विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश में ड्रग इंस्पेक्टर की भर्ती के लिए राज्य सरकार द्वारा अनुभव की अतिरिक्त शर्त लगाने वाले नियम को रद कर दिया है। इस निर्णय से ड्रग इंस्पेक्टर पद के इच्छुक अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी। अब भर्ती प्रक्रिया केंद्रीय नियमों के अनुसार केवल शैक्षणिक योग्यता के आधार पर होगी।
यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने अमित कुमार सिंह व 10 अन्य तथा कृपा शंकर सिंह व 26 अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है। याचीगण की ओर से 2015 के उत्तर प्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग राजपत्रित अधिकारी (औषधि) सेवा (तृतीय संशोधन) नियमावली के नियम-2 को अदालत में चुनौती दी गई थी।
इस संशोधन से 2015 के नियम-8 को बदला गया था। इसमें ड्रग इंस्पेक्टर पद पर भर्ती के लिए अनुभव की वैकल्पिक शर्तें जोड़ी गई थीं। याचीगण के अधिवक्ता व्यास कुमार प्रसाद ने अदालत में 11 नवंबर 2025 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी केंद्रीय अधिसूचना का हवाला दिया। इसमें ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता निर्धारित है, अनुभव अनिवार्य नहीं है।
कहा गया कि अतिरिक्त अनुभव की शर्त लगाना केंद्रीय नियमों के विरुद्ध है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह ने बताया कि इसी राहत के लिए लखनऊ पीठ में पहले भी याचिका दायर हुई थी। उस पर आठ जनवरी 2026 को फैसला आया था। उस फैसले के खिलाफ अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल 2026 को स्पष्ट रूप से कहा था कि राज्य सरकार को केंद्रीय औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 में निर्धारित योग्यता से अतिरिक्त योग्यता तय करने का अधिकार नहीं है। राज्य सरकार केंद्रीय ड्रग नियम 1945 के नियम 49 के अनुसार आवश्यक कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है।
खंडपीठ ने कहा, याची शीर्ष कोर्ट के अप्रैल 2026 के आदेश से आच्छादित हैं। उसमें पहले ही यह कानून घोषित हो चुका है कि राज्य अतिरिक्त योग्यता नहीं थोप सकता। अदालत ने उत्तर प्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग राजपत्रित अधिकारी (औषधि) सेवा (तृतीय संशोधन) नियमावली 2015 के नियम-2 को, जिससे नियम-8 प्रतिस्थापित हुआ था, रद कर दिया है।