चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की जीत के बाद कप्तानी से हटाए जाने और शुभमन गिल को कप्तानी सौंपे जाने के बाद से रोहित शर्मा के वनडे प्रदर्शन में भारी गिरावट आई है। उनके प्रदर्शन ने फैंस को चिंता में और उनके करियर को मुश्किल में डाल दिया है।

आंकड़े दे रहे गवाही
आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी 2023 से लेकर चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के दौरान रोहित शर्मा अपने करियर के सबसे आक्रामक दौर में थे। इस समयावधि में उन्होंने खेली गई 36 पारियों में 935 गेंदों का सामना कर 1146 रन बनाए थे। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 67.41 का बेहद शानदार था और पावरप्ले में उनका स्ट्राइक रेट 122.57 का आसमान छू रहा था, जहां वे विपक्षी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते थे। यही नहीं, पहले 10 ओवरों के पावरप्ले में उनका बाउंड्री प्रतिशत भी 20.9% था, जो उनकी आक्रामकता की गवाही देता था।
चैंपियंस ट्रॉफी के बाद के आंकड़े
हालांकि, अक्टूबर 2025 के बाद से जब रोहित केवल बतौर खिलाड़ी मैदान पर उतरे, तो उनके खेलने की शैली में एक बड़ा धीमापन दिखाई दिया है। पिछले कुछ महीनों में खेली गई 13 पारियों में रोहित ने 310 गेंदों का सामना करके केवल 267 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका शानदार रहने वाला बल्लेबाजी औसत घटकर 44.50 पर आ गया है। सबसे चिंताजनक गिरावट उनके पावरप्ले के स्ट्राइक रेट में आई है, जो 122.57 से सीधे नीचे गिरकर महज 86.13 रह गया है, जो उनके स्वाभाविक हिटमैन अंदाज के बिल्कुल विपरीत है।
कप्तानी जाते ही खेल बदला
कप्तानी के इस फेरबदल के बाद रोहित शर्मा का पावरप्ले बाउंड्री प्रतिशत भी 20.9% से घटकर अब 15.5% पर सिमट गया है। फैंस इस बात को लेकर हैरान हैं कि जो रोहित शुरुआत से ही मैच का रुख भारत की तरफ मोड़ देते थे, वे अब पावरप्ले में इतने रक्षात्मक क्यों नजर आ रहे हैं। क्या यह उन पर कप्तानी हटने का मानसिक दबाव है या फिर टीम मैनेजमेंट ने उन्हें नई भूमिका के तहत क्रीज पर टिककर खेलने की जिम्मेदारी सौंपी है, यह आने वाली सीरीज तय करेंगी। लेकिन फिलहाल ये गिरते आंकड़े टीम मैनेजमेंट और गौतम गंभीर की अगुवाई वाले कोचिंग स्टाफ के लिए एक बड़ी चिंता का विषय जरूर हैं।
