Govt MBBS Fees: ‘सरकारी मेडिकल कॉलेज की एक सीट की कीमत एक प्राइमरी स्कूल है।’ यह कहना है रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हर्ष व्यास का। उनका कहना है कि सरकार जितना खर्च एक गवर्नमेंट कॉलेज की मेडिकल सीट पर करती है, इतने में एक प्राइमरी स्कूल खोला जा सकता है। इसलिए एमबीबीएससी में आने वाले नए स्टूडेंट्स या जो सरकारी सीट से डॉक्टर बन गए उन्हें उस सीट की कीमत समझनी चाहिए।

MBBS 4.5 साल की फीस 27000 रुपये थी
दरअसल, रेडिलॉजिस्ट डॉ. हर्ष व्यास ने अपने इंस्टाग्राम पर सरकारी सीट की कीमत समझाते हुए बताया कि उन्होंने 4.5 साल की एमबीबीएस की पढ़ाई सिर्फ 27000 रुपये में पूरी कर ली है। उनकी एक साल एमबीबीएस फीस 6000 रुपये थी। डॉ. हर्ष व्यास ने स्टेट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम गुजरात CET में 99.9 पर्सेंटाइल हासिल किए थे। एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप के दौरान 1 लाख 32 हजार रुपये मिल गए।
सरकारी एमबीबीएस कॉलेज की फीस कितनी है?
अगर 2025-26 की बात की जाए तो AIIMS, MAMC, JIMPER, UCMS जैसे संस्थानों में 4.5 साल के एमबीबीएस की पूरी फीस 30,000 रुपये से 6 लाख रुपये तक है। यह फीस सरकारी मेडिकल कॉलेज, राज्य और यूनिवर्सिटीज के नियमों के अनुसार अलग-अलग होती है। सबसे कम एमबीबीएस फीस वाले 5 कॉलेजों की लिस्ट यहां देख सकते हैं-
| काॅलेज | MBBS फीस (4.5 साल) | MBBS (1 साल का कुल खर्चा अनुमानित) |
| ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) नई दिल्ली | लगभग 10,000 से 15,000 रुपये | लगभग 25,000 से 45,000 रुपये (हॉस्टल व अन्य शुल्क सहित) |
| मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) नई दिल्ली | लगभग 15,000 से 25,000 रुपये | लगभग 30,000 से 60,000 रुपये (संस्थान शुल्क, हॉस्टल आदि सहित) |
| जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER) पुडुचेरी | लगभग 40,000 से 50,000 रुपये | लगभग 50,000 से 80,000 रुपये (अन्य शुल्क व हॉस्टल सहित) |
| यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (UCMS) दिल्ली | लगभग 60,000 से 80,000 रुपये | लगभग 70,000 से 1 लाख रुपये (अन्य शुल्क व हॉस्टल सहित) |
| ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) जोधपुर | लगभग 10,000 से 15,000 रुपये | लगभग 25,000 से 50,000 रुपये (हॉस्टल व संस्थागत शुल्क सहित) |
| ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) भोपाल | लगभग 10,000 से 15,000 रुपये | लगभग 25,000 से 50,000 रुपये (हॉस्टल व अन्य शुल्क सहित) |
पीजी की फीस ₹1 लाख, स्टाइपेंड 27-28 लाख रुपये मिला
डॉ. हर्ष बताते हैं कि 27000 रुपये में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने एक लाख रुपये में पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई कर ली थी। लेकिन तीन साल में 27 से 28 लाख रुपये स्टाइपेंड मिला। तब जाकर रेडियोलॉजिस्ट बन पाए। उन्होंने कहा कि यह सब हो पाया क्योंकि सरकारी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की है।
सरकारी मेडिकल सीट की कीमत एक प्राइमरी स्कूल है
डॉ. हर्ष का मानना है कि सरकार की वजह से कम पैसों में डॉक्टर बन पाते हैं, जोकि एक प्राइमरी स्कूल बनने के बराबर है। उन्होंने कहा, ‘एमबीबीएस से रेडियोलॉजिस्ट तक की जर्नी में सरकार ने कम से कम 50 से 60 लाख रुपये मेरे ऊपर खर्च किया है। तब जाकर इतने कम पैसे में मैं गवर्नमेंट कॉलेज से पढ़ पाया हूं। हां, मैं अच्छी रैंक लाया हूं फिर भी सरकारी की वजह से मैं इतने कम पैसों में रेडियोलॉजिस्ट तक पहुंच पाया। ऊपर से इतने सारे पैसे (इंटर्नशिप और स्टाइपेंड के दौरान कुल 28 से 29 लाख रुपये) मिले।’
उनका कहना, ‘मैं और मेरे जैसे कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेज से इतने कम पैसों में पढ़ पाए क्योंकि सरकार ने 50 से 60 लाख रुपये खर्च किए हैं। इतने में एक प्राइमरी स्कूल बन जाता। मैं या मेरे जैसे पढ़ पाए तो एक स्कूल नहीं बना है।’ नए मेडिकल स्टूडेंट्स को सरकारी सीट की कीमत समझाते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग एमबीबीएस में आना चाहते हैं, गवर्नमेंट कॉलेज से पढ़ना चाहते हैं, जो लोग एमबीबीएस या पीजी में पढ़ रहे हैं और जो सरकारी सीट पाकर डॉक्टर बन गए हैं, उन्हें यह चीज याद रखनी चाहिए कि सरकार ने आपके लिए क्या कुछ किया है।’ हालांकि, डॉ. हर्ष यह भी कहते हैं कि भले ही सरकार कोई भी हो बीजेपी की या कांग्रेस की, लेकिन सरकारी सीट पर उठाए जाने वाले खर्च की कीमत समझनी जरूरी है। इसलिए सरकार के खिलाफ बोलने के साथ कुछ तारीफ भी बनती है।
अमेरिका से की भारत के मेडिकल खर्च से तुलना
विदेश में मेडिकल की पढ़ाई पर होने वाले खर्च की तुलना भारत से भी की है। उन्होने बताया कि अमेरिका में डॉक्टरी की पढ़ाई इतनी महंगी है कि अच्छी सैलरी होने के बावजूद कई साल तक लोन चुकाते हैं। डॉ. हर्ष ने कहा, ‘मैं US जाकर आया हूं। वहां मेडिकल की फीस इतनी ज्यादा होती है कि अच्छा सैलरी होने पर भी कम से कम तीन से चार साल लोग चुकाने में लग जाते हैं। बता दें कि अमेरिका में भारत की तरह एमबीबीएस नहीं होता है। वहां डॉक्टर के लिए डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) या डॉक्टर ऑफ ऑस्टियोपैथिक मेडिसिन (DO) होता है।
