05:04 PM, 03-Jun-2026
टीएमसी सरकार ने हर विभाग में भ्रष्टाचार किया: अग्निमित्रा पॉल
पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी विवाद और टूट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पहले से पता था कि ऐतिहासिक जनादेश के बाद तृणमूल कांग्रेस का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। लेकिन यह उससे पहले ही बिखर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने सरकार के हर विभाग में भ्रष्टाचार किया और बंगाल के लोगों की मेहनत की कमाई को लूटा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी पूरी तरह खराब कर दिया गया था।
02:42 PM, 03-Jun-2026
अभिषेक बनर्जी को लेकर है नाराजगी
बागी विधायक अरुणाभ सेन ने कहा, ‘मैं आज भी ममता बनर्जी को अपना नेता मानता हूं, लेकिन अभिषेक बनर्जी को कभी नेता नहीं माना और न ही मानूंगा।’ बागी विधायकों ने पत्र में ममता बनर्जी को ही पार्टी की नेता और सभानेत्री बताया है, जिससे संकेत मिला है कि उनका विरोध सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर है।
02:02 PM, 03-Jun-2026
बगावत के बीच टीएमसी का बड़ा एक्शन, बंगाल में पार्टी की सभी समितियां बर्खास्त
तृणमूल कांग्रेस में बगावत की खबरों के बीच पार्टी नेतृत्व में बड़ी कार्रवाई करते हुए बंगाल में पार्टी की सभी समितियों को भंग कर दिया है। साथ ही पार्टी ने संगठन की भी समितियों को भंग कर दिया है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में अपने इस फैसले की जानकारी दी।
01:18 PM, 03-Jun-2026
दल-बदल कानून से बच सकते हैं बागी विधायक
दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी भी अलग गुट को अयोग्यता से बचने के लिए विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है। टीएमसी के पास विधानसभा में 80 विधायक हैं, ऐसे में यह आंकड़ा 54 का होता है। यदि बागी गुट का 58 विधायकों के समर्थन का दावा सही साबित होता है, तो वह आवश्यक संख्या से अधिक समर्थन जुटाकर खुद को वैध टीएमसी विधायक दल के रूप में मान्यता दिलाने की मजबूत स्थिति में होगा। हालांकि विपक्ष के नेता पद पर दावा करने के लिए केवल 30 विधायकों का समर्थन पर्याप्त है, लेकिन मौजूदा संघर्ष केवल इस पद तक सीमित नहीं दिखता। असली लड़ाई विधायक दल के नियंत्रण और चुनाव चिन्ह पर अधिकार को लेकर मानी जा रही है।
01:01 PM, 03-Jun-2026
ममता खेमे के विधायकों ने बैठक से बनाई दूरी
विधानसभा पहुंचने वाले विधायकों में अरूप रॉय, शिउली साहा, अखरुज्जमान, संदीपन साहा, सबीना यास्मीन, चंद्रनाथ सिन्हा, जावेद खान, समर मुखर्जी और प्रसून बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। गौरतलब है कि बैठक में शामिल हुए किसी भी विधायक ने मंगलवार को कोलकाता के मध्य क्षेत्र में आयोजित पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के धरना कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था। वहीं, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, नयना बंद्योपाध्याय, मदन मित्रा और कुणाल घोष जैसे नेता, जिन्हें पार्टी नेतृत्व के करीबी माना जाता है, विधानसभा में आयोजित इस बैठक से दूर रहे।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी रहे। उनके विधानसभा पहुंचने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई कि उन्हें पार्टी के लगभग दो-तिहाई विधायकों का समर्थन हासिल है और वे मौजूदा नेतृत्व को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। बागी खेमे के सूत्रों का दावा है कि ऋतब्रत बनर्जी के पास 58 विधायकों के समर्थन पत्र हैं और वे टीएमसी विधायक दल के नेता तथा विपक्ष के नेता दोनों पदों पर मान्यता की मांग कर सकते हैं।
12:41 PM, 03-Jun-2026
विधानसभा स्पीकर से मिले बागी नेता
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा स्पीकर रतिंद्र बोस को 58 विधायकों के समर्थन वाला पत्र सौंपा है।
