बंधुआ मजदूरी से जुड़े सामान पर अमेरिकी टैरिफ में विसंगतियां, भारत ने उठाए सवाल


पीटीआई, वाशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर व्यापारिक खींचतान देखी जा रही है। भारत ने बंधुआ मजदूरी से जुड़े सामान पर शुल्क लगाने के अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुनवाई की है, जिसमें अमेरिकी टैरिफ नीति में विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाया है।

वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने यूएसटीआर की समिति के सामने कहा कि अमेरिका 1600 ऐसे सामान को बंधुआ मजदूरी संबंधी जांच से छूट देता है, जिनका उत्पादन या खेती उसके देश में नहीं हो सकती।

समिति के सवालों के जवाब में संयुक्त सचिव ने कहा कि यूएसटीआर द्वारा दी गई छूट न केवल दुनियाभर की आपूर्ति शृंखला में बंधुआ मजदूरी की समस्या से निपटने के उद्देश्य को कमजोर करती है, बल्कि नियमों से बचने की कोशिशों से होने वाले नुकसान को रोकने के लक्ष्य को भी कमजोर करती है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपने देश के कपास और कपास से बने उत्पादों का इस्तेमाल करके तैयार वस्त्र उत्पादों के निर्यात पर रियायती शुल्क लगाता है।

मिश्रा ने कहा, अमेरिका के गारमेंट से जुड़े कच्चे माल के आयात पर कम शुल्क दरें हैं। टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़ी यह व्यवस्था एक मनमानी शर्त की तरह काम करती है। यह विदेशी मैन्युफैक्चर्स के स्रोत निर्धारण संबंधी निर्णयों को प्रभावित और सीमित करती है, जबकि इससे बंधुआ मजदूरी की चिंता का पूरी तरह समाधान नहीं होता।



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