कनाडा के इमिग्रेशन और रिफ्यूजी ट्रिब्यूनल ने एक और गैंग सदस्य, जशनदीप सिंह को देश से बाहर भेजने का आदेश दिया है। उस पर आरोप है कि उसने कनाडा के सरे (Surrey) में कॉमेडियन कपिल शर्मा के कैफे के बाहर हुई फायरिंग में इस्तेमाल हथियार को छिपाने में मदद की थी।

भारत में होने वाली गिरफ्तारियां शामिल
कई देशों में की गई इस बड़ी कार्रवाई का संबंध ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ नाम की एक व्यापक ग्लोबल लॉ-एनफोर्समेंट पहल से है। इसके चलते अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने लॉरेंस और अन्य मुख्य ऑपरेटिव्स के खिलाफ विस्तृत आरोप-पत्र (indictments) दाखिल किए थे। सूत्रों का कहना है कि इस समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के बाद और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, जिनमें भारत में होने वाली गिरफ्तारियां भी शामिल हैं।
कोकीन और हेरोइन की खेप जब्त
यूएस DOJ के आरोप-पत्र के अनुसार लॉरेंस के ट्रांसअटलांटिक आपराधिक नेटवर्क के लिए वित्तीय कामकाज संभालने में देव ने अहम भूमिका निभाई। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि उसने भारी मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी की साजिश रची और दक्षिणी कैलिफोर्निया से पूर्वी अमेरिका तक अवैध ड्रग्स की ढुलाई का इंतजाम किया। इस नेटवर्क को जून 2025 में तब बड़ा झटका लगा, जब अमेरिकी एजेंसियों ने इस सिंडिकेट से जुड़ी लगभग 100 किलोग्राम कोकीन और एक किलोग्राम हेरोइन की एक बड़ी खेप जब्त की।
जबरन वसूली डराने-धमकाने की साजिश
नॉर्थ अमेरिका में लॉरेंस गैंग को एक और झटका लगा, क्योंकि कनाडा के इमिग्रेशन और रिफ्यूजी बोर्ड ने जशनदीप सिंह को देश से बाहर भेजने का आदेश दिया। यह मामला सीधे तौर पर भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की मशहूर हस्तियों से जबरन वसूली और उन्हें डराने-धमकाने की साजिश से जुड़ा है, जिसमें खास तौर पर सरे (Surrey) में हुई गोलीबारी की घटना शामिल है।
सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा
जांच एजेंसियों ने यह पता लगाया कि सिंह ने ‘ड्राइव-बाय शूटिंग’ में इस्तेमाल किए गए हथियार को छिपाकर सिंडिकेट की मदद की थी। हालांकि, अदालत में अभी तक औपचारिक आपराधिक आरोप तय नहीं किए गए हैं, लेकिन आव्रजन अधिकारियों ने फैसला सुनाया कि उनकी मौजूदगी सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है। 2022 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा आए सिंह ने सभी आरोपों से इनकार किया है।
अमेरिका, कनाडा, फ्रांस और भारत
यह गिरोह के एक अन्य सदस्य अर्शदीप सिंह के हालिया निर्वासन के बाद है। ये तीव्र परिचालन विकास ऑपरेशन हार्डबॉल की बढ़ती प्रभावकारिता को रेखांकित करते हैं, जिसका उद्देश्य पश्चिम में सक्रिय भारतीय संगठित अपराध सिंडिकेट द्वारा उपयोग किए जाने वाले बुनियादी ढांचे, वित्तीय पाइपलाइनों और सुरक्षित आश्रयों को नष्ट करना है। यह ऑपरेशन अमेरिका, कनाडा, फ्रांस और भारत में एजेंसियों के बीच वास्तविक समय की खुफिया जानकारी साझा करने पर निर्भर करता है, जो वैश्विक स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली और हिंसक अपराधों में लॉरेंस गिरोह के विस्तार के प्रति शून्य-सहिष्णुता दृष्टिकोण को दर्शाता है।
20 साल की सजा सुनाई गई
एक और घटनाक्रम में ओंटारियो के ब्रैम्पटन के रहने वाले भारतीय मूल के 63 वर्षीय व्यक्ति गुरअमृत सिद्धू को अमेरिकी फेडरल जेल में 20 साल की सजा सुनाई गई है। उन्हें सीमा पार ड्रग तस्करी नेटवर्क का मास्टरमाइंड होने का दोषी पाया गया। इस नेटवर्क के जरिए एक महीने में सैकड़ों किलोग्राम मेथामफेटामाइन और कोकीन (जिसकी कीमत 17 मिलियन डॉलर तक थी) की अमेरिका से कनाडा तस्करी की जाती थी।
