जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता केवल एक राकेट की उड़ान नहीं, बल्कि देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम, युवा विज्ञानियों और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी की बड़ी जीत है। महज आठ वर्ष पहले स्थापित इस स्टार्टअप ने अपने पहले आर्बिटल मिशन ‘विक्रम-1’ को सफल बनाकर साबित कर दिया कि भारत का निजी क्षेत्र भी अब वैश्विक स्तर की अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने की क्षमता रखता है।
माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम के जरिये भारत में भी आन-डिमांड सेटेलाइट लांच करने का बाजार विकसित किया जा सकेगा।
इस सफलता की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि मिशन का नेतृत्व 30 से 40 वर्ष की आयु के युवा विज्ञानियों और इंजीनियरों ने किया। आईएएनएस के अनुसार, कंपनी में करीब एक हजार युवा विज्ञानी कार्यरत हैं। स्काईरूट की कमान इसरो के पूर्व विज्ञानी पवन कुमार चंदना और नागा भारत डाका के हाथों में है।
दोनों ने छोटे उपग्रहों के तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार को देखते हुए कम लागत, तेज और भरोसेमंद लांच सर्विस विकसित करने का सपना देखा था। वर्ष 2022 में कंपनी का ‘विक्रम-एस’ भारत का पहला निजी सब-आर्बिटल राकेट बना था और अब विक्रम-1 ने उस उपलब्धि को आर्बिटल स्तर तक पहुंचा दिया।
स्काईरूट की सफलता भारत के अंतरिक्ष सुधारों की भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। राकेट में 3डी-प्रिंटेड इंजन, कार्बन-कंपोजिट ढांचा और स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, श्रीहरिकोटा स्थित इसरो के लांच कांप्लेक्स से प्रक्षेपण यह भी दर्शाता है कि निजी क्षेत्र की इस सफलता के पीछे इसरो की दशकों की तकनीकी विशेषज्ञता, बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन मजबूत आधार बने हुए हैं।
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प्रस्तुति ने भी बदली अंतरिक्ष मिशनों की तस्वीर
‘मिशन आगमन’ ने सिर्फ तकनीकी उपलब्धि ही नहीं दिखाई, बल्कि अंतरिक्ष मिशनों को आम लोगों तक पहुंचाने का अंदाज भी बदल दिया। लांच का लाइव प्रसारण आधुनिक ग्राफिक्स, सिनेमाई विजुअल्स, मिशन कंट्रोल के दृश्यों और इंजीनियरों के साथ संवाद से सुसज्जित था। तकनीकी अपडेट के साथ मिशन के पीछे की मानवीय कहानी भी दिखाई गई, जिससे जटिल अंतरिक्ष विज्ञान आम दर्शकों के लिए भी सहज बन गया।
प्रस्तुति में एलन मस्क की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स की शैली की झलक जरूर दिखी, लेकिन पूरा कार्यक्रम भारतीय विज्ञानियों, तकनीक और उपलब्धियों पर केंद्रित रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता, रियल-टाइम संवाद और प्रभावी प्रस्तुति न केवल लोगों का भरोसा बढ़ाती है, बल्कि नई प्रतिभाओं और निवेशकों को भी आकर्षित करती है।
गणित में 51 अंक से अंतरिक्ष तक: पवन चंदना की प्रेरक उड़ान
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है। 12वीं कक्षा में गणित में केवल 51 अंक पाने वाले पवन ने इस कमजोरी को कभी अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। मशीनों और इंजीनियरिंग के प्रति रुचि ने उन्हें पहले ही प्रयास में आईआईटी खड़गपुर पहुंचाया।
हैदराबाद के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले पवन का चयन कैंपस प्लेसमेंट के जरिए इसरो में हुआ। उन्होंने जीएसएलवी एमके-3 जैसे महत्वपूर्ण मिशनों पर काम किया और छह वर्षों तक विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में राकेट डिजाइन एवं विकास का अनुभव हासिल किया। इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि निजी क्षेत्र भी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
आईआईटी मुंबई और आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र नागा भारत डाका के साथ मिलकर उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना की। डाका इसरो में फ्लाइट कंप्यूटर इंजीनियर रहे और भारतीय लांच व्हीकलों के कई एवियोनिक्स माड्यूल विकसित किए। पवन को फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक बिन्नी बंसल से प्रेरणा और शुरुआती निवेश मिला।
वर्ष 2020 में कंपनी ने ‘रमन-1’ इंजन का सफल परीक्षण किया। उसी वर्ष सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला और स्काईरूट इसरो के साथ समझौता करने वाली पहली निजी कंपनी बनी। बाद में कंपनी ने करोड़ों डॉलर की फंडिंग जुटाकर अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई गति दी।
दो महीने में इसरो का अगला मिशन, चालू वित्त वर्ष में सात प्रक्षेपण का लक्ष्य
इसरो ने चालू वित्त वर्ष में कम से कम सात अंतरिक्ष प्रक्षेपण का लक्ष्य तय किया है। एएनआई के अनुसार, इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि अगला मिशन अगले दो महीनों में लांच किया जाएगा। दो उपग्रह पूरी तरह तैयार हैं, जबकि पांच-छह अन्य अंतिम एकीकरण चरण में हैं। आगामी मिशनों में गगनयान कार्यक्रम की पहली मानव रहित उड़ान भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि विक्रम-1 के प्रक्षेपण से पहले आटोमैटिक लांच सीक्वेंस के दौरान तकनीकी गड़बड़ी आ गई थी। ग्राउंड सिस्टम से आनबोर्ड कंप्यूटर को नियंत्रण हस्तांतरित करते समय समस्या आने से लांच करीब 35 मिनट टालना पड़ा।
