खेल विभाग में कर्मचारियों की भारी किल्लत, 800 से अधिक पद खाली, National Hindi News


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बिहार में खेल विभाग को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खिलाड़ियों को पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन 800 से ज्यादा पद वर्षों से खाली पड़े हैं। क्रीड़ा प्रशिक्षकों में 379 में से 378 पद रिक्त हैं, जिससे खिलाड़ियों को नियमित और उचित प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है।

खेल विभाग में कर्मचारियों की भारी किल्लत, 800 से अधिक पद खाली

मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। बिहार में खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की बातें तो लगातार हो रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि खेल विभाग खुद कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। विभाग में 800 से अधिक पद वर्षों से खाली पड़े हैं। सबसे गंभीर स्थिति क्रीड़ा प्रशिक्षकों की है। विभाग में स्वीकृत 380 प्रशिक्षकों के पदों में से 379 पद रिक्त हैं। क्रीड़ा प्रशिक्षकों के अलावा खेल सेवा संवर्ग में स्वीकृत 44 पदों में 33 खाली हैं, जबकि खेल लिपिकीय सेवा के 80 पदों में 53 पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में सरकारी स्तर पर खिलाड़ियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिलना लगभग ठप हो गया है。

कर्मियों की कमी

जिला खेल अधिकारी राजेंद्र कुमार ने बताया कि उनके यहां अकाउंटेंट व खेल गतिविधियों से संबंधित लिपिक भी नहीं है। रिक्तियां बनाकर विभाग को भेजी गई हैं। स्टाफ की कमी के चलते मानदेय पर काम चलाऊ व्यवस्था के तहत काम हो रहा है। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने स्वयं भी निरीक्षण के दौरान स्टाफ की कमी को महसूस की है। रिक्तियों के कारण योजनाओं के संचालन और खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है।

जिलों से लेकर राजधानी तक कर्मियों की कमी:

कर्मियों की कमी जिलों से लेकर मुख्यालय तक है। राज्य खेल अकादमी, राजगीर में भी स्टाफ की भारी कमी है। यहां एक भी लिपिक की तैनाती नहीं है, जबकि अन्य तकनीकी और प्रशासनिक पद भी लंबे समय से खाली हैं। इससे अकादमी के नियमित संचालन पर असर पड़ रहा है। उधर, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के गठन के बाद संस्थान को मजबूत बनाने के लिए 301 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव में प्रशासनिक, तकनीकी और सहायक कर्मियों के पद शामिल हैं, लेकिन इसे अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है। इसके कारण नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।

ओलंपिक मिशन की तैयारियों के बीच ये हाल

विभाग ने 48 क्रीड़ा प्रशिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू की थी, लेकिन यह भर्ती लंबे समय से लंबित है। खेल अधिकारी अनिल कुमार श्रीवास्तव, अवनीश नंदन प्रसाद समेत तमाम खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि बिना प्रशिक्षकों और पर्याप्त मानव संसाधन के राज्य में खेल प्रतिभाओं को निखारना मुश्किल होगा। ऐसे समय में जब बिहार 2036 ओलंपिक मिशन और खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में बड़े लक्ष्य तय कर रहा है, विभाग में खाली पड़े पद सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

सचिव बोले, रिक्तियां भरना सरकार की प्राथमिकता :

खेल विभाग के नवनियुक्त सचिव आईएएस दीपक आनंद ने पूछे जाने पर माना कि विभाग में काफी संख्या में रिक्तयां हैं, लेकिन उनको भरना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आज ही मैंने खेल विभाग के सचिव पद का कार्यभार संभाला है। जल्द ही विभाग में उन रिक्तियों का विश्लेषण किया जाएगा तथा उनको भरने के लिए सरकार के स्तर पर हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर आवश्यक पदों को जल्द भरने की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि विभाग की कार्यक्षमता मजबूत हो और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार के खेल विभाग में कितने पद खाली हैं?

बिहार में खेल विभाग में 800 से अधिक पद वर्षों से खाली पड़े हैं।

क्रीड़ा प्रशिक्षकों के पदों की स्थिति क्या है?+

खेल विभाग में कर्मचारियों की कमी से क्या समस्या हो रही है?+



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