UPSC Success Story: नागपुर के अर्चित चंदक आज पुलिसिंग को हाईटेक करते हुए देशसेवा में अपना योगदान दे रहे हैं। सिविल सेवा में जाने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने विदेशी कंपनी में लाखों का पैकेज तक ठुकरा दिया था और आज इंजीनियरिंग की एक्सपर्टीज का इस्तेमाल कानून व्यवस्था बनाए रखने में कर रहे हैं। उनकी जर्नी लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल से कम नहीं है।

IIT-JEE में स्टेट टॉपर थे अर्चित चंदक
अर्चित चंदक, महाराष्ट्र में नागपुर के साधारण परिवार से आते हैं। बचपन से उन्हें पढ़ने-लिखने का शौक रहा है। बचपन से पढ़ाई में होशियार अर्चित ने बहुत पहले तय कर लिया था कि उन्हें आईआईटी से पढ़ाई करनी है। उन्होंने साल 2012 में IIT-JEE एग्जाम दिया और पहले ही प्रयास में पूरे शहर में टॉप किया था। जेईई में अच्छे स्कोर की वजह से आईआईटी दिल्ली में एडमिशन मिला और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की बीटेक डिग्री हासिल की।
विदेशी कंपनी से मिला ₹35 लाख सालाना सैलरी का पैकेज
आईआईटी दिल्ली से बीटेक डिग्री हासिल करने के बाद, अर्चित को लाखों की सैलरी वाली नौकरी का ऑफर मिला। एक जापानी कंपनी ने उन्हें भारीभरकम 35 लाख रुपये सालाना सैलरी का जॉब ऑफर दिया। इतनी बड़ी रकम और विदेशी कंपनी में नौकरी यानी ऐशो-आराम की जिंदगी, जिसे पाने का सपना अधिकतर युवा देखते हैं। लेकिन अर्चित के लिए काफी नहीं था। उनके सपने बड़े थे। उनका सपना सिविल सेवा में जाकर देशसेवा करना था।
35 लाख रुपये की नौकरी ठुकराकर UPSC चुना
उन्होंने ठान लिया कि वे अपनी जिंदगी सिविल सेवा के लिए समर्पित करेंगे। आईआईटी से बीटेक पूरा करने के बाद, अर्चित ने जपानी कंपनी की ओर से मिला 35 लाख रुपये पैकेज ठुकरा दिया और यूपीएससी को चुना। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। साल 2018 में अपने पहले अटेम्प्ट में ही देश की दूसरी सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भी क्रैक ली।
UPSC में 184वीं रैंक लाकर बने IPS
ऑल इंडिया रैंक 184 के साथ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित हुए। पहली पोस्टिंग भुसावल के बाजारपेठ थाने में थाना प्रभारी (SHO) के रूप में हुई। यहां अपने काम और ईमानदारी से उन्होंने जनता का भरोसा जीता। आगे चलकर वे प्रमोशन पाकर नागपुर में पुलिस उपायुक्त (DCP) बने। थाना प्रभारी (SHO) के पद पर शुरुआत करने वाले अर्चित मई 2025 से महाराष्ट्र कैडर के अंदर अकोला जिले में SP पद का भार संभाल रहे हैं।
पुलिसिंग को हाईटेक बना रहे IITian से IPS बने अर्चित
SP अर्चित चंडक की लीडरशिप में, जिला ‘TRINETRA’ (त्रिनेत्र) नाम का एक AI-बेस्ड प्रेडिक्टिव पुलिसिंग सिस्टम शुरू किया गया। यह सिस्टम कानून लागू करने वाली एजेंसियों के सोचने, प्लान बनाने और काम करने के तरीके को बदल रहा है।
जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर बनाया गया TRINETRA, अपराध से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड जैसे FIR, एहतियाती कार्रवाई, बीट इंटेलिजेंस और व्यवहार के पैटर्न को एक साथ लाता है और उन्हें तुरंत काम में लाए जा सकने वाले सुझावों (insights) में बदल देता है।
नेक इरादे और खुद पर विश्वास की मिसाल है IPS अर्चित की कहानी
इस सिस्टम का मुख्य हिस्सा है ‘रिपीट ऑफेंडर रिस्क स्कोर’ (RORS)। यह अपराधों के हालिया होने, बार-बार होने और उनकी गंभीरता का आकलन करता है ताकि अधिकारी उभरते खतरों की पहचान जल्दी कर सकें। इसका मकसद सरल लेकिन असरदार है- पुलिसिंग को सिर्फ घटना के बाद की कार्रवाई (reaction) से हटाकर अपराध रोकने (prevention) की ओर ले जाना।
अब पेट्रोलिंग ‘क्राइम क्लॉक’ के हिसाब से होती है, पैटर्न मैचिंग से जांच तेज होती है, और अपराध होने से पहले ही काउंसलिंग, निगरानी और माहौल में सुधार जैसे शुरुआती कदम उठाए जाते हैं। आईपीएस अर्चित चंदक की कहानी साबित करती है कि अगर इरादे नेक हों और खुद पर भरोसा हो तो, दुनिया की कोई भी ताकत आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
(All Photos Credit: Insta/archit.59)
