क्रिकेटर्स जितना अपने खेल के लिए चर्चा में रहते हैं उतनी ही उनकी लाइफस्टाइल की भी चर्चा होती है. पूरी दुनिया में ऐसे कई क्रिकेटर्स रहे हैं जिनकी खराब लाइफस्टाइल ने उनके करियर को बर्बाद कर दिया. वेस्ट इंडीज़ क्रिकेट के महान ‘थ्री डब्ल्यूज़’ (Three Ws) में से एक सर एवर्टन वीक्स के बेटे डेविड मरे को 1970 और 1980 के दशक का एक प्रतिभाशाली विकेटकीपर माना जाता था. उन्होंने वेस्ट इंडीज़ के लिए 19 टेस्ट मैच खेले थे. डेविड मरे ने एक बार माना था कि उन्हें लगभग 12 वर्ष की उम्र में सिगरेट पीने की आदत लग गई थी. समय के साथ यह लत मारिजुआना और फिर कोकीन तक पहुंच गई. नशे की लत ने उनके क्रिकेट करियर को गंभीर रूप से प्रभावित किया और अंततः उनकी जगह टीम में डेरिक मरे ने ले ली.
बाद में, 1982 में दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद (अपार्थाइड) दौर में एक बागी (Rebel) वेस्ट इंडीज़ टीम के साथ दौरा करने के कारण उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया, जिसे बाद में हटा भी लिया गया था. करियर समाप्त होने के बाद डेविड मरे का जीवन आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से घिर गया. विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने एक समय बारबाडोस के समुद्र तटों पर पर्यटकों को ड्रग्स बेचकर भी गुज़ारा किया. उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि नशे की लत और गलत फैसले किस तरह एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी का जीवन और करियर बर्बाद कर सकते हैं. हालांकि डेविड मरे अकेले ऐसे क्रिकेटर नहीं हुए हैं. कई खिलाड़ियों पर बैन लग चुका है क्योंकि उन्होंने कभी न कभी ड्रग्स लिया. आइए देखें इस लिस्ट में कौन-कौन से खिलाड़ियों का नाम शामिल हैं.
1-इयान बॉथम, इंग्लैंड (1986): इंग्लैंड के इस ऑलराउंडर पर घरेलू क्रिकेट बोर्ड ने 63 दिन का बैन लगाया था क्योंकि उन्होंने एक इंटरव्यू में माना था कि उन्होंने कैनबिस (गांजा) का इस्तेमाल किया था.
2- वेस्ट इंडीज़ में पाकिस्तानी खिलाड़ी, 1993: वसीम अकरम, वकार यूनिस, आकिब जावेद और मुश्ताक अहमद को ग्रेनाडा में स्थानीय पुलिस ने पकड़ा था, जिसके बाद उन्हें कुछ समय हिरासत में रहना पड़ा. बाद में उन पर लगे आरोप हटा दिए गए और दौरा जारी रहा.
3- दक्षिण अफ्रीका में न्यूज़ीलैंड के खिलाड़ी, 1994: स्टीफन फ्लेमिंग, डियोन नैश और मैथ्यू हार्ट, ये तीनों अपने करियर की शुरुआत में ही थे पर एक बारबेक्यू पार्टी में कैनबिस (गांजा) पीने के लिए बैन लगाया गया था. संयोग से, न्यूज़ीलैंड की टीम का प्रदर्शन उस दौरे पर बहुत खराब रहा था और स्थानीय बोर्ड ने इन गलतियों को गंभीरता से लिया था.
4-एड गिडिन्स, इंग्लैंड (1996): इस तेज़ गेंदबाज़ पर कई वजहों से बैन लगाया गया था, जैसे अपनी काउंटी टीम के मैच हारने पर सट्टा लगाना और गलत तरीके से गेंद फेंकने (थ्रोइंग) के कारण नो-बॉल मिलना. 1996 में, कोकीन के इस्तेमाल के लिए उन पर 18 महीने का बैन लगाया गया.
यह भी पढे़ं: संडे को करियर का आखिरी वनडे मैच खेलेंगे रोहित शर्मा? ‘अग्निपरीक्षा’ में नहीं हुए पास
5- वेस्ट इंडीज़ में दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ी, 2001: वेस्ट इंडीज़ के दौरे के दौरान मारिजुआना (गांजा) पीने के लिए हर्शल गिब्स, आंद्रे नेल, जस्टिन केम्प, पॉल एडम्स और रोजर टेलीमैकस पर जुर्माना लगाया गया और उन्हें फटकार लगाई गई.
6- शोएब अख्तर, मोहम्मद आसिफ़ भारत में 2006: चैंपियंस ट्रॉफ़ी खेलने के लिए भारत पहुंचते ही पाकिस्तान के इन दो तेज़ गेंदबाज़ों का नैंड्रोलोन टेस्ट पॉज़िटिव आया. शोएब पर दो साल और आसिफ़ पर एक साल का बैन लगाया गया. दोनों ने इसके खिलाफ़ अपील की और टेस्ट पॉज़िटिव आने के दो महीने से भी कम समय में उन्हें बरी कर दिया गया. WADA ने इस फ़ैसले को स्विट्ज़रलैंड के लॉज़ेन में ‘कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन फ़ॉर स्पोर्ट’ में चुनौती दी. बाद में कोर्ट ने मामला खारिज कर दिया.
7- शेन वॉर्न, वर्ल्ड कप, 2003: 2003 वर्ल्ड कप शुरू होने से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया के लेग स्पिनर का डायूरेटिक टेस्ट पॉज़िटिव आया. वॉर्न ने दावा किया कि उनकी मां ने उन्हें यह दवा दी थी ताकि वे वज़न कम कर सकें और कैमरे पर अच्छे दिखें. उन पर एक साल का बैन लगाया गया.
8-डर्मोट रीव, 2004: इंग्लैंड के पूर्व ऑलराउंडर को कमेंटेटर की नौकरी से हाथ धोना पड़ा, क्योंकि उन्होंने कोकीन की लत और मैच के दौरान नशे की हालत में कमेंट्री करने की बात स्वीकार की थी. रीव ने कहा कि उन्हें याद नहीं था कि उन्होंने ऑन-एयर क्या कहा था और यह जानने के लिए उन्हें टेप देखने पड़े.
9-मनिंदर सिंह, 2007: भारत के पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर को 1.5 ग्राम कोकीन रखने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
10- मोहम्मद आसिफ़, 2008: आसिफ़ को दुबई एयरपोर्ट पर 19 दिन हिरासत में रखा गया क्योंकि उनके वॉलेट में प्रतिबंधित ड्रग का एक छोटा सा अंश मिला था. आसिफ़ का ड्रग टेस्ट हुआ, जिसमें साबित हुआ कि उन्होंने ड्रग का इस्तेमाल नहीं किया था. एक स्थानीय अदालत द्वारा अपराध को ‘मामूली’ बताए जाने के बाद उस पर लगे आरोप हटा दिए गए.
यह भी पढ़ें: IND vs ENG: गंभीर ने टीम इंडिया को बनाया प्रयोगशाला! इन फैसलों के चलते दूसरे वनडे में ढेर हुए भारत के ‘शेर’