फुटबॉल खेलकर सरकारी नौकरी ले रही हैं चम्पारण की लड़कियां, माता-पिता का भी नाम हो रहा रोशन


Last Updated:

सीठी गांव की बेटियां यह साबित कर रही हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो गरीबी और संसाधनों की कमी भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती है. बकौल अधिकारी, जिले की करीब 20 बच्चियों को फुटबॉल सहित अन्य खेल में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर जॉब मिली है. इनमें गौनाहा प्रखंड की काजल कुमारी, अन्नू कुमारी, लक्की कुमारी, दिव्या कुमारी, निर्मला कुमारी, ज्योति कुमारी, रश्मि कुमारी और रागिनी कुमारी सहित अन्य शामिल हैं. ये सभी बालिकाएं……

ख़बरें फटाफट

आशीष कुमार/पश्चिम चम्पारण: बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले के वनवर्ती क्षेत्र में स्थित गौनाहा प्रखंड का सीठी गांव अब अपनी बेटियों की बदौलत नई पहचान बना रहा है. इस गांव को अब ‘चम्पारण का फुटबॉल कैपिटल’ कहा जाने लगा है. यहां की 200 से अधिक लड़कियां फुटबॉल के मैदान में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं. इनमें से कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें सम्मान भी मिल चुका है. सीमित संसाधनों के बावजूद इस गांव की बेटियां बड़े सपने देख रही हैं. उनका लक्ष्य भारतीय महिला फुटबॉल टीम का हिस्सा बनना है.

एक गांव की 250 महिला खिलाड़ी
जिला खेल पदाधिकारी विजय पंडित ने बताया कि गौनाहा प्रखंड का सीठी गांव इन दिनों पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां करीब 250 लड़कियां फुटबॉल की नियमित ट्रेनिंग ले रही हैं. इनमें से कई खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिल चुका है. उन्होंने बताया कि इन खिलाड़ियों के परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर हैं. कई बेटियों ने गरीबी और संसाधनों की कमी के बीच खुद को तैयार किया है. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत नहीं छोड़ी. यही कारण है कि आज वे अपनी प्रतिभा के दम पर नई पहचान बना रही हैं.

प्रैक्टिस के लिए भी नहीं था मैदान, पहाड़ और नदियों में किया अभ्यास
सीठी गांव में आधुनिक स्टेडियम, जिम या खेल की अन्य बुनियादी सुविधाएं नही हैं. इसके बावजूद यहां की बेटियां हार नहीं मानती. वे नदियों के किनारे, खुले मैदानों और पहाड़ी इलाकों में अभ्यास करती हैं. इसी मेहनत के दम पर उन्होंने खुद को राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया है. गांव में संचालित ‘प्रथम खेल नर्सरी’ इन खिलाड़ियों के लिए उम्मीद की किरण बनी हुई है. यहां खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के साथ जरूरी खेल सामग्री और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बेहतर प्रदर्शन कर पाती हैं.

राष्ट्र स्तर तक पहचान
प्रथम खेल नर्सरी के प्रशिक्षक सुमित पांडे बताते हैं कि गांव की सभी खिलाड़ी प्रतिभाशाली हैं. हालांकि, कुछ खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से खास पहचान बनाई है. इनमें गीता कुमारी, प्रियंका कुमारी, तन्नू कुमारी और प्रीति कुमारी प्रमुख हैं. गीता कुमारी अंडर-16 वर्ग में बिहार की बेहतरीन मिडफील्डर मानी जाती हैं. वह तीन बार राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप में बिहार टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. उनके पिता पोलदार का काम करते हैं और कड़ी मेहनत से परिवार का पालन-पोषण करते हैं.

प्रियंका कुमारी भी सीठी गांव की रहने वाली हैं. वह बिहार टीम की मजबूत डिफेंडर हैं. उनके माता-पिता खेतिहर मजदूर हैं. प्रियंका अब तक पांच बार अंडर-16 राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप में बिहार की ओर से खेल चुकी हैं.

तन्नू कुमारी भी गांव की उभरती हुई खिलाड़ी हैं. वह गोलकीपर के रूप में बिहार और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं. अब तक तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं. वहीं, प्रीति कुमारी फुटबॉल के साथ एथलेटिक्स में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं. वह बिहार की तेज धाविकाओं में शामिल हैं. वर्ष 2025 में आयोजित मशाल प्रतियोगिता की 60 मीटर दौड़ में उन्होंने बिहार के करीब 54 लाख छात्र-छात्राओं के बीच विजेताओं में जगह बनाई. इस उपलब्धि के बाद वह अगले पांच वर्षों तक हर साल तीन लाख रुपये की छात्रवृत्ति पाने की पात्र बनीं.

खेल कर डिप्टी कलेक्टर तक बन सकती हैं बालिकाएं
सीठी गांव की बेटियां यह साबित कर रही हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो गरीबी और संसाधनों की कमी भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती है. बकौल अधिकारी, जिले की करीब 20 बच्चियों को फुटबॉल सहित अन्य खेल में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर जॉब मिली है. इनमें गौनाहा प्रखंड की काजल कुमारी, अन्नू कुमारी, लक्की कुमारी, दिव्या कुमारी, निर्मला कुमारी, ज्योति कुमारी, रश्मि कुमारी और रागिनी कुमारी सहित अन्य शामिल हैं. ये सभी बालिकाएं फिलहाल बैंक, रेलवे, प्रशासन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े पदों पर कार्यरत हैं. गौर करने वाली बात यह है कि यदि कोई महिला खिलाड़ी ओलंपिक में गोल्ड मेडल अपने नाम करती है, तो उसे डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे बड़े पदों की प्राप्ति हो सकती है.

About the Author

authorimg

Rajneesh Singh

जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…और पढ़ें



Leave a Comment