एनसीपी अजित पवार गुट में नया विवाद शुरू हो गया है। सच्चिदानंद सिंह द्वारा लीगल नोटिस भेजने के बाद वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के बयान ने पार्टी के अंदरूनी विवाद को सार्वजनिक कर दिया है। मंगलवार को पटेल ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद पार्टी में एक बड़ी जगह खाली हो गई है, उसे भरना आसान काम नहीं है।

हालांकि राष्ट्रीय अध्यक्ष पद चुनाव को लेकर लीगल नोटिस पर पटेल ने कहा कि इसका ज्यादा महत्व नहीं है। अध्यक्ष का चयन पार्टी के संविधान के अनुसार हुआ है। वहीं राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पहले केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजे पत्र में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नाम न होने के बाद उठा विवाद और अब राष्ट्रीय अध्यक्ष पद चुनाव प्रक्रिया पर पार्टी के अंदर सवाल उठना अच्छे संकेत नहीं हैं। इससे उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
नोटिस से मेरा कुछ लेना-देना नहीं: पटेल
एक सवाल के जवाब में पटेल ने सफाई देते हुए कहा कि सुनेत्रा पवार को भेजे गए नोटिस से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। उस नोटिस को ज्यादा अहमियत देने की कोई वजह नहीं है। सुनेत्रा पवार का अध्यक्ष पद पर चयन पार्टी के संविधान के तहत किया गया है। प्रफुल पटेल ने कहा कि अजित पवार की मौत के बाद पार्टी में एक बड़ी जगह बन गई है और उसे भरने की जरूरत है। इसके लिए पार्टी में कुछ सुधारों की जरूरत है, मैंने नोटिस आने से पहले बातचीत में अपनी राय बताई थी। मेरी इस राय का नोटिस से कोई लेना-देना नहीं है। बता दें कि पार्टी की कमान हाथ में लेने के बाद सुनेत्रा पवार ने केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजे पत्र में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे का पदनाम नहीं दिया था। इसको लेकर काफी विवाद हुआ था।
पार्टी पवार के बढ़ते कद से वरिष्ठ नेताओं में बेचैनी
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अजित एवं सुनेत्रा पवार के पुत्र राज्यसभा सदस्य पार्थ पवार पार्टी के निर्णय में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पार्थ के बढ़ते प्रभाव से पार्टी के कई वरिष्ठ नेता असहज महसूस कर रहे हैं।
क्यों उठा सुनेत्रा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन पर सवाल?
पार्टी के वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद सिंह ने वकीलों के जरिए नोटिस भेजा है और सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर ऑब्जेक्शन उठाया है। नोटिस में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर दोबारा चुनाव कराने की मांग की गई है। कानूनी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि अजित पवार के निधन के बाद पार्टी का अंतरिम नेतृत्व प्रफुल पटेल के हाथों में होना चाहिए था। अजित पवार की मौत के बाद सुनेत्रा पवार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। यह घोषणा 26 फरवरी को एनसीपी की जनरल मीटिंग में प्रफुल्ल पटेल ने की थी।
