कितने पढ़े-लिखे हैं प्रशांत किशोर? सबसे सर्टिफिकेट मांगने वाले की सारी डिग्री बांकीपुर से सामने आई, Patna Hindi News


प्रशांत किशोर के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनकी शुरुआती पढ़ाई बिहार से ही हुई है, लेकिन हायर एजुकेशन के लिए वह उत्तर प्रदेश, हैदराबाद और फ्रांस तक गए हैं।

बिहार के बांकीपुर उपचुनाव की सरगर्मियों के बीच जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस उपचुनाव के जरिए पीके अपनी चुनावी राजनीति का आगाज करने जा रहे हैं। दूसरों नेताओं की डिग्री मांगने वाले प्रशांत किशोर ने नामांकन भरने के साथ ही चुनाव आयोग को दिए अपने हलफनामे में अपनी पढ़ाई-लिखाई का पूरा ब्यौरा दिया है। आइए जानते हैं कि देश के बड़े-बड़े नेताओं को चुनावी रणनीति सिखाने वाले प्रशांत किशोर खुद कितने पढ़े-लिखे हैं और उन्होंने कहां से डिग्रियां ली हैं।

प्रशांत किशोर के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनकी शुरुआती पढ़ाई बिहार से ही हुई है, लेकिन हायर एजुकेशन के लिए वह उत्तर प्रदेश, हैदराबाद और फ्रांस तक गए हैं। प्रशांत किशोर ने साल 1991 में एम.पी. हाई स्कूल, बक्सर से अपनी मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। यह स्कूल बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) से संबद्ध है।

इसके बाद उन्होंने पटना का रुख किया। साल 1993 में उन्होंने बिहार के प्रतिष्ठित पटना साइंस कॉलेज से इंटर की पढ़ाई पूरी की।

कॉलेज के बाद वह उत्तर प्रदेश चले गए। साल 1996 से 1999 के बीच उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी के बिजनेस स्टडीज विभाग से बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की डिग्री हासिल की।

प्रशांत किशोर ने साल 2001 से 2003 के बीच एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज (ASCI), हैदराबाद से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट (MHA) किया। यह एक स्पेशल हेल्थकेयर मैनेजमेंट प्रोग्राम था, जिसे अमेरिका की मशहूर जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी और हिंदुजा अस्पताल के सहयोग से तैयार किया गया था।

प्रशांत किशोर के पास एक विदेशी डिग्री भी है। साल 2010 में उन्होंने क्लर्मों फेरैंड यूनिवर्सिटी, फ्रांस (CAVILAM VICHY) से इंटेंसिव फ्रेंच लैंग्वेज कोर्स यानी फ्रेंच भाषा की पढ़ाई की है।

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के चुनावी हलफनामे में दी गई शैक्षणिक योग्यता पर गंभीर और सीधे सवाल उठाए थे।

सम्राट से लेकर तेजस्वी तक की पढ़ाई पर उठा चुके हैं सवाल

प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि सम्राट चौधरी के नए हलफनामे को पढ़ने के बाद भी यह साफ नहीं होता है कि उन्होंने अपनी 10वीं या 12वीं की पढ़ाई कब और कहां से पूरी की है।

पीके ने आरोप लगाया, “सम्राट चौधरी ने कामराज विश्वविद्यालय से ‘पीएफसी’ (प्री-फाउंडेशन कोर्स) करने का दावा किया है। यह कोर्स केवल तमिल भाषा बोलने वालों के लिए होता है, इसलिए यह डिग्री फर्जी या संदिग्ध है।” उन्होंने इस विसंगति को लेकर कानूनी कार्रवाई करने तक की चेतावनी भी दी थी।

इसके अलावा लालू प्रसाद यादव के परिवार और खासकर तेजस्वी यादव की पढ़ाई पर प्रशांत किशोर ने सबसे तीखे और बार-बार हमले किए हैं।

पीके का कहना था कि अगर कोई गरीब पैसे या स्कूल की कमी की वजह से नहीं पढ़ पाया, तो वह बात समझ में आती है। लेकिन जिनके माता-पिता दोनों मुख्यमंत्री रहे हों (लालू यादव और राबड़ी देवी), उनका बच्चा अगर 9वीं क्लास भी पास नहीं कर पाया, तो यह दिखाता है कि शिक्षा के प्रति उनकी सोच क्या है।

जब तेजस्वी यादव ने युवाओं को कलम बांटने की मुहिम शुरू की थी, तब पीके ने तंज कसते हुए कहा था, “तेजस्वी को उसी कलम से पहले खुद 10वीं की परीक्षा पास कर लेनी चाहिए, ताकि पढ़े-लिखे युवाओं को उन पर भरोसा हो सके।” उन्होंने कहा कि जो खुद 9वीं फेल है, वह बिहार के विकास का रास्ता क्या बताएगा।

हलफनामे से जुड़ी कुछ और खास बातें

नामांकन पत्र (फॉर्म 26) के अनुसार, प्रशांत किशोर के पिता का नाम स्वर्गीय श्रीकांत पांडेय है। 49 साल के प्रशांत किशोर का स्थायी निवास रोहतास जिले के शिवसागर थाना अंतर्गत कोनार गांव में है। हलफनामे में उन्होंने अपना पेशा पॉलिटिकल एडवाइजर और कंसलटेंट (राजनीतिक सलाहकार) बताया है।

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से दाखिल इस हलफनामे के बाद अब उनकी शिक्षा को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है। चुनावी मैदान में उतरने के बाद देखना होगा कि देश की राजनीति को करीब से समझने वाले पीके जनता के इम्तिहान में कितने नंबरों से पास होते हैं।



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