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भारतीय विदेश मंत्रालय ने रविवार को ओमान के तट के पास वाणिज्यिक जहाज़ जीएफ़एस गैलेक्सी पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है.
मंत्रालय ने बताया कि जहाज़ पर सवार 11 भारतीय नागरिकों में से 10 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय नागरिक अभी भी लापता है.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, “ओमान में स्थित भारतीय दूतावास पूरे घटनाक्रम पर लगातार नज़र बनाए हुए है और ओमानी अधिकारियों के साथ समन्वय कर चलाए जा रहे खोज एवं बचाव अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है.”
मंत्रालय ने इस अभियान में सहयोग के लिए ओमान सरकार और वहां के अधिकारियों का आभार भी व्यक्त किया.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाज़ों पर लगातार हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं. भारत ने एक बार फिर क्षेत्र में तत्काल तनाव कम करने और जारी वार्ताओं को कूटनीतिक समाधान तक पहुंचाने की अपील की है, ताकि शांति और स्थिरता बहाल हो सके.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, साइप्रस के झंडे वाला कंटेनर जहाज़ जीएफ़एस गैलेक्सी पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने हमला किया.
सेंटकॉम ने बताया कि जहाज़ का एक असैनिक चालक दल का सदस्य लापता है. जहाज़ में आग लगने और इंजन कक्ष को भारी नुक़सान पहुंचने के कारण वह अपनी आगे की यात्रा जारी नहीं रख सका.
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) का कहना है कि उसने अगली सूचना तक इस रास्ते को बंद कर दिया है.
ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक़, आईआरजीसी ने कहा कि जहाज़ पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि उसने अपने सिस्टम बंद कर दिए थे और निर्धारित रास्ते से हट गया था.
वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा है कि उसने इस सप्ताह “तीसरे दौर के हमले” किए हैं.
सेंटकॉम के मुताबिक़, आईआरजीसी ने साइप्रस के झंडे वाले एक जहाज़ पर “खुले तौर पर हमला” किया था.
सेंटकॉम ने कहा कि इंजन रूम को भारी नुकसान पहुंचने के कारण एमवी जीएफएस गैलेक्सी “अपनी यात्रा जारी नहीं रख सका.”
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस बयान को साझा करते हुए लिखा, “ईरान ने ग़लत फ़ैसला किया. अब उसे इसकी क़ीमत चुकानी होगी.”
जबकि आईआरजीसी ने चेतावनी दी थी कि होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद किए जाने के बाद अमेरिका की किसी भी “आक्रामक कार्रवाई” का “कड़ा” जवाब दिया जाएगा और क्षेत्र में नए ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा.
ईरान ने किया जॉर्डन पर हमला
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अब ताज़ा हमले में ईरान के दक्षिणी तट पर कई तटीय ठिकानों और संचार टावरों को अमेरिका सेना की ओर से हवाई हमले के बाद ईरान ने जवाबी हमला किया है.
आईआरजीसी की ओर से किए गए हमले के बाद ईरान ने दावा किया कि इससे जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस के कमांड और कंट्रोल सेंटर और एमक्यू-9 ड्रोन हैंगर तबाह हो गए हैं.
इस हमले के बाद बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात भी सतर्क हो गए हैं. बीबीसी की अरबी सेवा के मुताबिक़ गृह मंत्रालय ने बताया कि देश में सायरन बजाया गया है.
वहीं संयुक्त अरब अमीरात के गृह मंत्रालय ने घोषणा की कि वो मिसाइल हमले के ख़तरे से निपटने का इंतज़ाम कर रहा है.
इस सप्ताह की शुरुआत में तीन व्यापारिक टैंकरों पर उस समय हमला किया गया, जब वे ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर अमेरिका की ओर से सुझाए गए रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे थे.
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ईरान बार-बार कहता रहा है कि उसके समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाला अलग रास्ता ही एकमात्र “सुरक्षित” मार्ग है.
इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने कई हमले किए. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक़, इनमें 17 लोगों की मौत हुई और 115 लोग घायल हुए.
इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले किए.
इन हमलों से तनाव बढ़ गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के हमलों का मतलब है कि युद्धविराम अब ख़त्म हो चुका है.
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिका पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया.
हालांकि, ट्रंप ने कहा कि बातचीत जारी रहेगी और मध्यस्थ वार्ता प्रक्रिया को दोबारा शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं.
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़, ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा कि टैंकरों पर हमले एक ग़लती थे और इसके लिए अपने ही एक बेकाबू गुट को ज़िम्मेदार ठहराया.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मध्यस्थों के ज़रिए ईरान तक अपनी मांग पहुंचाई है.
अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से घोषणा करे कि अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों की आवाजाही के लिए बेहद अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला है और व्यापारिक जहाज़ों पर हमले रोकने का वादा करे.
ईरान ने ड्रोन प्रोडक्शन तीन गुना बढ़ाया
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इधर, ईरान के रक्षा मंत्री, ब्रिगेडियर जनरल माजिद बिन रजा ने कहा कि अमेरिका और इसराइल के साथ हाल ही में हुए युद्ध के दौरान ईरान की ड्रोन उत्पादन क्षमता तीन गुना बढ़ गई है.
आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक़, शनिवार को सांसदों के साथ एक बैठक के दौरान, इब्न अल-रेज़ा ने पिछले साल इसराइल के साथ बारह दिनों के टकराव और इस साल अमेरिका और इसराइल के साथ युद्ध पर चर्चा करते हुए कहा ” दुश्मन ” 150 दिग्गज़ टेक्नोलॉजी कंपनियों और एडवांस हथियारों के सथ युद्ध के मैदान में उतरा था.
लेकिन सशस्त्र बलों के सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन और जनता के समर्थन के कारण उसकी हार हुई.
उन्होंने कहा कि युद्ध के चरम पर भी रक्षा उत्पादन लगातार बगैर किसी रुकावट के जारी रहा.
ईरान की ड्रोन उत्पादन क्षमता तीन गुना हो गई है.
उन्होंने कहा कि युद्ध देश की डिफेंस टेक्नोलॉजी के विकास के लिए एक प्रोत्साहन था और उन्होंने दुश्मन की कमजोरियों की सटीक पहचान की अहमियत पर ज़ोर दिया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.