12:15 PM, 03-Jun-2026
सीएम शुभेंदु बोले- जालसाजी करने वाले किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा
इस राजनीतिक विवाद के बीच सीएम शुभेंदु अधिकारी ने भी टीएमसी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कथित फर्जी हस्ताक्षर और आंतरिक पत्राचार विवाद को लेकर कहा कि मामले में कानून अपना काम करेगा और हस्ताक्षर जालसाजी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
शुभेंदु अधिकारी ने घटनाक्रम का विवरण देते हुए बताया कि 9 मई को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद 20 मई को 70 हस्ताक्षरों वाला एक और पत्र भेजा गया। हालांकि, विवाद तब बढ़ गया जब टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने औपचारिक शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि विधायक दल की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव पारित ही नहीं किया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद हेयर स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज की गई और मामले की जांच बाद में सीआईडी को सौंप दी गई। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि सीआईडी ने पत्र में शामिल विधायकों के हस्ताक्षर नमूने जुटाने शुरू कर दिए हैं। उनके अनुसार, टीएमसी के तीन विधायक बहारुल इस्लाम, अरूप रॉय और सुभाशीष दास ने सीआईडी के सामने स्वीकार किया है कि उन्होंने संबंधित दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।
12:12 PM, 03-Jun-2026
क्या बोले बागी विधायक
बुधवार को कथित बागी गुट के कई नेताओं ने दावा किया कि उन्हें टीएमसी के 80 में से अधिकतर विधायकों का समर्थन हासिल है। बागी नेताओं ने विधानसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) के रूप में शोभनदेब चट्टोपाध्याय की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। इस मुद्दे पर टीएमसी विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने पत्रकारों से कहा, ‘हमें सटीक संख्या नहीं पता, लेकिन बाहर से सुनने में आ रहा है कि 59 हस्ताक्षर प्राप्त हो चुके हैं। मैंने भी हस्ताक्षर किए हैं।’ वहीं, टीएमसी विधायक प्रिया पॉल ने इस मामले पर फिलहाल खुलकर कुछ कहने से बचते हुए कहा, ‘मैं विधानसभा के अंदर जा रही हूं। बैठक के बाद इस बारे में बताऊंगी।’
11:58 AM, 03-Jun-2026
एक फर्जी हस्ताक्षर कांड से शुरू हुई टीएमसी में बगावत
यह पूरा विवाद उस पत्र को लेकर शुरू हुआ, जिसे टीएमसी ने विधानसभा सचिवालय को सौंपा था। इस पत्र में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने के समर्थन में करीब 70 विधायकों के हस्ताक्षर थे। हालांकि पार्टी के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि समर्थन पत्र में उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। इनके अलावा कई और विधायकों के हस्ताक्षर भी संदिग्ध पाए गए। इसके बाद पार्टी ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया।
विधानसभा सचिवालय की शिकायत में कहा गया कि टीएमसी नेता नैना बनर्जी के हस्ताक्षर सबसे ज्यादा संदिग्ध पाए गए। शपथ लेने के समय किए गए उनके हस्ताक्षर और समर्थन पत्र में मौजूद हस्ताक्षर अलग बताए गए। इसके बाद सीआईडी ने जांच शुरू की और कई विधायकों से पूछताछ की। इनमें नैना बनर्जी, चंद्रनाथ सिन्हा, कुनाल घोष और बहरुल इस्लाम जैसे नेता शामिल हैं।
11:40 AM, 03-Jun-2026
ममता बनर्जी की बैठकों से दूरी बनाए हुए थे कई विधायक
हालिया बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि अब इनमें से तीन चौथाई विधायक यानी 59 टूट सकते हैं। कई विधायकों ने टीएमसी की बैठकों से भी दूरी बनाई हुई थी। साथ ही पूर्व सीएम और पार्टी की मुखिया ममता बनर्जी द्वारा किए जा रहे धरना प्रदर्शनों से भी कई विधायक नदारद थे। इसके बाद से ही पार्टी में टूट की खबरें आनी शुरू हो गईं थी। हालांकि टीएमसी ने टूट की खबरों को खारिज किया था।