टैक्स ऑडिट डेडलाइन बढ़ी: 21 अक्टूबर तक का मौका, फॉर्म 3CD फाइलिंग में न करें ये बड़ी गलतियां
टैक्स ऑडिट की बढ़ी हुई डेडलाइन में अब सिर्फ 10 दिन बचे हैं और काम काफी ज्यादा है। CBDT ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दिया है, जबकि ऑडिट वाले मामलों के लिए ITR दाखिल करने की डेडलाइन 21 नवंबर 2026 तय की गई है। इस बदलाव की जानकारी PIB और इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर दे दी गई है। इसलिए, Form 3CD से लेकर ITR फाइल करने का अपना प्लान इसी हिसाब से तैयार रखें।
आज ही Form 3CD से जुड़े सभी आंकड़ों को फाइनल कर लें—जैसे क्लोजिंग स्टॉक, कैश बैलेंस, TDS/TCS के प्रूफ, लोन लेजर और GST का मिलान। ध्यान रखें कि UDIN जनरेट और वैलिडेट हो चुका हो और सही डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) मैप किया गया हो। अगर ऑडिट कराना जरूरी था और आपने इसे मिस कर दिया, तो सेक्शन 271B के तहत भारी जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा, देरी से फाइलिंग या एडवांस टैक्स कम जमा करने पर सेक्शन 234A, 234B और 234C के तहत ब्याज भी देना पड़ेगा।

टैक्स ऑडिट डेडलाइन और CBDT की राहत: जानिए क्या-क्या बदला
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की तय तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं, ऑडिट वाले मामलों में ITR भरने की लास्ट डेट भी 31 अक्टूबर से आगे बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 हो गई है। अगर आपके आंकड़ों में कोई बदलाव होता है, तो Rule 6G के तहत रिवाइज्ड TAR (टैक्स ऑडिट रिपोर्ट) फाइल कर सकते हैं। इसके बाद इसे पोर्टल पर दोबारा एक्सेप्ट और ई-वेरिफाई करके लॉक करना न भूलें।
Form 3CD के जरूरी नियम और AIS/26AS/GST टर्नओवर से मिलान
अपनी कुल बिक्री (सेल), GST आउटवर्ड सप्लाई, बैंक क्रेडिट और TDS टर्नओवर का सही-सही मिलान कर लें। अगर राउंड-ट्रिपिंग, टाइमिंग अंतर या अनमैच क्रेडिट नोट्स जैसी कोई गड़बड़ी दिखे, तो उसकी तुरंत जांच करें। इसे एक आसान उदाहरण से समझें: अगर Form 16 में सैलरी ₹9,60,000 दिख रही है, लेकिन AIS में पर्क्विजिट्स (अनुलाभ) मिलाकर ₹9,72,000 दर्ज है, तो अपनी पेरोल मैपिंग ठीक करें या अंतर का कारण स्पष्ट करें। भले ही डेडलाइन बढ़ गई हो, फिर भी सेक्शन 234B या 234C के तहत ब्याज लग सकता है, इसलिए अपने एडवांस टैक्स की देनदारी को समय पर क्लियर कर लें।
पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था: AY 2026-27 के लिए आसान तुलना
| नियम | पुरानी व्यवस्था (Old regime) | नई व्यवस्था (New regime) |
|---|---|---|
| डिफ़ॉल्ट विकल्प | हर साल चुनना पड़ता है (Opt‑in) | ज्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए बाय डिफ़ॉल्ट |
| आम टैक्स छूट (Deductions) | कई तरह की (जैसे Section 80C) | काफी सीमित विकल्प |
| कागजात/रिकॉर्ड रखना | ज्यादा सबूत और दस्तावेज चाहिए | दस्तावेजों का झंझट कम |
| ऑडिट की समय-सीमा | कोई बदलाव नहीं | कोई बदलाव नहीं |
Section 40(b) के तहत पार्टनर सैलरी और 44AD/44ADA में होने वाली गलतियां
पार्टनरशिप फर्मों के लिए पार्टनर रेम्यूनरेशन (वेतन) की कटौती तभी मिलेगी, जब यह पार्टनरशिप डीड में दर्ज हो, केवल वर्किंग पार्टनर्स को दिया गया हो और Section 40(b) की सीमाओं के भीतर हो। अगर आप प्रिजम्प्टिव टैक्स स्कीम (Section 44AD या 44ADA) चुनते हैं, तो अनुमानित आय का प्रावधान लागू होने के बाद पार्टनर सैलरी या ब्याज पर अलग से कोई छूट नहीं मिलती। यहां हुई जरा सी गलती के कारण TAR रिवाइज करना पड़ता है और आगे चलकर ITR में गड़बड़ी का सामना करना पड़ता है।
बिना किसी परेशानी के फाइलिंग पूरी करने का पोर्टल प्रोसेस समझें: सबसे पहले ऑडिटर वैलिड UDIN के साथ Form 3CA/3CB‑3CD अपलोड या रिवाइज करेगा। इसके बाद टैक्सपेयर अपने वर्कलिस्ट (Worklist) सेक्शन में जाकर इसे एक्सेप्ट करेगा और DSC के जरिए ई-वेरिफाई करेगा। सबमिट बटन दबाने से पहले क्लॉज़-वाइज़ टोटल, 40(b) की कैलकुलेशन और AIS-GST के डेटा को दोबारा जांच लें। ये सारे काम आज ही निपटा लेंगे तो 21 अक्टूबर का दिन तनावमुक्त रहेगा और 21 नवंबर तक की प्रक्रिया भी बेहद आसान हो जाएगी।