कौन हैं IPS अर्चित? जिन्होंने IIT के बाद ₹35 लाख LPA जॉब ठुकराकर UPSC को चुना,पुलिसिंग को बना रहे हाईटेक – success story of ips archit chandak who turned down a high-paying job after iit btech for upsc


UPSC Success Story: नागपुर के अर्चित चंदक आज पुलिसिंग को हाईटेक करते हुए देशसेवा में अपना योगदान दे रहे हैं। सिविल सेवा में जाने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने विदेशी कंपनी में लाखों का पैकेज तक ठुकरा दिया था और आज इंजीनियरिंग की एक्सपर्टीज का इस्तेमाल कानून व्यवस्था बनाए रखने में कर रहे हैं। उनकी जर्नी लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल से कम नहीं है।

Success Stoy of IPS Archit Chandak
IPS अर्चित चंदक की तस्वीर। (फोटो सोर्स- Insta/archit.59)
Success Story of IPS Archit Chandak: यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा और इंजीनियरिंग की IIT-JEE दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती हैं। महाराष्ट्र नागपुर के रहने वाले अर्चित चंदक ने सबसे टफ माने जाने वाली इन दोनों परीक्षाओं को क्रैक किया है, बल्कि टॉपर्स में से एक थे। विदेशी कंपनी उन्हें लाखों की सैलरी देकर बुला रहा थी, फिर भी उन्होंने यूपीएससी को चुना और आईपीएस बने। IPS अर्चित की सक्सेस स्टोरी सिर्फ एक करियर बदलने की कहानी नहीं, बल्कि अपने सपनों पर अटूट विश्वास और मातृभूमि की सेवा के प्रति समर्पण की एक मिसाल है।

IIT-JEE में स्टेट टॉपर थे अर्चित चंदक

IIT-JEE में स्टेट टॉपर थे अर्चित चंदक

अर्चित चंदक, महाराष्ट्र में नागपुर के साधारण परिवार से आते हैं। बचपन से उन्हें पढ़ने-लिखने का शौक रहा है। बचपन से पढ़ाई में होशियार अर्चित ने बहुत पहले तय कर लिया था कि उन्हें आईआईटी से पढ़ाई करनी है। उन्होंने साल 2012 में IIT-JEE एग्जाम दिया और पहले ही प्रयास में पूरे शहर में टॉप किया था। जेईई में अच्छे स्कोर की वजह से आईआईटी दिल्ली में एडमिशन मिला और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की बीटेक डिग्री हासिल की।

विदेशी कंपनी से मिला ₹35 लाख सालाना सैलरी का पैकेज

विदेशी कंपनी से मिला ₹35 लाख सालाना सैलरी का पैकेज

आईआईटी दिल्ली से बीटेक डिग्री हासिल करने के बाद, अर्चित को लाखों की सैलरी वाली नौकरी का ऑफर मिला। एक जापानी कंपनी ने उन्हें भारीभरकम 35 लाख रुपये सालाना सैलरी का जॉब ऑफर दिया। इतनी बड़ी रकम और विदेशी कंपनी में नौकरी यानी ऐशो-आराम की जिंदगी, जिसे पाने का सपना अधिकतर युवा देखते हैं। लेकिन अर्चित के लिए काफी नहीं था। उनके सपने बड़े थे। उनका सपना सिविल सेवा में जाकर देशसेवा करना था।

35 लाख रुपये की नौकरी ठुकराकर UPSC चुना

35 लाख रुपये की नौकरी ठुकराकर UPSC चुना

उन्होंने ठान लिया कि वे अपनी जिंदगी सिविल सेवा के लिए समर्पित करेंगे। आईआईटी से बीटेक पूरा करने के बाद, अर्चित ने जपानी कंपनी की ओर से मिला 35 लाख रुपये पैकेज ठुकरा दिया और यूपीएससी को चुना। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। साल 2018 में अपने पहले अटेम्प्ट में ही देश की दूसरी सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भी क्रैक ली।

UPSC में 184वीं रैंक लाकर बने IPS

UPSC में 184वीं रैंक लाकर बने IPS

ऑल इंडिया रैंक 184 के साथ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित हुए। पहली पोस्टिंग भुसावल के बाजारपेठ थाने में थाना प्रभारी (SHO) के रूप में हुई। यहां अपने काम और ईमानदारी से उन्होंने जनता का भरोसा जीता। आगे चलकर वे प्रमोशन पाकर नागपुर में पुलिस उपायुक्त (DCP) बने। थाना प्रभारी (SHO) के पद पर शुरुआत करने वाले अर्चित मई 2025 से महाराष्ट्र कैडर के अंदर अकोला जिले में SP पद का भार संभाल रहे हैं।

