नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल ने देश को कई ऐसे कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अभिनय और रंगमंच की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई. इन्हीं नामों में एक नाम अभिनेता निर्मल पांडे का है. रामलीला के मंच से अभिनय की शुरुआत करने वाले निर्मल पांडे ने रंगमंच से लेकर बॉलीवुड और अंतरराष्ट्रीय थिएटर तक का सफर तय किया. उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि अगर जुनून मजबूत हो तो सुरक्षित करियर छोड़कर भी अपने सपनों की राह चुनी जा सकती है.
निर्मल पांडे के भाई मिथलेश पांडे के अनुसार, निर्मल का बचपन नैनीताल में बीता और बचपन से ही उनका झुकाव अभिनय की ओर था. सीआरएसटी इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे रामलीला और नाटकों में हिस्सा लिया करते थे. करीब वर्ष 1975 के आसपास उन्होंने नाट्य गतिविधियों से गंभीर रूप से जुड़ना शुरू किया और ऑल इंडिया ड्रामा कॉम्पिटिशन में भी भाग लिया. इसके बाद डीएसबी परिसर में उन्होंने कई नाटकों में अभिनय किया और नैनीताल की रंगमंच संस्था युगमंच से जुड़ गए. युगमंच के साथ काम करते हुए उनके अभिनय को नई दिशा मिली. रंगमंच के इसी सफर ने उन्हें दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) तक पहुंचाया, जहां उन्होंने अभिनय का प्रशिक्षण लिया.
सरकारी नौकरी छोड़ी, अभिनय को बनाया जुनून
अभिनय में करियर बनाने का सपना निर्मल पांडे के मन में पहले से था, लेकिन परिवार और करियर की जरूरतों के चलते उन्होंने पढ़ाई के बाद भीमताल के ब्लॉक कार्यालय में क्लर्क की सरकारी नौकरी भी की. हालांकि, नौकरी में उनका मन नहीं लगा. अभिनय के प्रति उनका जुनून इतना मजबूत था कि उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर रंगमंच और फिल्मों की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने लगातार थिएटर में काम किया। बताया जाता है कि अपने करियर में उन्होंने करीब 125 नाटकों में अभिनय किया. आगे चलकर वे लंदन की तारा आर्ट्स से भी जुड़े और करीब 40 देशों में अपने अभिनय के जरिए दर्शकों तक पहुंचे. थिएटर ने उनके अभिनय को इतना व्यापक बनाया कि वे किसी एक तरह के किरदार में बंधकर नहीं रहे.
‘बैंडिट क्वीन’ ने बदल दी जिंदगी
निर्मल पांडे के फिल्मी करियर का बड़ा मोड़ वर्ष 1996 में आया, जब निर्देशक शेखर कपूर की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में उन्हें फूलन देवी के पति विक्रम मल्लाह की भूमिका मिली. इस फिल्म में उनके अभिनय ने दर्शकों और फिल्म जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा. इसके बाद उन्होंने ‘दायरा’, ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’, ‘इस रात की सुबह नहीं’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘शिकारी’, ‘हद कर दी आपने’ और कई अन्य फिल्मों में काम किया. टीवी पर भी उनके अभिनय की अलग पहचान बनी और ‘हातिम’ जैसे धारावाहिक में उनके नकारात्मक किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया.
‘बेस्ट एक्ट्रेस’ अवॉर्ड से चौंक गई दुनिया
निर्मल पांडे के करियर की सबसे अनोखी उपलब्धियों में अमोल पालेकर की फिल्म ‘दायरा’ शामिल है. फिल्म में उन्होंने एक किन्नर का किरदार निभाया था. इस भूमिका के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला. खास बात यह थी कि वे पुरुष अभिनेता होते हुए महिला अभिनय श्रेणी में सम्मान पाने वाले दुर्लभ कलाकारों में शामिल हुए. इसी फिल्म में उनकी सह-कलाकार सोनाली कुलकर्णी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला.
अभिनय के साथ संगीत में भी पहचान
मिथिलेश बताते हैं कि निर्मल पांडे सिर्फ अभिनेता ही नहीं बल्कि अच्छे गायक भी थे. उन्हें लोकगीतों और खासतौर पर ‘हीर’ के गीत गाने का शौक था. वर्ष 2002 में उन्होंने ‘जज्बा’ नाम से एक म्यूजिक एल्बम भी जारी किया, जिसे संगीत प्रेमियों ने पसंद किया. महज 47 वर्ष की उम्र में 18 फरवरी 2010 को मुंबई में हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया. उनका अचानक चले जाना फिल्म और रंगमंच जगत के लिए बड़ी क्षति थी.
रिपर्टरी बनाना था सपना
मिथिलेश पाण्डे बताते हैं कि निर्मल पांडे का सपना पहाड़ में एक रिपर्टरी बनने का था, ताकि स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिल सके, उनका पहाड़ और नैनीताल के प्रति काफी लगाव भी था, मिथिलेश बताते हैं कि निर्मल हर बार पहाड़ के कलाकारों का जिक्र करते थे. और जब भी नैनीताल आते तो स्थानीय कलाकारों से मिलते थे. उन्होंने रैपेट्री बनाने के लिए बकायदा रानीखेत के पास चिलियानौला में जमीन भी देख ली थी, लेकिन कुछ ही समय बाद उनका निधन हो गया. और निर्मल पांडे का ये सपना अधूरा रह गया.
आज नैनीताल के रंगमंच की चर्चा होती है तो निर्मल पांडे का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है. रामलीला के छोटे से मंच से शुरू हुआ उनका सफर NSD, अंतरराष्ट्रीय थिएटर और बॉलीवुड तक पहुंचा. उन्होंने साबित किया कि एक कलाकार की असली पहचान उसके किरदारों की गहराई और कला के प्रति समर्पण से होती है. नैनीताल का यह सितारा भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन ‘बैंडिट क्वीन’ और ‘दायरा’ जैसी फिल्मों में उनका अभिनय आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा.