4 क्रिकेटर, जो इंटरनेशनल क्रिकेट के मंच पर आए, अपनी चमक बिखेरी और फिर गुमनामी में खो गए


नई दिल्ली. नीले आसमान में चमकते हुए तारों को देखना हर किसी को पसंद होता है. लेकिन क्रिकेट की दुनिया में कुछ तारे ऐसे भी होते हैं जो एक बार चमकते हैं और फिर अचानक गुमनामी के अंधेरे में कहीं खो जाते हैं. भारतीय क्रिकेट का इतिहास ऐसे कई नामों से भरा पड़ा है जिन्होंने नीली जर्सी पहनने का अपना सपना तो पूरा किया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. यह कहानी उन क्रिकेटरों की नहीं है जिन्होंन शतकों का अंबार लगाया, बल्कि यह दास्तां है उन 4 खिलाड़ियों की जो इंटरनेशनल क्रिकेट के मंच पर आए, अपनी चमक बिखेरी और फिर वक्त के बेरहम थपेड़ों के बीच गुमनामी की चादर ओढ़कर ओझल हो गए.

वो चार क्रिकेटर जो चमकने के बाद हो गए गुमनाम.

कर्नाटक की धरती ने भारत को कई दिग्गज तेज गेंदबाज दिए हैं, और उन्हीं में से एक नाम उभरकर सामने आया था श्रीनाथ अरविंद (Srinath Arvind) का. घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए शानदार प्रदर्शन करने वाले अरविंद को साल 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 मैच में भारत के लिए डेब्यू करने का मौका मिला. साउथ अफ्रीका जैसी मजबूत टीम के सामने अरविंद ने गेंदबाजी की शुरुआत की. दबाव के उस क्षण में उन्होंने 1 विकेट तो चटकाया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का मिजाज अलग था. उस मुकाबले में उन्होंने 4 ओवर में 12 की महंगी इकॉनमी रेट से 44 रन लुटा दिए. वह मैच उनका पहला इंटरनेशनल मैच था, और किसी को नहीं पता था कि वही उनका आखिरी मैच भी साबित होगा. इसके बाद अरविंद को कभी नीली जर्सी पहनने का मौका नहीं मिला. वह एक टी20 मैच खेलकर इतिहास के पन्नों में कहीं खो गए.

वो चार क्रिकेटर जो चमकने के बाद हो गए गुमनाम.

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कश्मीर की वादियों से निकला गुमनाम सितारा परवेज रसूल
जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों से निकलकर जब कोई खिलाड़ी भारतीय टीम तक पहुंचता है, तो उम्मीदें आसमान छूने लगती हैं. परवेज रसूल (Parvez Rasool) के साथ भी ऐसा ही हुआ था. रसूल एक बेहतरीन ऑलराउंडर थे, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी फिरकी और बल्लेबाजी से खूब सुर्खियां बटोरी थीं. उनकी प्रतिभा को देखते हुए साल 2014 में उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ वनडे क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला, जहां उन्होंने 2 विकेट लिए. इसके बाद, साल 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ उन्हें अपने करियर का इकलौता टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का सौभाग्य मिला. इस टी20 मैच में उन्होंने 1 विकेट हासिल किया और 32 रन बनाए. लेकिन टीम में कड़ी प्रतिस्पर्धा और लगातार मौके न मिलने के कारण रसूल का इंटरनेशनल करियर इसी एक वनडे और एक टी20 मैच के बाद थम गया. आज रसूल क्रिकेट की मुख्यधारा से दूर गुमनामी के अंधेरे में जी रहे हैं.

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रफ्तार की वो आंधी जो जल्द ही शांत हो गई
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जन्मे सुदीप त्यागी (Sudeep Tyagi) एक समय भारतीय तेज गेंदबाजी का भविष्य माने जा रहे थे। घरेलू क्रिकेट में अपनी रफ्तार और स्विंग से बल्लेबाजों को छकाने वाले त्यागी को साल 2009 में भारतीय टीम का टिकट मिला. दिसंबर 2009 से लेकर 2010 के बीच उनका करियर बहुत तेजी से आगे बढ़ा. उन्होंने भारत के लिए 4 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिसमें उन्होंने 3 विकेट चटकाए. इसी दौरान उन्हें श्रीलंका के खिलाफ एक टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने का भी मौका मिला. लेकिन चोटों और फॉर्म में गिरावट ने इस युवा गेंदबाज के करियर पर ब्रेक लगा दिया. महज एक साल के भीतर उनका इंटरनेशनल करियर शुरू होकर खत्म भी हो गया. त्यागी ने भारत के लिए सिर्फ 1 टी20 मैच खेला और इसके बाद वे कभी राष्ट्रीय चयनकर्ताओं के रडार पर नहीं आ सके.

घरेलू क्रिकेट का ‘द वॉल’ जो इंटरनेशनल में नहीं टिक सका
घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा करने वाले सुब्रमण्यम बद्रीनाथ की कहानी सबसे ज्यादा भावुक करने वाली है. तमिलनाडु के इस बल्लेबाज को घरेलू क्रिकेट का ‘द वॉल’ कहा जाता था. आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए 95 मैच खेलने वाले और सैकड़ों घरेलू मैचों में हजारों रन बनाने वाले बद्रीनाथ ने भारत के लिए तीनों फॉर्मेट खेले. बद्रीनाथ ने भारत के लिए 2 टेस्ट मैच खेले जिसमें उन्होंने 63 रन बनाए, और 7 वनडे मैचों में 79 रन जोड़े. लेकिन टी20 इंटरनेशनल की बात करें, तो उन्हें भारत के लिए सिर्फ एक ही मैच खेलने का मौका मिला. साल 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए उस इकलौते टी20 मैच में उन्होंने 43 रनों की शानदार पारी खेली थी और वे ‘मैन ऑफ द मैच’ भी रहे थे. इतने बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद उन्हें दोबारा कभी टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलने का मौका नहीं मिला. आईपीएल और घरेलू स्तर पर महान खिलाड़ी होने के बावजूद इंटरनेशनल स्टेज पर वे एक गुमनाम सितारा बनकर रह गए.



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