खेल-खेल में गेट पर गिरी 6 साल की बच्ची, किम्स के डॉक्टरों ने 3 घंटे की जटिल सर्जरी से बचाई आंख की रोशनी


KIMS Hospitals

किम्स हॉस्पिटल. (ETV Bharat)

कर्नूल (आंध्र प्रदेश): कर्नूल के किम्स अस्पताल (KIMS Hospitals) के डॉक्टरों ने छह साल की बच्ची की आंख की पलक और आंसू बहने के रास्ते को पूरी तरह ठीक कर दिया है. तीन घंटे तक चली एक जटिल माइक्रोसर्जिकल रीकंस्ट्रक्शन (बारीक सर्जरी) के बाद यह सफलता मिली.

आंध्र प्रदेश के कर्नूल में स्थित किम्स अस्पताल की कंसलटेंट प्लास्टिक सर्जन, डॉ. नव्या कोथाचेरुवु ने बताया कि कर्नूल की रहने वाली छह साल की बच्ची, दिवीषा, घर पर खेलते समय अचानक एक गेट पर गिर गई थी. इस वजह से उसकी दाहिनी आंख के पास गहरा जख्म हो गया, जिसके बाद उसे अस्पताल लाया गया.

डॉक्टरों ने जब जांच की तो पता चला कि बच्ची की ऊपर और नीचे, दोनों पलकों पर गहरे घाव थे. इसके साथ ही, आंख के नीचे की वह बारीक नली (लोअर कैनलिकुलस) भी पूरी तरह कट गई थी, जो आंख से आंसू बाहर निकालने के लिए बहुत जरूरी होती है,

डॉ. नव्या ने बताया कि बच्चों में इस तरह की चोटें काफी कम देखने को मिलती हैं और इनमें तुरंत सर्जरी की जरूरत होती है. अगर इलाज में देरी की जाए, तो आंख से लगातार पानी गिरने की समस्या, पलक का ढांचा बिगड़ने और आंख के कामकाज को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है.

डॉ. नव्या ने समझाया कि बच्चों की आंसू नली को ठीक करना बहुत मुश्किल काम होता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि बच्चों का आंसू बहने का रास्ता (लैक्रीमल ड्रेनेज सिस्टम) बहुत ज्यादा बारीक होता है और उसके आसपास के हिस्से बेहद नाजुक होते हैं. इसे ठीक करने के लिए सूक्ष्म और बहुत ही सटीक सर्जरी की जरूरत होती है.

बच्ची की स्थिति को देखते हुए तुरंत इमरजेंसी सर्जरी की गई. इसके लिए डॉक्टरों ने खास तरह के चश्मे, जिससे चीजें बड़ी दिखाई देती हैं, और सर्जरी के विशेष बारीक औजारों का इस्तेमाल किया. लगभग तीन घंटे तक चली इस सर्जरी के दौरान, डॉक्टरों ने कटी हुई निचली आंसू नली को ढूंढा और उसमें एक ‘इंट्राकैथ स्टेंट’ (एक छोटी मेडिकल नली) डाला, ताकि आंसू बहने का रास्ता खुला रहे और भविष्य में बंद न हो.

इसके बाद, 8-0 नंबर के बहुत ही महीन धागे (नायलॉन टांकों) का इस्तेमाल करके कटी हुई आंसू नली को आपस में जोड़ा गया. फिर पलक को सुंदर और सामान्य रूप देने के लिए उसकी कई परतों की बहुत ही सावधानी से मरम्मत की गई, ताकि आंख ठीक से काम भी करे और देखने में भी खराब न लगे.

डॉ. नव्या ने कहा, “बच्चों में आंसू बहने का रास्ता बहुत छोटा होने के कारण यह सर्जरी तकनीकी रूप से काफी कठिन होती है. लेकिन, सही समय पर इलाज और बहुत सावधानी से की गई बारीक सर्जरी की वजह से हम आंख के कामकाज और उसके रूप-रंग, दोनों को पूरी तरह से ठीक करने में कामयाब रहे.”

सर्जरी के बाद बच्ची बहुत जल्दी और अच्छी तरह ठीक हो गई. उसकी पलक का ढांचा और आंसू बहने का रास्ता अब पूरी तरह सामान्य हो चुका है. उसे बिना किसी परेशानी या जटिलता के बिल्कुल ठीक हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.

किम्स (KIMS) अस्पताल, कर्नूल ने कहा कि इस सफल इलाज से यह साफ होता है कि बच्चों की आंखों की ऐसी गंभीर चोटों को ठीक करने के लिए बीमारी की तुरंत पहचान, सही समय पर सर्जरी और आधुनिक माइक्रोसर्जरी के अनुभव का होना कितना जरूरी है.

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