शुभांगी की जिद ने सरकारी नौकरी की लगा दी लाइन (ETV Bharat)
शहडोल: अगर किसी चीज को हासिल करने के लिए जिद कर ली जाए और ईमानदारी से मेहनत की जाए, तो फिर उसे हासिल करने से कोई पीछे नहीं कर सकता. कुछ ऐसी ही कहानी है, शुभांगी मिश्रा की है. जिन्होंने नीट एग्जाम तो पास कर लिया था, लेकिन एमबीबीएस में एडमिशन नहीं मिला, फिर भी हिम्मत नहीं हारी और जिद कर ली कि सरकारी नौकरी करनी ही है, फिर क्या था बस कुछ ही सालों में शुभांगी ने सरकारी नौकरियों की लाइन लगा दी.
गांव की लड़की का सरकारी नौकरी में कमाल
शुभांगी मिश्रा उमरिया के शाहपुर गांव की रहने वाली है, जो की शहडोल जिला मुख्यालय से कुछ ही किलोमीटर दूर है. अब इन्होंने अपनी सफलता से गांव ही नहीं बल्कि पूरे संभाग का नाम रोशन कर दिया है. महज 21 साल की उम्र में शुभांगी मिश्रा ने वह कमाल कर दिखाया है, जो बहुत कम लोग ही कर पाते हैं. यही वजह है कि उनकी सफलता के चलते शुभांगी मिश्रा की चर्चा हर जगह हो रही है. शुभांगी पुलिस महानिरीक्षक शहडोल जोन कार्यालय में पदस्थ श्याम कुमार मिश्रा और ग्रहणी सुनीता मिश्रा की बेटी हैं.
शुभांगी मिश्रा से ईटीवी भारत ने की बात (ETV Bharat)
श्याम कुमार मिश्रा हेड कांस्टेबल के पद पर पदस्थ हैं. शुभांगी ने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर शहडोल से कक्षा 12वीं की पढ़ाई की है. उसके बाद से ही तैयारी में जुट गई थी. वर्तमान में शुभांगी बताती है कि उन्होंने लगभग दो महीने के अंतराल में ही पांच सरकारी नौकरियों के लिए चुनी गई है. शुभांगी मिश्रा बताती हैं कि “वो वर्तमान में एमपी पुलिस में कांस्टेबल है. इस नौकरी में सिलेक्शन के बाद जबलपुर में ट्रेनिंग ले रही थी, तभी एक बाद एक कई नौकरियों के लिए वो चुनी जा रही थी. एसएससी स्टेनो, उप निरीक्षक (मध्य प्रदेश पुलिस ), सहायक उपनिरीक्षक (स्टेनो) और उपनिरीक्षक (सूबेदार एम) के लिए सिलेक्ट हुई है.” जिसके बाद वो अपने इस अद्भुत टैलेंट को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है.
नीट में 570 अंक, फिर सरकारी नौकरी की ज़िद
शुभांगी कहती हैं कि “जब उन्होंने शहडोल जिला मुख्यालय के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर शहडोल से 12वीं की पढ़ाई की, उसके बाद कोविड का दौर चल रहा था. एग्जाम के बाद नीट की तैयारी के लिए मुझे प्रॉपर गाइडलाइंस नहीं मिल पाया था, फिर भी मैं घर पर ही रहकर सेल्फ स्टडी से नीट की तैयारी कर रही थी. लाइब्रेरी के बारे में तब इतना आइडिया नहीं था, तब हम घर पर रहकर ही पढ़ाई करते थे. मैंने हिंदी मीडियम से पढ़ाई की थी, लेकिन पूरी तैयारी अपनी इंग्लिश मीडियम से कर रही थी.
12 वीं पास करने के बाद पहले साल ड्रॉप लिया और नीट की तैयारी करके पेपर दिया तो उसमें मेरे 400 मार्क्स आए थे. उसके बाद फिर से मैंने एक साल और ड्रॉप लिया, हालांकि इस साल मैं प्राइवेट कॉलेज से ग्रेजुएशन के लिए अप्लाई कर दिया था. फिर नीट में दूसरे अटेम्पट में मेरे 570 मार्क्स आए थे, लेकिन मेरा सिलेक्शन MBBS में नहीं हो पाया था. इसी साल मैंने एमपी पुलिस कांस्टेबल 2023 का एग्जाम भी दिया था. 2 महीने ही तैयारी की थी और उसमें अच्छे नंबर आये थे. उस पेपर में महज एक दो नंबर से चूक गई थी, लेकिन मेरे लिए एक उम्मीद जाग गई थी और नया रास्ता बन चुका था.
