क्रिकेट में गैरी सोबर्स जैसा सितारा फिर न आएगा, Nazariya Hindi News


इसी 28 जुलाई को वह नब्बे साल के हो जाते, मगर सर गारफील्ड सोबर्स ने शुक्रवार को ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया। हम उन्हें गैरी सोबर्स ही पुकारा करते थे। वैसे तो क्रिकेट की दुनिया में बहुत से ‘लीजेंड’ पैदा हुए, मगर सर डॉन ब्रेडमैन की तरह…

मदन लाल, विश्व कप विजेता पूर्व क्रिकेटर

इसी 28 जुलाई को वह नब्बे साल के हो जाते, मगर सर गारफील्ड सोबर्स ने शुक्रवार को ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया। हम उन्हें गैरी सोबर्स ही पुकारा करते थे। वैसे तो क्रिकेट की दुनिया में बहुत से ‘लीजेंड’ पैदा हुए, मगर सर डॉन ब्रेडमैन की तरह अगर किसी क्रिकेटर की संसार के कोने-कोने में उपमा दी गई, तो वह गैरी सोबर्स ही हैं। विश्व-क्रिकेट में उनके जैसा सम्मान कमाने वाले बहुत कम खिलाड़ी हैं! उनके जाने से हम सब मर्माहत हैं।

किसी खिलाड़ी की महानता का अंदाजा हम कैसे लगाते हैं? जब उसका नाम लेने भर से उसकी टीम का सुनहरा दौर याद आ जाए या फिर वह अपने देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले चेहरों में गिना जाए। सर गैरी सोबर्स इस मेयार पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। वेस्टइंडीज जब विश्व क्रिकेट में एक दमदार टीम बनी, गैरी सोबर्स उसका एक बेहद मजबूत हिस्सा थे। सन् 1960 से लेकर 1974 तक वेस्टइंडीज टीम का दुनिया में बहुत नाम रहा और इसमें गैरी सोबर्स का योगदान काफी ज्यादा था। उनके आंकड़े इसकी तस्दीक कर देते हैं। सन् 1954 से 1974 के बीच गैरी सोबर्स ने अपने देश के लिए 93 टेस्ट मैच खेले, जिनमें उन्होंने 8,000 से भी अधिक रन बनाए और 235 विकेट लिए।

क्रिकेट का चस्का गैरी को बहुत छोटी उम्र (आठ साल) में ही लग गया था। तब वह बारबाडोस में स्कोर बोर्ड पर स्कोर टांका करते थे। उस समय के बड़े-बड़े क्रिकेटरों को इस मैदान में उन्होंने खेलते हुए देखा। अपनी आत्मकथा गैरी सोबर्स : माई ऑटोबायोग्राफी में उन्होंने अभावों के बीच अपनी परवरिश के बारे में तफसील से लिखा है कि किस तरह पिता की मौत के बाद अकेली मां ने अपने बच्चों का पालन-पोषण किया। हालांकि, क्रिकेट के मैदान में ‘किंग’ बनते उन्हें ज्यादा देर न लगी। यह ठीक है कि 17 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले गैरी को अपने पहले शतक के लिए करीब चार साल का इंतजार करना पड़ा, लेकिन उसके बाद तो उन्होंने शतकों की झड़ी लगा दी और तिहरे शतक का एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया, जिसे अगले साढ़े तीन दशक तक कोई छू न सका।

