दिल्ली हाई कोर्ट के जज ने 16 साल चलाई LPG एजेंसी, रिन्यू करवाते रहे कॉन्ट्रैक्ट – delhi high court judge later manipur chief justice siddharth mridul had lpg agency during 16 year tenure


दिल्ली हाई कोर्ट के एक और जज के खिलाफ विवादित मामला सामने आया है। यह मामला पद पर रहते हुए गैस एजेंसी चलाने से संबंधित है।

Delhi High Court judge later Manipur Chief Justice Siddharth Mridul had LPG agency
दिल्ली हाईकोर्ट के जज ने चलाई गैस एजेंसी (AI IMAGE)
नई दिल्ली: देश में संवैधानिक पदों की गरिमा और शुचिता को तार-तार करने वाला एक मामला सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहे और बाद में मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे जस्टिस (रि.) सिद्धार्थ मृदुल ने अपने 16 साल के कार्यकाल के दौरान LPG डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी चलाई। जबकि किसी भी जज को शपथ और अलिखित आचार संहिता के तहत सरकार, निजी पार्टियों, PSU या कंपनियों के साथ कोई भी आर्थिक, कॉन्ट्रैक्ट वाला, बिजनेस या व्यापारिक संबंध रखना उनके लिए बहुत अनैतिक माना जाता है।

जज ने दिल्ली हाई कोर्ट में शुरू की थी वकील के तौर पर प्रैक्टिस

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस (रिटायर्ड) सिद्धार्थ मृदुल ने 1986 में दिल्ली हाई कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की थी और मार्च 2008 में उसी कोर्ट में जज नियुक्त हुए। अक्टूबर 2023 में वे मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने।
‘किचन फ्लेम’ कंपनी के लिए BPCL और मृदुल के बीच डिस्ट्रीब्यूटरशिप एग्रीमेंट को 25 अगस्त 1995, 24 अगस्त 2005, 23 अगस्त 2010, 25 अगस्त 2015, 7 मई 2025 और पिछले साल 29 सितंबर (24 अगस्त 2030 तक की वैलिडिटी के साथ) को रिन्यू किया गया था।

जजों को पारदर्शिता के नियमों के तहत देनी होती है जानकारी

रिपोर्ट के अनुसार, जहां संवैधानिक अदालतों के जजों को पारदर्शिता के नियमों के तहत हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) से बचने के लिए कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी की जानकारी देनी होती है। 21 नवंबर 2024 को मणिपुर HC के चीफ जस्टिस के पद से रिटायर हुए जस्टिस मृदुल ने भारत पेट्रोलियम द्वारा 1984 में उन्हें दी गई LPG डिस्ट्रीब्यूटरशिप को जारी रखकर आचार संहिता का उल्लंघन किया है।

जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया को लेकर तैयारी के बीच यह मामला

यह मामला तब सामने आया है जब न्यायपालिका दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले से नोटों से भरे बैग मिलने के बाद उन्हें हटाने की संसद की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना के लिए तैयारी कर रही थी।

पूर्व जज ने BPCL के सभी नोटिस नजरअंदाज किए

‘किचन फ्लेम’ विवाद न्यायपालिका की गरिमा को खतरे में डाल सकता है। जस्टिस मृदुल ने कई लोगों, संस्थाओं और अधिकारियों को नोटिस जारी किए होंगे, वहीं 29 मई को उन्हें खुद BPCL से एक नोटिस मिला। इस नोटिस में PSU ने दिसंबर 2025 में जज के खिलाफ दर्ज एक सार्वजनिक शिकायत का जिक्र किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ‘आपने पहले जज के तौर पर काम किया है’।

BPCL ने पूछा-आपकी डिस्ट्रीब्यूटरशिप क्यों न सस्पेंड की जाए

  • तेल मार्केटिंग कंपनी ने कहा कि जस्टिस मृदुल का गैस एजेंसी चलाना कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन है और उनसे पूछा कि डिस्ट्रीब्यूटरशिप क्यों न सस्पेंड की जाए।
  • BPCL ने अपने नोटिस में कहा, ‘प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि पिछली डिस्ट्रीब्यूटरशिप एग्रीमेंट के दौरान संवैधानिक या न्यायिक पद पर आपके पूर्णकालिक काम करने और आपकी अनुपस्थिति में डिस्ट्रीब्यूटरशिप के संचालन के तरीके के बारे में जरूरी जानकारी कभी भी कॉर्पोरेशन को नहीं दी गई।’ कंपनी ने जस्टिस मृदुल को याद दिलाया कि उसने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए पहले 30 जनवरी और 26 फरवरी को उन्हें पत्र लिखे थे।

न्यायिक नौकरी करना कई शर्तों का उल्लंघन

  • डिस्ट्रीब्यूटरशिप एग्रीमेंट की शर्तों का हवाला देते हुए, BPCL ने कहा, ‘प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि BPCL की पूर्व लिखित अनुमति के बिना डिस्ट्रीब्यूटरशिप के दौरान न्यायिक नौकरी करना या उसे जारी रखना एग्रीमेंट की कई शर्तों का उल्लंघन है।’
  • जाहिर है मृदुल ने BPCL द्वारा भेजे गए किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया, जिसके बाद 6 जुलाई को BPCL ने ‘किचन फ्लेम’ की LPG डिस्ट्रीब्यूशन डीलरशिप सस्पेंड कर दी। जस्टिस मृदुल की ‘किचन फ्लेम’ के लिए LPG डिस्ट्रीब्यूटरशिप संभालने वाले दीपक यादव की पत्नी मोनिका यादव ने दो महीने पहले दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने BPCL को निर्देश देने की मांग की थी कि वह एजेंसी की प्रोप्राइटरशिप को उनके पक्ष में फिर से गठित करने के उनके आवेदन पर फैसला करे।

डीलरशिप सस्पेंड होने के बाद फिर किया था हाई कोर्ट का रुख

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने BPCL से कहा था कि वह दो महीने के भीतर उनके आवेदन पर फैसला करे। 6 जुलाई को BPCL द्वारा किचन फ्लेम की डीलरशिप सस्पेंड करने के बाद मोनिका ने फिर से हाई कोर्ट का रुख किया।
  • उन्होंने BPCL पर आरोप लगाया कि उसने एजेंसी के मालिकाना हक को फिर से गठित करने के उनके आवेदन पर जानबूझकर फैसला नहीं किया और साथ ही LPG सप्लाई भी सस्पेंड कर दी।
दिनेश मिश्र

लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।

दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।

दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।

नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।

दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।… और पढ़ें