दुनिया का सबसे रहस्यमयी गांव! यहां खेतों, स्कूल और दुकानों में बैठे हैं सिर्फ पुतले – japan nagoro scarecrow village more dolls than people reason behind it rttw


कल्पना कीजिए… आप किसी गांव में घूम रहे हैं. सड़क पर एक बुजुर्ग बैठे हैं. खेत में किसान काम कर रहे हैं. दुकान पर ग्राहक बैठे हैं. स्कूल में बच्चे पढ़ रहे हैं. नदी किनारे कोई मछली पकड़ रहा है. सब कुछ बिल्कुल सामान्य लगता है. लेकिन जैसे ही आप उनके पास जाते हैं, आपके कदम अचानक रुक जाते हैं. क्योंकि उनमें से एक भी इंसान जिंदा नहीं होता. ये सुनकर शायद आपको किसी हॉरर फिल्म का सीन याद आए, लेकिन यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि जापान के एक असली गांव की सच्चाई है. इस गांव का नाम है नागोरो. दुनिया इसे आज ‘स्केयरक्रो विलेज’ यानी पुतलों वाला गांव कहती है.

यह गांव जितना खूबसूरत है, उतना ही रहस्यमयी भी है. यहां आने वाले ज्यादातर लोग शुरुआत में यही गलती करते हैं कि सामने खड़े पुतलों को असली इंसान समझ बैठते है. कोई हाथ हिला देता है, कोई नमस्ते कर देता है, लेकिन जवाब कभी नहीं मिलता. नागोरो जापान के शिकोकू द्वीप के पहाड़ी इलाके में बसा एक छोटा सा गांव है. यहां पहुंचना भी आसान नहीं है. ट्रेन बदलनी पड़ती है, फिर बस पकड़नी होती है. पूरे दिन में गिनी-चुनी बसें ही यहां आती हैं. शायद यही वजह है कि यहां पहुंचते ही सबसे पहले सन्नाटा आपका स्वागत करता है. गांव में चारों तरफ हरियाली है. पहाड़ हैं. साफ नदी बहती है. हवा भी बेहद साफ है. लेकिन इंसान लगभग दिखाई नहीं देते. आज इस गांव में सिर्फ 25 से 30 लोग रहते हैं, जबकि यहां 350 से ज्यादा पुतले मौजूद हैं. यानी यहां इंसानों से करीब 10 गुना ज्यादा पुतले हैं.

आखिर पूरे गांव में पुतले क्यों रखे गए?
इस सवाल का जवाब जितना अनोखा है, उतना ही भावुक भी. करीब 70 साल पहले यह गांव बिल्कुल सामान्य था. यहां 400 से ज्यादा लोग रहते थे. बच्चे स्कूल जाते थे. खेतों में खेती होती थी. दुकानों पर भीड़ रहती थी. हर घर में रौनक थी, लेकिन समय बदला. पढ़ाई, नौकरी और बेहतर जिंदगी की तलाश में गांव के युवा टोक्यो, ओसाका और दूसरे बड़े शहरों में बसने लगे. धीरे-धीरे गांव खाली होने लगा. जो लोग बचे, वे ज्यादातर बुजुर्ग थे. कुछ साल बाद उनकी भी मौत होने लगी और गांव वीरान होता चला गया.

हर पुतले के पीछे छिपी है एक असली कहानी
इसके बाद अयानो ने गांव के एक-एक पुराने लोगों के पुतला बनाना शुरू किया. जो किसान था, उसका पुतला खेत में बैठा दिया. जो मछली पकड़ता था, उसे नदी किनारे बैठा दिया. जो दुकान चलाता था, उसका पुतला दुकान के अंदर रख दिया गया. जो स्कूल में पढ़ाता था, उसे क्लास में बैठा दिया गया. यानी हर पुतला उस इंसान की जिंदगी को दोबारा जीता हुआ दिखाई देता है. यही वजह है कि यह गांव किसी संग्रहालय से ज्यादा एक यादों की किताब जैसा लगता है.

