Agra News: आगरा के स्वास्थ्य विभाग में फर्जी नियुक्ति पत्र के सहारे करीब 10 वर्षों तक सरकारी नौकरी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे हासिल की सरकारी नौकरी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इटावा जिले के सैफई निवासी नवीन यादव ने वर्ष 2016 में फर्जी नियुक्ति पत्र और अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार कर स्वास्थ्य विभाग में नौकरी हासिल कर ली थी। उसकी पहली तैनाती आगरा के बिचपुरी ब्लॉक स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में रेडियोलॉजी विभाग के डार्क रूम सहायक के पद पर हुई।
बाद में उसका तबादला बाह ब्लॉक किया गया और फिर 30 अप्रैल को उसे सीएचसी पिनाहट में तैनात कर दिया गया। इस पूरे दौरान वह नियमित रूप से सरकारी वेतन और अन्य सुविधाओं का लाभ उठाता रहा।
महानिदेशक कार्यालय में शिकायत के बाद खुला राज
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कार्यालय में शिकायत मिलने के बाद नियुक्ति से जुड़े सभी अभिलेखों और डिस्पैच नंबरों की जांच कराई गई।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 की भर्ती सूची में नवीन यादव नाम का कोई अभ्यर्थी नियुक्त ही नहीं हुआ था। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी ने फर्जी नियुक्ति पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की थी।
2016 की भर्ती प्रक्रिया का उठाया फायदा
सीएमओ के अनुसार, वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर भर्ती हुई थी। आरोपी ने इसी भर्ती प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और विभागीय व्यवस्था को धोखा देकर नियुक्ति प्राप्त कर ली।
हैरानी की बात यह रही कि करीब दस वर्षों तक उसके दस्तावेजों का प्रभावी सत्यापन नहीं किया गया, जिससे उसका फर्जीवाड़ा लंबे समय तक सामने नहीं आ सका।
शिकायत मिलते ही ड्यूटी छोड़कर हुआ फरार
जांच की भनक लगते ही नवीन यादव 28 जून से ड्यूटी पर नहीं आया और फरार हो गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से थाना पिनाहट में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
विभाग अब आरोपी द्वारा पिछले दस वर्षों में प्राप्त वेतन और अन्य वित्तीय लाभों का पूरा विवरण तैयार कर रहा है, ताकि नियमानुसार राशि की वसूली और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
विभागीय व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह मामला केवल एक व्यक्ति द्वारा फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। करीब दस वर्षों तक किसी भी स्तर पर फर्जी नियुक्ति का पता नहीं चलना विभागीय लापरवाही की ओर इशारा करता है।
अब स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के साथ-साथ यह भी पता लगाने में जुटा है कि इस फर्जी नियुक्ति के पीछे किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत तो नहीं थी। यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
