बसपा मुखिया मायावती युवाओं को साधने में जुटीं, ‘हर हाथ को काम’ के बहाने 2027 का सियासी दांव


डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बेहद गंभीर हो चुकी बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती हर वर्ग को साधने के प्रयास में हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट पर सिमटी बसपा को मायावती इस बार बूस्टर डोज देने की तैयारी में हैं। सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव मायावती ने अब युवाओं को साधने का उपक्रम प्रारंभ किया है।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 विधान सभा चुनाव की तैयारियों के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने अब बेरोजगार और शिक्षित युवाओं को अपने राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में लाने की कोशिश की है। जंतर-मंतर आंदोलन का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्र व राज्य सरकारों से सरकारी विभागों में खाली लाखों पदों पर तत्काल, समयबद्ध और पेपर लीक व भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती शुरू करने की मांग की है।

बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को एक्स पर जारी पोस्ट के माध्यम से सरकारी नौकरियों के खाली पद भरने को केवल रोजगार का मुद्दा नहीं बताया, बल्कि सामाजिक न्याय से भी जोड़ दिया। कहा कि भर्तियों में एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण का लाभ मिलने से इन वर्गों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है। इसके सहारे मायावती ने युवाओं के मुद्दे को अपने पारंपरिक दलित आधार से जोड़ने की कोशिश की है।

उन्होंने लिखा कि जैसाकि सर्वविदित है कि बीएसपी ने यूपी में अपनी सरकार के दौरान पुलिस व पंचायती राज विभाग में लगभग सवा दो लाख नये सरकारी पद सृजित करके तथा नौकरियों की भर्ती पर लगी रोक को भी हटाकर सर्वसमाज के कई लाख लोगों की सरकारी नौकरियों में बहाली की।

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उसके बाद सरकार में ना रहने पर काफी लम्बे समय से देश में व खासकर यूपी, उत्तराखंड व पंजाब अदि राज्यों में व्याप्त जबरदस्त महंगाई, अति-गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, बदतर स्वास्थ्य व्यवस्था, पिछड़ापन एवं उनके मजबूरी के पलायन, महिला असुरक्षा, पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि से त्रस्त लोगों के दुखी जीवन जैसे ज्वलंत मुद्दों एवं गंभीर समस्याओं के निदान के लिए केन्द्र व राज्य सरकारों से प्रभावी कदम उठाने की मांग बार-बार करती रही है। इसके बाद भी सभी सरकारें, पूर्व की कांग्रेसी सरकारों की तरह ही अधिकतर मामलों में उदासीन व लापरवाह ही बनी हुई हैं, जो देश के बिगड़ते हुये राजनीतिक, आर्थिक, संसदीय व सामाजिक हालात के मद्देनज़र अति-दुखद एवं अत्यन्त चिन्तनीय।

मायावती ने भी की कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा

बसपा प्रमुख ने लिखा कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नाम से विशेषकर बेरोजगारी व अंधकार भविष्य आदि से पीड़ित व आहत शिक्षित युवा-युवतियों ने खासकर दिल्ली में जंतर मंतर के 36 दिन तक चले अपने बहु-चर्चित आंदोलन के जरिये इन ज्वलंत मुद्दों को वास्तव में राष्ट्रीय महत्व का विशेष व गंभीर चर्चा का मुद्दा बना दिया।
जिसको लेकर देश के शिक्षा मंत्री को भी अपनी कुर्सी गवानी पड़ी है। केंद्र व राज्य सरकारों को देश के करीब सवा सौ करोड़ गरीबों, श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं व अन्य मेहनतकश लोगों तथा खासकर बेरोजगारी की मार से पीड़ित लाखों परिवारों की वास्तविक चिन्ता, सब कुछ भुलाकर, तत्काल शुरू कर देनी चाहिये।

सरकारी नौकरियों पर खास ध्यान देने की जरूरत

मायावती ने कहा, अन्य बातों के अलावा, सरकारी नौकरियों पर खास ध्यान देने की जरूरत है। राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में बेचना बंद करके तथा सभी सरकारी विभागों में रिक्त पड़े लाखों पदों पर पेपरलीक व भ्रष्टाचार-मुक्त समयबद्ध भर्तियां तत्काल प्रारंभ करके समस्या के फौरन निदान के प्रति गंभीर प्रयास शुरू कर दें तो यह उचित होगा।

लाखों परिवारों का सीधे तौर पर भला

बसपा प्रमुख ने कहा कि एक परिवार में अगर एक को भी सरकारी नौकरी मिल गयी तो लाखों परिवारों का सीधे तौर पर भला होगा। इसके साथ ही इससे एससी, एसटी व ओबीसी समाज को भी वह सुरक्षा मिल पायेगी जो आरक्षण के काफी हद तक निष्प्रभावी व निष्क्रिय बना दिये जाने के कारण, संविधान प्रदत्त आत्म-सम्मान की जिंदगी जीने के बजाय, गरीबी व लाचारी का त्रस्त जीवन जीने को ही मजबूर हैं।

लाख दुखों की एक दवा

उन्होंने कहा कि सभी सरकारों को हर हाल में मुनाफाखोरी/लाभ कमाने वाली व्यापारिक सोच/प्रवृति को त्याग कर संविधान की सही मानवतावादी व कल्याणकारी नीति एवं सिद्धान्त को पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अमल करके आगे बढ़ाना होगा। जो ’हर हाथ को काम’ देने वाली व्यापक देश व जनहित में लाख दुखों की एक दवा है, यही सभी सरकारों से अपील है।

संसद का लगातार गतिरोध खत्म करना जरूरी

मायावती ने कहा कि इसके साथ ही, जंतर मंतर में आंदोलन करने वाले छात्र-छात्राओं व बेरोजगार युवाओं आदि के मुद्दों को लेकर संसद के वर्तमान सत्र में अब तक लगातार जारी गतिरोध को भी समाप्त किया जाना जरूरी है। ऐसा होने से बिना समुचित बहस/चर्चा के सरकारी विधेयकों को पारित होकर कानून बनने की प्रक्रिया पर विराम लगेगा।

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