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नौकरी से निकाला गया हो, सैलरी नहीं मिली हो या कंपनी के साथ किसी तरह का श्रम विवाद हो, तो अब इसके लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का समाधान पोर्टल कर्मचारियों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने, उसका स्टेटस ट्रैक करने और पूरे मामले की प्रगति देखने की सुविधा देता है. शिकायत सीधे संबंधित श्रम अधिकारी तक पहुंचती है और जरूरत पड़ने पर मामला श्रम अदालत तक भी जाता है.
यह पोर्टल संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए उपयोगी है.
नई दिल्ली. कई बार कर्मचारियों को बिना कारण नौकरी से निकाल दिया जाता है, महीनों तक वेतन नहीं मिलता या दूसरी श्रम संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. पहले ऐसी शिकायतों के लिए श्रम विभाग के दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे. अब यह काम ऑनलाइन हो सकता है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का समाधान पोर्टल कर्मचारियों को घर बैठे शिकायत दर्ज करने और उसकी पूरी प्रगति देखने की सुविधा देता है. इस पोर्टल का पूरा नाम सिस्टम फॉर एमिकेबल सेटलमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स (System for Amicable Settlement of Industrial Disputes) है. इसका उद्देश्य कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच होने वाले औद्योगिक विवादों का समाधान तेज, पारदर्शी और डिजिटल तरीके से करना है.
यह पोर्टल संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए उपयोगी है. निजी कंपनियों के कर्मचारी, फैक्टरी वर्कर, ठेका मजदूर और दूसरे औद्योगिक संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि यह मुख्य रूप से उन संस्थानों के मामलों के लिए है जो केंद्रीय श्रम आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. इनमें रेलवे, बैंक, खदान, हवाई अड्डे, तेल क्षेत्र, बड़े बंदरगाह और केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम शामिल हैं.
शिकायत के बाद क्या होता है
शिकायत दर्ज होने के बाद मामला संबंधित सहायक श्रम आयुक्त के पास ऑनलाइन पहुंच जाता है. इसके बाद श्रम विभाग कर्मचारी और कंपनी दोनों को नोटिस भेजता है और आपसी बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की जाती है. अगर दोनों पक्षों के बीच समझौता नहीं हो पाता, तो सुलह अधिकारी फेल्योर रिपोर्ट तैयार करता है. इसके बाद मामला औद्योगिक न्यायाधिकरण या श्रम अदालत को भेजा जा सकता है. इस पूरी प्रक्रिया का स्टेटस पोर्टल पर देखा जा सकता है.
पुराने सिस्टम से क्या बदला
पहले शिकायत देने, सुनवाई की तारीख जानने और फाइल की स्थिति पता करने के लिए कर्मचारियों को बार बार दफ्तर जाना पड़ता था. अब आवेदन से लेकर सुनवाई और केस की प्रगति तक की जानकारी ऑनलाइन डैशबोर्ड पर मिल जाती है. डिजिटल ट्रैकिंग होने से मामलों की निगरानी आसान हुई है और अधिकारियों पर समय पर कार्रवाई का दबाव भी बढ़ा है.
ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज करें
- सबसे पहले समाधान पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और नया यूजर रजिस्ट्रेशन करें.
- नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और पहचान संबंधी जानकारी भरने के बाद ओटीपी से अकाउंट सत्यापित करें.
- लॉगिन करने के बाद नई शिकायत का विकल्प चुनें और यह बताएं कि मामला किस प्रकार का है. उदाहरण के लिए वेतन न मिलना, अवैध बर्खास्तगी, न्यूनतम मजदूरी या मातृत्व लाभ से जुड़ा विवाद.
- इसके बाद अपनी जानकारी जैसे पद, नौकरी की अवधि, आखिरी सैलरी और कंपनी का नाम, पता तथा उपलब्ध संपर्क विवरण भरें.
कौन से दस्तावेज जरूरी हैं
शिकायत को मजबूत बनाने के लिए अपॉइंटमेंट लेटर, कर्मचारी पहचान पत्र, बैंक स्टेटमेंट, वेतन से जुड़े दस्तावेज, बर्खास्तगी पत्र या संबंधित ईमेल जैसी फाइलें अपलोड की जा सकती हैं. फॉर्म जमा करने के बाद एक यूनिक रेफरेंस नंबर मिलता है. इसी नंबर की मदद से कर्मचारी बाद में अपनी शिकायत की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकता है.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…
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