हालांकि विज्ञानियों ने तेजी से खामी दूर कर मिशन को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि इसरो और स्काईरूट की टीमों के समन्वय से यह ऐतिहासिक मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। उन्होंने स्काईरूट टीम को बधाई भी दी।
‘विक्रम-1’ की सफलता पर पीएम मोदी ने स्काईरूट टीम से की बात
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विक्रम-1’ की ऐतिहासिक सफलता पर स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम से फोन पर बात कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा का निर्णायक क्षण बताते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी नवाचार और नए अवसरों को गति दे रही है।
पीटीआई के अनुसार, प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, “स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम से बात कर विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर बधाई दी। यह उपलब्धि देश के अनगिनत युवाओं को बड़े सपने देखने और निडर होकर नवाचार करने के लिए प्रेरित करेगी।”
बातचीत के दौरान स्काईरूट के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना ने प्रधानमंत्री को बताया कि विक्रम-1 पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का ‘वंदे मातरम्’ संदेश वाला पोस्टकार्ड सफलतापूर्वक 450 किलोमीटर ऊंची कक्षा में पहुंच गया है। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ ने स्वतंत्रता आंदोलन में देशवासियों को प्रेरित किया था और अब वही संदेश अंतरिक्ष तक पहुंच गया है।
प्रधानमंत्री ने ‘मिशन आगमन’ को आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए नए युग की शुरुआत है।
वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत दस्तक: जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत दस्तक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के फैसले का ही परिणाम है कि स्काईरूट जैसी भारतीय कंपनियां आज इतिहास रच रही हैं।
अंतरिक्ष को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम : अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विक्रम-1 की सफलता पर स्काईरूट एयरोस्पेस को बधाई देते हुए कहा कि यह अंतरिक्ष को अधिक सुलभ बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को और मजबूती देगी तथा वैश्विक स्पेस पावर के रूप में देश की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई पर पहुंचाएगी।
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता केवल एक राकेट की उड़ान नहीं, बल्कि देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम, युवा विज्ञानियों और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी की बड़ी जीत है। महज आठ वर्ष पहले स्थापित इस स्टार्टअप ने अपने पहले आर्बिटल मिशन ‘विक्रम-1’ को सफल बनाकर साबित कर दिया कि भारत का निजी क्षेत्र भी अब वैश्विक स्तर की अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने की क्षमता रखता है। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम के जरिये भारत में भी आन-डिमांड सेटेलाइट लांच करने का बाजार विकसित किया जा सकेगा।
इस सफलता की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि मिशन का नेतृत्व 30 से 40 वर्ष की आयु के युवा विज्ञानियों और इंजीनियरों ने किया। आइएएनएस के अनुसार, कंपनी में करीब एक हजार युवा विज्ञानी कार्यरत हैं। स्काईरूट की कमान इसरो के पूर्व विज्ञानी पवन कुमार चंदना और नागा भारत डाका के हाथों में है।
दोनों ने छोटे उपग्रहों के तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार को देखते हुए कम लागत, तेज और भरोसेमंद लांच सर्विस विकसित करने का सपना देखा था। वर्ष 2022 में कंपनी का ‘विक्रम-एस’ भारत का पहला निजी सब-आर्बिटल राकेट बना था और अब विक्रम-1 ने उस उपलब्धि को आर्बिटल स्तर तक पहुंचा दिया।
स्काईरूट की सफलता भारत के अंतरिक्ष सुधारों की भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। राकेट में 3डी-प्रिंटेड इंजन, कार्बन-कंपोजिट ढांचा और स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, श्रीहरिकोटा स्थित इसरो के लांच कांप्लेक्स से प्रक्षेपण यह भी दर्शाता है कि निजी क्षेत्र की इस सफलता के पीछे इसरो की दशकों की तकनीकी विशेषज्ञता, बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन मजबूत आधार बने हुए हैं।
प्रस्तुति ने भी बदली अंतरिक्ष मिशनों की तस्वीर
‘मिशन आगमन’ ने सिर्फ तकनीकी उपलब्धि ही नहीं दिखाई, बल्कि अंतरिक्ष मिशनों को आम लोगों तक पहुंचाने का अंदाज भी बदल दिया। लांच का लाइव प्रसारण आधुनिक ग्राफिक्स, सिनेमाई विजुअल्स, मिशन कंट्रोल के दृश्यों और इंजीनियरों के साथ संवाद से सुसज्जित था। तकनीकी अपडेट के साथ मिशन के पीछे की मानवीय कहानी भी दिखाई गई, जिससे जटिल अंतरिक्ष विज्ञान आम दर्शकों के लिए भी सहज बन गया।