फिर यहीं से मैंने नीट की तैयारी छोड़ दी और पुलिस की तैयारी में जुट गई. मैंने हर दिन 8 से 10 घंटे पढ़ाई शुरू कर दी. जब मैंने पहला एग्जाम निकाला, तो मेरा कॉन्फिडेंस और बढ़ गया, मुझे पहले ही भरोसा था कि मेरे सारे एग्जाम निकलेंगे, क्योंकि मेरे सारे पेपर बहुत अच्छे गए थे.
सिविल सर्विसेज में जाने का सपना
वह बताती हैं कि अभी भी वो अपनी तैयारी में लगी हुई है. पढ़ाई 8 से 10 घंटे हर दिन जारी है, क्योंकि उन्हें सिविल सर्विसेज में जाना है. बचपन से ही ये उसका सपना है. जिसे हासिल करने वो दिन रात पसीना बहा रही है.
शुभांगी पुलिस कांस्टेबल के लिए सिलेक्ट (ETV Bharat)
हार्ड वर्क सफलता का मूल मंत्र
शुभांगी गांव से बिलॉन्ग करती हैं, और गांव की लड़की के लिए इतनी तैयारी करना कितना टफ होता है, इसे लेकर वो कहती हैं कि हार्ड वर्क और लक्ष्य को हासिल करने लगातार मेहनत करते रहना किसी भी सफलता का मूल मंत्र है. वह कहती है कि जब आप किसी क्षेत्र के लिए मेहनत करो और वो हासिल न हो तो निराशा तो होती है. कई बार लगता है कि शायद हम नहीं कर सकते हैं, लेकिन मेरे अंदर ये कॉन्फिडेंस तो था, कि मैं किसी भी एग्जाम की तैयारी करूंगी तो मुझे अपना पूरा अपना टाइम देना है, तो मैं किसी भी एग्जाम को निकाल सकती हूं. गांव का बैकग्राउंड था तो शुरू में पढ़ाई इतनी अच्छी नहीं हो पा रही थी, लेकिन लगातार हार्ड वर्क से सफलता हासिल की जा सकती है.
शुभांगी मिश्रा (ETV Bharat)
मेरी सफलता में मेरे मम्मी पापा का बहुत बड़ा योगदान है. मेरी बहन मम्मी पापा सबका बहुत बड़ा योगदान है, क्योंकि तैयारी के हर मोड़ में उनकी सलाह, मदद, मोटिवेशन बहुत काम आया. जो लड़कियां किसी भी क्षेत्र में तैयारी कर रही हैं, मैं उन लड़कियों को यही कहूंगी कि आप भी मेहनत करते रहिए खुद पर भरोसा रखिए. आप सब कुछ कर सकते हैं, अपने चारों तरफ एक सकारात्मक माहौल बनाए रखें, कोशिश करते रहिए सफलता जरूर मिलेगी.”
बेटियां मेरा गर्व, सोशल मीडिया से बनाई दूरी
शुभांगी मिश्रा आज हर उन लड़कियों के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में किसी बड़े एग्जाम की तैयारी कर रही हैं. उनके पिता श्याम मिश्रा कहते हैं “शुभांगी बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहती थी, वह काफी मेहनती है और अनुशासन उसकी सबसे बड़ी ताकत है. शुभांगी सोशल मीडिया से दूर रहती है. सोशल मीडिया में उसने किसी तरह के कोई अकाउंट ही नहीं बनाए.
परिवार के साथ शुभांगी की तस्वीर (ETV Bharat)
वह सिर्फ मोबाइल फोन का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करती थी और यही उसके सक्सेस का राज भी है. श्याम मिश्रा कहते हैं कि उनकी दो बेटियां हैं और आज उन्हें अपने दोनों बेटियों पर गर्व है. उनकी दूसरी बेटी भी जिसका नाम मोहिनी मिश्रा है, अभी वो फॉरेंसिक साइंस से स्नातक की पढ़ाई कर रही है.”