Jharkhand Public Service Commission: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, सीआईडी ने परीक्षा उप नियंत्रक सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन इस कांड का मास्टरमाइंड अभय तिवारी बताया जा रहा है।

जेपीएससी परीक्षा का मास्टरमाइंड कौन?
जेपीएससी परीक्षा में अनियमितता को लेकर सीआईडी की कार्रवाई लगातार जारी है। सीआईडी ने जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। उसमें जो अभय तिवारी नाम का जो शख्स है, यही असली मास्टरमाइंड है। अभय तिवारी ने झारखंड लोक सेवा आयोग में पांच सरकारी नौकरी की परीक्षा पास की थी। उसके अलावा उसका भाई और उसकी पत्नी भी झारखंड सरकार में नौकरी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अभय तिवारी पूर्व में टीडीपीएल कंपनी में प्रबंधक का काम संभालता था। वर्तमान में वो गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था।
सीआईडी के मुताबिक अभय तिवारी ने किया खेल
अभय तिवारी के बारे में जानकारी ये है कि झारखंड लोक सेवा आयोग और जेएसएससी की परीक्षा में भी ये धांधली करता था। अभय तिवारी के भाई का जेएसएससी सीजीएल के जरिए झारखंड सरकार में नौकरी मिली है। अभय तिवारी ने अपने भाई को सेट करने के बाद जेएसएससी सीजीएल के जरिए अपनी पत्नी को भी झारखंड सरकार में फिट करा दिया। जब जेएसएससी ने परीक्षा लेने के लिए एजेंसी हेतु टेंडर निकाला था। उसमें जिस टीडीपीएल कंपनी का ये मैनेजर था। उस कंपनी ने भी टेंडर डाला था।
जेपीएससी परीक्षा धांधली में क्या- क्या हूआ?
| जेपीएससी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद, रांची पुलिस की सहायता से एक विशेष सीआईडी टीम ने 21 जुलाई को एक बड़ा अभियान चलाया। |
| टीम ने जेपीएससी कार्यालय, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय और राज्य भर में कई अन्य स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। |
| सीआईडी ने बताया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर, भारतीय न्याय संहिता और झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों के नियंत्रण और निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 के तहत 22 जुलाई को मामला दर्ज किया गया। |
| जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रामवीर सिंह और तीन अन्य – मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद इबाद और अभय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया गया है। |
| सीआईडी ने स्पष्ट किया है कि जांच फिलहाल प्रारंभिक चरण में है और पूरे मामले की गहन जांच जारी है। यदि जांच के दौरान अन्य व्यक्तियों की भूमिका या नए सबूत सामने आते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। |
झारखंड सरकार को लगाया गया चूना
टेंडर डालने के दौरान कंपनी की ओर से एक ऑथराइजेशन लेटर जारी किया गया था। इसमें साफ लिखा गया था कि मनोज कुमार तिवारी। अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी। अभय तिवारी के नाम पर सरकारी नौकरी और मनोज कुमार तिवारी के नाम पर प्राइवेट नौकरी करता था- अभय तिवारी। लेटर में लिखा गया था कि कंपनी की ओर से ऑथराइज पर्सन मनोज कुमार तिवारी होंगे। जेएसएससी कार्यालय का सारा काम मनोज कुमार तिवारी ही करेंगे। ये कंपनी की ओर से कहा गया था।
परीक्षा कराने के लिए टेंडर में हुआ खेल
सीआईडी कीे मुताबिक हुआ यूं कि 10 जनवरी, 2024 को जेएसएससी ने जब टेंडर निकाला, तब अभय तिवारी वाली कंपनी ने उसमें अप्लाई किया। उसके बाद 28 जून, 2024 को टीडीपीएल के साथ जेएसएससी ने जनरल एग्रीमेंट किया। उसके बाद सरकार ने फैसला लिया कि आइडेंटिफिकेशन का पूरा काम टीडीपीएल कंपनी के कब्जे में रहेगा। उसके बाद 4 सितंबर, 2024 को सरकार ने टीडीपीएल को परीक्षा कराने का एक वर्क ऑर्डर दे दिया। उसके बाद 5 सितंबर, 2024 को कंपनी ने कहा कि अभी जिस रेट पर मुझे काम मिला है। उस रेट पर हम काम नहीं कर पाएंगे।
अभय तिवारी टडीपीएस कंपनी में मैनेजर था
सीआईडी के मुताबिक कंपनी ने काम मिलने के एक दिन बाद काम करने से इनकार कर दिया। रेट कम होने का आरोप लगाया। उसके बाद कंपनी ने तीन गुना रेट कोट कर दिया। ये देखते हुए ठीक दो दिन बाद 7 सितंबर, 2026 को सरकार ने टीडीपीएल कंपनी के साथ अपना करार रद्द कर दिया। बाकी कंपनियों में से एक को इसकी जिम्मेदारी दी गई। 21 सितंबर को परीक्षा होने वाली थी। सीआईडी ने हाल में एक पत्र लिखा है जेएसएससी के सचिव को। उसमें पूछा कि किस कंपनी ने परीक्षा का आयोजन की है।
सीआईडी कर रही मामले की जांच
अभय तिवारी जिसकी गिरफ्तारी हुई है। ये कई परीक्षा में पास हुआ है। टीजीटी की परीक्षा में पास हुआ। बीएसओ जेएसएससी की परीक्षा में पास हुआ है। आरएफओ की परीक्षा में ये पास हुआ है। उसके अलावा फूड सेफ्टी ऑफिसर की परीक्षा में भी पास हुआ है। ये अभय तिवारी अपना रिजल्ट दिखाकर स्टूडेंट्स को अपनी जाल में फंसाता था। उसके बाद सौ फीसदी गारंटी के साथ पास कराने का ठेका लेता था। कुल मिलाकर अभय तिवारी इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड था। इसी ने छात्रों को बरगलाया और अपने परिवार को भी धांधली से अधिकारी बना दिया। सीआईडी की जांच में अभी और खुलासे होने बाकी हैं।