प्रस्तुति में एलन मस्क की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स की शैली की झलक जरूर दिखी, लेकिन पूरा कार्यक्रम भारतीय विज्ञानियों, तकनीक और उपलब्धियों पर केंद्रित रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता, रियल-टाइम संवाद और प्रभावी प्रस्तुति न केवल लोगों का भरोसा बढ़ाती है, बल्कि नई प्रतिभाओं और निवेशकों को भी आकर्षित करती है।
गणित में 51 अंक से अंतरिक्ष तक: पवन चंदना की प्रेरक उड़ान
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है। 12वीं कक्षा में गणित में केवल 51 अंक पाने वाले पवन ने इस कमजोरी को कभी अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। मशीनों और इंजीनियरिंग के प्रति रुचि ने उन्हें पहले ही प्रयास में आइआइटी खड़गपुर पहुंचाया।
हैदराबाद के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले पवन का चयन कैंपस प्लेसमेंट के जरिए इसरो में हुआ। उन्होंने जीएसएलवी एमके-3 जैसे महत्वपूर्ण मिशनों पर काम किया और छह वर्षों तक विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में राकेट डिजाइन एवं विकास का अनुभव हासिल किया। इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि निजी क्षेत्र भी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
आइआइटी मुंबई और आइआइटी मद्रास के पूर्व छात्र नागा भारत डाका के साथ मिलकर उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना की। डाका इसरो में फ्लाइट कंप्यूटर इंजीनियर रहे और भारतीय लांच व्हीकलों के कई एवियोनिक्स माड्यूल विकसित किए। पवन को फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक बिन्नी बंसल से प्रेरणा और शुरुआती निवेश मिला।
वर्ष 2020 में कंपनी ने ‘रमन-1’ इंजन का सफल परीक्षण किया। उसी वर्ष सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला और स्काईरूट इसरो के साथ समझौता करने वाली पहली निजी कंपनी बनी। बाद में कंपनी ने करोड़ों डालर की फंडिंग जुटाकर अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई गति दी।
दो महीने में इसरो का अगला मिशन, चालू वित्त वर्ष में सात प्रक्षेपण का लक्ष्य
इसरो ने चालू वित्त वर्ष में कम से कम सात अंतरिक्ष प्रक्षेपण का लक्ष्य तय किया है। एएनआइ के अनुसार, इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि अगला मिशन अगले दो महीनों में लांच किया जाएगा। दो उपग्रह पूरी तरह तैयार हैं, जबकि पांच-छह अन्य अंतिम एकीकरण चरण में हैं। आगामी मिशनों में गगनयान कार्यक्रम की पहली मानव रहित उड़ान भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि विक्रम-1 के प्रक्षेपण से पहले आटोमैटिक लांच सीक्वेंस के दौरान तकनीकी गड़बड़ी आ गई थी। ग्राउंड सिस्टम से आनबोर्ड कंप्यूटर को नियंत्रण हस्तांतरित करते समय समस्या आने से लांच करीब 35 मिनट टालना पड़ा। हालांकि विज्ञानियों ने तेजी से खामी दूर कर मिशन को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि इसरो और स्काईरूट की टीमों के समन्वय से यह ऐतिहासिक मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। उन्होंने स्काईरूट टीम को बधाई भी दी।
‘विक्रम-1’ की सफलता पर पीएम मोदी ने स्काईरूट टीम से की बात
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विक्रम-1’ की ऐतिहासिक सफलता पर स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम से फोन पर बात कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा का निर्णायक क्षण बताते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी नवाचार और नए अवसरों को गति दे रही है।
पीटीआइ के अनुसार, प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, “स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम से बात कर विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर बधाई दी। यह उपलब्धि देश के अनगिनत युवाओं को बड़े सपने देखने और निडर होकर नवाचार करने के लिए प्रेरित करेगी।”
बातचीत के दौरान स्काईरूट के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना ने प्रधानमंत्री को बताया कि विक्रम-1 पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का ‘वंदे मातरम्’ संदेश वाला पोस्टकार्ड सफलतापूर्वक 450 किलोमीटर ऊंची कक्षा में पहुंच गया है। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ ने स्वतंत्रता आंदोलन में देशवासियों को प्रेरित किया था और अब वही संदेश अंतरिक्ष तक पहुंच गया है।
प्रधानमंत्री ने ‘मिशन आगमन’ को आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए नए युग की शुरुआत है।
वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत दस्तक : जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत दस्तक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के फैसले का ही परिणाम है कि स्काईरूट जैसी भारतीय कंपनियां आज इतिहास रच रही हैं।
अंतरिक्ष को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम : अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विक्रम-1 की सफलता पर स्काईरूट एयरोस्पेस को बधाई देते हुए कहा कि यह अंतरिक्ष को अधिक सुलभ बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को और मजबूती देगी तथा वैश्विक स्पेस पावर के रूप में देश की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई पर पहुंचाएगी।