फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी पाने वाले को हुई जेल. (सांकेतिक तस्वीर. (IANS))
श्रीनगर: जम्मू कश्मीर में जाली सर्टिफिकेट के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने वाले एक पूर्व पुलिस कांस्टेबल को जेल भेज दिए जाने का मामला सामने आया है. श्रीनगर की एक अदालत ने जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के एक व्यक्ति को जाली क्लास 12 के योग्यता प्रमाणपत्र का इस्तेमाल करके भारतीय रिजर्व पुलिस (IRP) में कांस्टेबल की नौकरी पाने के लिए दोषी ठहराया है. यह बात आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कश्मीर ने कही.
ईओडब्ल्यू, जिसे पहले क्राइम ब्रांच कश्मीर के नाम से जाना जाता था, के अनुसार, यह सजा लंबे समय से चल रहे भर्ती धोखाधड़ी का मामले में हुई है. विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट, 13वें वित्त आयोग/रेलवे मजिस्ट्रेट, श्रीनगर की कोर्ट ने नजीर अहमद मलिक को फर्जी हायर सेकेंडरी (10+2) सर्टिफिकेट जमा करके भारतीय रिजर्व पुलिस 9वीं बटालियन में कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति पाने का दोषी पाया.
जांच के दौरान जांच करने वालों ने सर्टिफिकेट जब्त कर लिया और वेरिफिकेशन के लिए जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजुकेशन (JKBOSE) को भेज दिया.
ईओडब्ल्यू ने कहा कि बोर्ड ने कन्फर्म किया है कि डॉक्यूमेंट जाली था. कोर्ट ने मलिक को रणबीर दंड संहिता (RPC) के सेक्शन 420 के तहत तीन साल की सजा और 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जो धोखाधड़ी से जुड़ा है.
अगर जुर्माना नहीं भरा गया तो उसे 15 दिन की अतिरिक्त साधारण कैद काटनी होगी. कोर्ट ने उन्हें नकली डॉक्यूमेंट को असली बताकर इस्तेमाल करने के लिए सेक्शन 471 आरपीसी के तहत दो साल की साधारण जेल की सजा भी सुनाई. दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी.
ईओडब्ल्यू ने लोगों से नौकरी पाने या किसी भी आधिकारिक काम के लिए नकली या बनावटी डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है. साथ ही, चेतावनी दी है कि ऐसे अपराधों के लिए जेल, जुर्माना और किसी व्यक्ति के करियर और प्रतिष्ठा को लंबे समय तक नुकसान हो सकता है.
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