‘पूरे MBBS की फीस ₹27000 थी, विदेश गया तो…’, मेडिकल स्टूडेंट्स को डॉक्टर ने समझाई सरकारी सीट की कीमत – mbbs fees in govt college medical doctor explains value of a government seat to medical students who become a radiologist with 27000 ug fees


Govt MBBS Fees: ‘सरकारी मेडिकल कॉलेज की एक सीट की कीमत एक प्राइमरी स्कूल है।’ यह कहना है रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हर्ष व्यास का। उनका कहना है कि सरकार जितना खर्च एक गवर्नमेंट कॉलेज की मेडिकल सीट पर करती है, इतने में एक प्राइमरी स्कूल खोला जा सकता है। इसलिए एमबीबीएससी में आने वाले नए स्टूडेंट्स या जो सरकारी सीट से डॉक्टर बन गए उन्हें उस सीट की कीमत समझनी चाहिए।

MBBS Admission
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हर्ष व्यास ने सरकारी एमबीबीएस सीट की कीमत समझाई है। (फोटो सोर्स- Insta/runningradiologist और Pexels)
MBBS Fees | Govt College Medical Fees: अंडग्रुएड मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए लाखों छात्र 10वीं-12वीं क्लास से एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करते हैं। काफी टफ कॉम्पिटिशन के बाद टॉप रैंक लाने वालों की हो सरकारी कॉलेजों से MBBS-BDS जैसे मेडिकल कोर्स करने का मौका मिलता है ताकि पढ़ाई पर होने वाला लाखों का खर्चा बचाया जा सके। ऐसे में एक मेडिकल सीट की फीस कीमत समझनी भी जरूरी है। एक डॉक्टर ने सरकारी मेडिकल सीट की कीमत समझाने की कोशिश की है।

MBBS 4.5 साल की फीस 27000 रुपये थी

दरअसल, रेडिलॉजिस्ट डॉ. हर्ष व्यास ने अपने इंस्टाग्राम पर सरकारी सीट की कीमत समझाते हुए बताया कि उन्होंने 4.5 साल की एमबीबीएस की पढ़ाई सिर्फ 27000 रुपये में पूरी कर ली है। उनकी एक साल एमबीबीएस फीस 6000 रुपये थी। डॉ. हर्ष व्यास ने स्टेट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम गुजरात CET में 99.9 पर्सेंटाइल हासिल किए थे। एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप के दौरान 1 लाख 32 हजार रुपये मिल गए।

सरकारी एमबीबीएस कॉलेज की फीस कितनी है?

अगर 2025-26 की बात की जाए तो AIIMS, MAMC, JIMPER, UCMS जैसे संस्थानों में 4.5 साल के एमबीबीएस की पूरी फीस 30,000 रुपये से 6 लाख रुपये तक है। यह फीस सरकारी मेडिकल कॉलेज, राज्य और यूनिवर्सिटीज के नियमों के अनुसार अलग-अलग होती है। सबसे कम एमबीबीएस फीस वाले 5 कॉलेजों की लिस्ट यहां देख सकते हैं-

काॅलेज MBBS फीस (4.5 साल) MBBS (1 साल का कुल खर्चा अनुमानित)
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) नई दिल्ली लगभग 10,000 से 15,000 रुपये लगभग 25,000 से 45,000 रुपये (हॉस्टल व अन्य शुल्क सहित)
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) नई दिल्ली लगभग 15,000 से 25,000 रुपये लगभग 30,000 से 60,000 रुपये (संस्थान शुल्क, हॉस्टल आदि सहित)
जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER) पुडुचेरी लगभग 40,000 से 50,000 रुपये लगभग 50,000 से 80,000 रुपये (अन्य शुल्क व हॉस्टल सहित)
यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (UCMS) दिल्ली लगभग 60,000 से 80,000 रुपये लगभग 70,000 से 1 लाख रुपये (अन्य शुल्क व हॉस्टल सहित)
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) जोधपुर लगभग 10,000 से 15,000 रुपये लगभग 25,000 से 50,000 रुपये (हॉस्टल व संस्थागत शुल्क सहित)
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) भोपाल लगभग 10,000 से 15,000 रुपये लगभग 25,000 से 50,000 रुपये (हॉस्टल व अन्य शुल्क सहित)

पीजी की फीस ₹1 लाख, स्टाइपेंड 27-28 लाख रुपये मिला

डॉ. हर्ष बताते हैं कि 27000 रुपये में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने एक लाख रुपये में पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई कर ली थी। लेकिन तीन साल में 27 से 28 लाख रुपये स्टाइपेंड मिला। तब जाकर रेडियोलॉजिस्ट बन पाए। उन्होंने कहा कि यह सब हो पाया क्योंकि सरकारी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की है।