पुलिसिंग को हाईटेक बना रहे IITian से IPS बने अर्चित

पुलिसिंग को हाईटेक बना रहे IITian से IPS बने अर्चित

SP अर्चित चंडक की लीडरशिप में, जिला ‘TRINETRA’ (त्रिनेत्र) नाम का एक AI-बेस्ड प्रेडिक्टिव पुलिसिंग सिस्टम शुरू किया गया। यह सिस्टम कानून लागू करने वाली एजेंसियों के सोचने, प्लान बनाने और काम करने के तरीके को बदल रहा है।

जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर बनाया गया TRINETRA, अपराध से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड जैसे FIR, एहतियाती कार्रवाई, बीट इंटेलिजेंस और व्यवहार के पैटर्न को एक साथ लाता है और उन्हें तुरंत काम में लाए जा सकने वाले सुझावों (insights) में बदल देता है।

नेक इरादे और खुद पर विश्वास की मिसाल है IPS अर्चित की कहानी

नेक इरादे और खुद पर विश्वास की मिसाल है IPS अर्चित की कहानी

इस सिस्टम का मुख्य हिस्सा है ‘रिपीट ऑफेंडर रिस्क स्कोर’ (RORS)। यह अपराधों के हालिया होने, बार-बार होने और उनकी गंभीरता का आकलन करता है ताकि अधिकारी उभरते खतरों की पहचान जल्दी कर सकें। इसका मकसद सरल लेकिन असरदार है- पुलिसिंग को सिर्फ घटना के बाद की कार्रवाई (reaction) से हटाकर अपराध रोकने (prevention) की ओर ले जाना।

अब पेट्रोलिंग ‘क्राइम क्लॉक’ के हिसाब से होती है, पैटर्न मैचिंग से जांच तेज होती है, और अपराध होने से पहले ही काउंसलिंग, निगरानी और माहौल में सुधार जैसे शुरुआती कदम उठाए जाते हैं। आईपीएस अर्चित चंदक की कहानी साबित करती है कि अगर इरादे नेक हों और खुद पर भरोसा हो तो, दुनिया की कोई भी ताकत आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।

(All Photos Credit: Insta/archit.59)

अमन कुमार

लेखक के बारे मेंअमन कुमारअमन कुमार, डिजिटल में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रॉड्यूसर पद पर हैं। शिक्षा और रोजगार जगत की खबरों के अनुभवी लेखक अमन को न्यूज वर्ल्ड में करीब 10 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है। वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। साल 2015 में साधना न्यूज चैनल से अपने करियर की शुरुआत करते हुए टीवी चैनल आउटपुट डेस्क और ‘मानव को शांति कहां’ मासिक पत्रिका से लेखन शैली को समझा। इसके बाद लाइव न्यूज हिंदी (लाइव इंडिया), जनसत्ता.कॉम, आजतक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहकर ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे। कई साल के अनुभव से अमन पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं। अमन रिपोर्ट्स बेस्ड, सटीक और विश्वसनीय जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। उनकी प्राथमिकता यूजर्स तक सही जानकारी को सरल शब्दों में समझाना रही है।

अमन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों जैसे स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षा, प्रवेश परीक्षा, सरकारी नौकरी, सरकारी रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स एंड ऑप्शंस, करेंट अफेयर्स, जनरल नॉलेज, सक्सेस स्टोरीज समेत कई टॉपिक्स पर गहरी सोच और समझ के साथ व्यापक कवरेज करते हैं। टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स, करियर काउंसलर की सलाह और टिप्स के जरिए स्कूल की खबरों से लेकर IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT, CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। इसके अलावा एसससी, यूपीएससी, बैंक, पुलिस समेत भारत और राज्य स्तर की सरकारी नौकरियों के बारे में विस्तार और गहराई से लिखते हैं।

गवर्नमेंट जॉब, प्राइवेट जॉब, स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक की फील्ड में काम करते हुए अमन ने भारत के प्रमुख शिक्षा बोर्ड CBSE के एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज, दिल्ली यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एडमिशन्स प्रोफेसर हनीत गांधी और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का खास इंटरव्यू कर स्टूडेंट्स के लिए क्वालिटी कंटेंट वाले ऑथेंटिक आर्टिकल्स लिखे हैं। इसके अलावा ABVP और NSUI जैसे छात्र संगठनों के प्रवक्ताओं का इंटरव्यू लिया है। सीबीएसई, रीट, नीट, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले टॉपर्स से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार करते रहे हैं। ताकि उनके टिप्स और सलाह से बाकी युवाओं के करियर को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।

दिल्ली में जन्मे अमन कुमार की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में B.A. ऑनर्स की डिग्री हासिल की। फिर डीयू के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उसके बाद गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। ये डिग्रियां अमन को हिंदी पत्रकारिता की वो एक्सपर्टीज देती हैं जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल (5 Ws+1H) यानी क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के पैमानों के आधार पर न्यूज राइटिंग के लिए जरूरी हैं… और पढ़ें