क्रिकेट में आज तक जितने भी हरफनमौला खिलाड़ी हुए, सर गैरी सोबर्स उन सबमें महान थे। बल्लेबाजी और गेंदबाजी के आंकड़े तो आपने पढ़ ही लिए। एक और आंकड़े से आप आसानी से अंदाजा लगा सकेंगे कि वह कितने जबर्दस्त क्षेत्ररक्षक थे। साल 1965 में गैरी को वेस्टइंडीज टीम का कप्तान बनाया गया था और 1966 में टीम इंग्लैंड के दौरे पर गई। उस दौरे में गैरी जैसे चौतरफा जादू बिखेर रहे थे। पांच टेस्ट मैचों की वह शृंखला वेस्टइंडीज ने 3-1 से जीती थी, जबकि एक मैच ड्रॉ रह गया था। उस शृंखला में गैरी सोबर्स ने न सिर्फ तीन शतक जड़े और 20 विकेट झटके थे, बल्कि 10 कैच भी पकड़े थे। गैरी से स्लिप में फील्डिंग करा लीजिए या बाउंड्री पर, उनके भीतर का फील्डर अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में सामने होता था। फर्स्ट क्लास मैच में मैल्कम नैश की छह गेंदों पर छह छक्के जड़ने का उनका रिकॉर्ड भी दशकों तक लोगों के जेहन में दर्ज रहा। यह कारनामा करने वाले वह दुनिया के पहले क्रिकेटर थे।

गैरी एक बहुत अच्छे इंसान भी थे। कहते हैं, बड़े आदमी के पास सिर्फ खड़े हो जाएं, तो कुछ बहुमूल्य सीखने को मिल जाता है। मैंने वेस्ट इंडीज के दो दौरे किए हैं। जब भी हम मिले, गैरी ने छोटी-छोटी, मगर बहुत अच्छी सलाहें दीं। गेंदबाजी के बारे में उन्होंने मुझे बताया था कि अगर आप गेंद ‘मूव’ कर रहे हैं और बल्लेबाज को रन नहीं लेने दे रहे, तो उसके आउट होने की संभावना बढ़ जाती है। बाद के दिनों में मुझे उनके साथ इंग्लैंड में पेशेवर क्रिकेट खेलने का भी मौका मिला। हमने वहां कई चैरिटी मैच खेले। गैरी को खेलते हुए देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था। हालांकि, उस समय तक वह क्रिकेट में बहुत सक्रिय नहीं रह गए थे। उन्हें रन बनाते देखकर आनंद मिलता था।

अपनी आलोचनाओं के जवाब वह मैदान में देने के कायल थे। सन् 1972 की बात है। गैरी ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट खेल रहे थे। शुरुआती दो टेस्ट मैच उनके अच्छे नहीं गए थे। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों ने इसे लेकर गैरी पर कुछ तंज कस दिया। फिर क्या था, मेलबर्न में तीसरे टेस्ट मैच में उन्होंने रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया। गैरी ने 129 गेंदों पर अपना शतक जड़ दिया था। कुल 254 रनों की उनकी उस पारी को डॉन ब्रेडमैन ने ऑस्ट्रेलिया में खेली गई तब तक की सबसे शानदार पारी बताया था।

दुनिया भर के कप्तानों, क्रिकेटरों में गैरी बेहद लोकप्रिय थे। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान इयान चैपल ने एक बार कहा था कि लोग गैरी सोबर्स को एक ऐसे क्रिकेटर के रूप में देखते हैं, जो बस अपना स्वाभाविक खेल खेलते रहे, मगर ऐसा नहीं है। वह खेल-शैली की बारीकियों पर बहुत गौर करते हैं। चैपल ने माना था कि गैरी की सलाह से उन्हें अपनी बैटिंग में काफी मदद मिली। इसके साथ ही इयान चैपल ने एक किस्सा भी बयान किया था, जो बताता है कि अपनी इस योग्यता को लेकर गैरी कितने सचेत थे। दरअसल, किसी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट क्लब को एक कोच की तलाश थी। उसने गैरी सोबर्स से संपर्क किया। बातचीत के दौरान क्लब के मुखिया ने उनसे कहा कि गैरी, आपको कोच के रूप में नियुक्त करके हमें बहुत खुशी होती, पर आपके पास जरूरी काबिलियत नहीं है। गैरी का त्वरित जवाब था, ‘फिर मुझे नाइटहुड’ की उपाधि किस बात के लिए मिली है?’

गैरी सोबर्स भारतीयों से बहुत प्यार करते थे, क्योंकि वह जब कभी भी हिन्दुस्तान आए, यहां उन्हें बहुत प्यार और सम्मान मिला। इस प्रेम को उन्होंने हमेशा सहेजकर रखा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)



Leave a Comment