सरकारी मेडिकल सीट की कीमत एक प्राइमरी स्कूल है

डॉ. हर्ष का मानना है कि सरकार की वजह से कम पैसों में डॉक्टर बन पाते हैं, जोकि एक प्राइमरी स्कूल बनने के बराबर है। उन्होंने कहा, ‘एमबीबीएस से रेडियोलॉजिस्ट तक की जर्नी में सरकार ने कम से कम 50 से 60 लाख रुपये मेरे ऊपर खर्च किया है। तब जाकर इतने कम पैसे में मैं गवर्नमेंट कॉलेज से पढ़ पाया हूं। हां, मैं अच्छी रैंक लाया हूं फिर भी सरकारी की वजह से मैं इतने कम पैसों में रेडियोलॉजिस्ट तक पहुंच पाया। ऊपर से इतने सारे पैसे (इंटर्नशिप और स्टाइपेंड के दौरान कुल 28 से 29 लाख रुपये) मिले।’
उनका कहना, ‘मैं और मेरे जैसे कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेज से इतने कम पैसों में पढ़ पाए क्योंकि सरकार ने 50 से 60 लाख रुपये खर्च किए हैं। इतने में एक प्राइमरी स्कूल बन जाता। मैं या मेरे जैसे पढ़ पाए तो एक स्कूल नहीं बना है।’ नए मेडिकल स्टूडेंट्स को सरकारी सीट की कीमत समझाते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग एमबीबीएस में आना चाहते हैं, गवर्नमेंट कॉलेज से पढ़ना चाहते हैं, जो लोग एमबीबीएस या पीजी में पढ़ रहे हैं और जो सरकारी सीट पाकर डॉक्टर बन गए हैं, उन्हें यह चीज याद रखनी चाहिए कि सरकार ने आपके लिए क्या कुछ किया है।’ हालांकि, डॉ. हर्ष यह भी कहते हैं कि भले ही सरकार कोई भी हो बीजेपी की या कांग्रेस की, लेकिन सरकारी सीट पर उठाए जाने वाले खर्च की कीमत समझनी जरूरी है। इसलिए सरकार के खिलाफ बोलने के साथ कुछ तारीफ भी बनती है।

अमेरिका से की भारत के मेडिकल खर्च से तुलना

विदेश में मेडिकल की पढ़ाई पर होने वाले खर्च की तुलना भारत से भी की है। उन्होने बताया कि अमेरिका में डॉक्टरी की पढ़ाई इतनी महंगी है कि अच्छी सैलरी होने के बावजूद कई साल तक लोन चुकाते हैं। डॉ. हर्ष ने कहा, ‘मैं US जाकर आया हूं। वहां मेडिकल की फीस इतनी ज्यादा होती है कि अच्छा सैलरी होने पर भी कम से कम तीन से चार साल लोग चुकाने में लग जाते हैं। बता दें कि अमेरिका में भारत की तरह एमबीबीएस नहीं होता है। वहां डॉक्टर के लिए डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) या डॉक्टर ऑफ ऑस्टियोपैथिक मेडिसिन (DO) होता है।

अमन कुमार

लेखक के बारे मेंअमन कुमारअमन कुमार, डिजिटल में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रॉड्यूसर पद पर हैं। शिक्षा और रोजगार जगत की खबरों के अनुभवी लेखक अमन को न्यूज वर्ल्ड में करीब 10 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है। वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। साल 2015 में साधना न्यूज चैनल से अपने करियर की शुरुआत करते हुए टीवी चैनल आउटपुट डेस्क और ‘मानव को शांति कहां’ मासिक पत्रिका से लेखन शैली को समझा। इसके बाद लाइव न्यूज हिंदी (लाइव इंडिया), जनसत्ता.कॉम, आजतक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहकर ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे। कई साल के अनुभव से अमन पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं। अमन रिपोर्ट्स बेस्ड, सटीक और विश्वसनीय जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। उनकी प्राथमिकता यूजर्स तक सही जानकारी को सरल शब्दों में समझाना रही है।

अमन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों जैसे स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षा, प्रवेश परीक्षा, सरकारी नौकरी, सरकारी रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स एंड ऑप्शंस, करेंट अफेयर्स, जनरल नॉलेज, सक्सेस स्टोरीज समेत कई टॉपिक्स पर गहरी सोच और समझ के साथ व्यापक कवरेज करते हैं। टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स, करियर काउंसलर की सलाह और टिप्स के जरिए स्कूल की खबरों से लेकर IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT, CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। इसके अलावा एसससी, यूपीएससी, बैंक, पुलिस समेत भारत और राज्य स्तर की सरकारी नौकरियों के बारे में विस्तार और गहराई से लिखते हैं।

गवर्नमेंट जॉब, प्राइवेट जॉब, स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक की फील्ड में काम करते हुए अमन ने भारत के प्रमुख शिक्षा बोर्ड CBSE के एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज, दिल्ली यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एडमिशन्स प्रोफेसर हनीत गांधी और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का खास इंटरव्यू कर स्टूडेंट्स के लिए क्वालिटी कंटेंट वाले ऑथेंटिक आर्टिकल्स लिखे हैं। इसके अलावा ABVP और NSUI जैसे छात्र संगठनों के प्रवक्ताओं का इंटरव्यू लिया है। सीबीएसई, रीट, नीट, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले टॉपर्स से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार करते रहे हैं। ताकि उनके टिप्स और सलाह से बाकी युवाओं के करियर को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।

दिल्ली में जन्मे अमन कुमार की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में B.A. ऑनर्स की डिग्री हासिल की। फिर डीयू के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उसके बाद गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। ये डिग्रियां अमन को हिंदी पत्रकारिता की वो एक्सपर्टीज देती हैं जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल (5 Ws+1H) यानी क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के पैमानों के आधार पर न्यूज राइटिंग के लिए जरूरी हैं… और पढ़ें