब गए हैं। इनको बचाने का काम चल रहा है, JCB मशीनें लगाई गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, लगातार बारिश के कारण सोमवार से ही सुरंग कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया गया था।

देखें हादसे का पूरा CCTV फुटेज

टनल की लंबाई 8 किमी, 2200 करोड़ का प्रोजेक्ट

मलप्पुरम-वायनाड टनल प्रोजेक्ट के तहत मलप्पुरम को वायनाड से सुरंग (टनल) के जरिए जोड़ना है। टनल की लंबाई करीब लगभग 8.17 किमी है। इसकी लागत करीब ₹2,100–2,200 करोड़ है। दो साल पहले भी वायनाड में एक के बाद एक तीन भूस्खलन हुए थे, जिसमें 400 से ज्यादा जानें चली गई थीं।

4 तस्वीरों में वायनाड लैंड स्लाइड

लैंड स्लाइड के बाद टनल का मलबा तेजी से बहने लग गया।

लैंड स्लाइड के बाद टनल का मलबा तेजी से बहने लग गया।

मलबे से बचने के लिए लोग तेजी से इधर-उधर भागने लगे।

मलबे से बचने के लिए लोग तेजी से इधर-उधर भागने लगे।

मलबे के बहाव से एक व्यक्ति दूर तक बह गया, जबकि टैंकर कुछ फीट दूर रुकने से महिला पुरुष की जान बच गई।

मलबे के बहाव से एक व्यक्ति दूर तक बह गया, जबकि टैंकर कुछ फीट दूर रुकने से महिला पुरुष की जान बच गई।

पुरुष ने टैंकर रुकते ही महिला को खींचकर निकाला और घटनास्थल से ले गया।

पुरुष ने टैंकर रुकते ही महिला को खींचकर निकाला और घटनास्थल से ले गया।

लैंडस्लाइड के बाद रेस्क्यू मिशन

लैंडस्लाइड के बाद मलबे में दबे शख्स को रेस्क्यू कर निकाला गया।

लैंडस्लाइड के बाद मलबे में दबे शख्स को रेस्क्यू कर निकाला गया।

घटनास्थल से मलबा हटाने के लिए कई जेसीबी लगाई गई हैं।

घटनास्थल से मलबा हटाने के लिए कई जेसीबी लगाई गई हैं।

स्थानीय लोगों ने मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

स्थानीय लोगों ने मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

वायनाड हादसा कैसे हुआ, ग्राफिक्स से समझें

वायनाड में लैंडस्लाइड की क्या वजह है

  • वायनाड, केरलम के नॉर्थ-ईस्ट में है। यह केरलम का एकमात्र पठारी इलाका है। यानी मिट्टी, पत्थर और उसके ऊपर उगे पेड़-पौधों के ऊंचे-नीचे टीलों वाला इलाका। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, केरलम का 43% इलाका लैंडस्लाइड प्रभावित है। वायनाड की 51% जमीन पर पहाड़ी ढलाने हैं। यानी लैंडस्लाइड की संभावना बनी रहती है।
  • वायनाड का पठार वेस्टर्न घाट में 700 से 2100 मीटर की ऊंचाई पर है। मानसून की अरब सागर वाली ब्रांच वेस्टर्न घाट से टकराकर ऊपर उठती है, मानसून सीजन में बहुत ज्यादा बारिश होती है। वायनाड में काबिनी नदी है। इसकी सहायक नदी मनंतावडी ‘थोंडारमुडी’ चोटी से निकलती है। लैंडस्लाइड के कारण इसी नदी में बाढ़ आने से भारी नुकसान हुआ है।

वायनाड में 2024 में सबसे बड़ा हादसा, 400 से ज्यादा की मौत

वायनाड में 2 साल पहले सबसे बड़ा लैंडस्लाइड हादसा हुआ था। 30 जुलाई 2024 रात करीब 2 बजे से 4 बजे के बीच मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों में लैंडस्लाइड हुईं। इस हादसे में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2019 में भी भारी बारिश के कारण इन्हीं इलाकों में लैंडस्लाइड हो चुकी हैं। उस हादसे में 17 लोगों की मौत हुई थी।

भारत का करीब 12.6% हिस्सा लैंडस्लाइड डेंजर जोन में आता है

भारत के करीब 12.6% भूभाग (लगभग 4.2 लाख वर्ग किमी) को लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्र माना जाता है। हिमालय और पश्चिमी घाट देश के सबसे संवेदनशील लैंडस्लाइड क्षेत्र हैं।

भारत में जून से सितंबर (मानसून) के दौरान सबसे ज्यादा भूस्खलन होते हैं। 80% से ज्यादा लैंडस्लाइड भारी बारिश के कारण होते हैं। सड़क, सुरंग, बांध, खनन और जंगलों की कटाई जैसी मानवीय गतिविधियां भी भूस्खलन का खतरा बढ़ाती हैं।

केरलम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दार्जिलिंग सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। भारत में हर साल सैकड़ों लोगों की मौत भूस्खलन की घटनाओं में होती है।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) देशभर में लैंडस्लाइड सस्प्टिबिलिटी मैप तैयार करता है, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते चेतावनी दी जा सके।

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