एक महिला ने बदल दी पूरे गांव की पहचान
इसी गांव में रहने वाली अयानो सुकिमी कई साल बाद अपने गांव लौटीं. जब उन्होंने बचपन का गांव देखा तो उनकी आंखें भर आईं. जिन लोगों के साथ वे खेली थीं, जिन पड़ोसियों के साथ उनका बचपन बीता था, वे अब इस दुनिया में नहीं थे. चारों तरफ सिर्फ खाली घर और सन्नाटा था. एक दिन उन्होंने खेत में कौवों को भगाने के लिए अपने पिता जैसा एक पुतला बनाया और खेत में खड़ा कर दिया. हैरानी की बात यह हुई कि गांव के लोगों ने उसे सचमुच इंसान समझ लिया. यहीं से उनके मन में एक नया विचार आया. उन्होंने सोचा कि क्यों न उन लोगों की याद को जिंदा रखा जाए, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं.

इतने असली लगते हैं कि लोग धोखा खा जाते हैं
इन पुतलों को देखकर पहली नजर में पहचानना लगभग नामुमकिन है कि सामने इंसान है या पुतला. इनके चेहरे, आंखें, कपड़े, टोपी, जूते, दस्ताने, यहां तक कि बैठने का तरीका भी बिल्कुल असली इंसानों जैसा बनाया गया है. एक पुतला तैयार करने में करीब तीन दिन का समय लगता है.अयानो हर पुतले को उस व्यक्ति की पुरानी तस्वीरों के आधार पर तैयार करती हैं ताकि वह बिल्कुल उसी जैसा दिखाई दे.

स्कूल में बच्चे बैठे हैं… लेकिन कोई पढ़ता नहीं
गांव का पुराना स्कूल आज भी मौजूद है. कक्षा के अंदर बच्चे बैठे दिखाई देते हैं. टीचर ब्लैकबोर्ड के सामने खड़े हैं. लेकिन वहां एक भी बच्चा जिंदा नहीं है. सब सिर्फ पुतले हैं. इसी तरह गांव की पुरानी जिम में भी लोग बैठे दिखाई देते हैं. कहीं शादी का सेटअप बनाया गया है, तो कहीं पूरा परिवार खाना खाता नजर आता है. ऐसा लगता है जैसे समय अचानक रुक गया हो.

यहां का सन्नाटा सबसे ज्यादा डराता है
नागोरो की सबसे बड़ी खासियत इसके पुतले नहीं, बल्कि यहां का सन्नाटा है. कई-कई मिनट तक कोई गाड़ी नहीं गुजरती. कोई बच्चा खेलता नहीं दिखता. किसी घर से आवाज नहीं आती. बस हवा चलती रहती है और सामने बैठे सैकड़ों पुतले आपको देखते हुए महसूस होते हैं. यही वजह है कि यहां आने वाले कई पर्यटक कहते हैं कि यह जगह डरावनी कम और भावुक ज्यादा लगती है.

यह गांव सिर्फ एक कहानी नहीं, एक चेतावनी भी है
असल में नागोरो सिर्फ एक अनोखा पर्यटन स्थल नहीं है. यह जापान की घटती आबादी की सबसे बड़ी तस्वीर भी है. जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां जन्म दर लगातार घट रही है. युवा कम हो रहे हैं और बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. कई गांव ऐसे हैं जहां अब गिने-चुने लोग ही बचे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में जापान के कई गांव पूरी तरह खाली हो सकते हैं. नागोरो उसी भविष्य की एक झलक दिखाता है.

आज पूरी दुनिया देखने आती है यह गांव
जिस गांव में कभी लोग रहते थे, वहां आज दुनिया भर से पर्यटक आते हैं. वे यहां डरने नहीं, बल्कि यह समझने आते हैं कि समय कैसे एक पूरे गांव की तस्वीर बदल देता है. यहां का हर पुतला एक इंसान की याद है. हर खाली घर एक अधूरी कहानी सुनाता है और हर सुनसान सड़क यही एहसास कराती है कि किसी भी जगह की असली पहचान उसकी इमारतें नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोग होते हैं. जब लोग चले जाते हैं, तो सबसे खूबसूरत गांव भी धीरे-धीरे सिर्फ यादों का गांव बनकर रह जाता है. शायद यही वजह है कि नागोरो को दुनिया के सबसे अनोखे और सबसे भावुक गांवों में गिना जाता है.

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